ब्लूचिप नहीं... इन 10 छोटे शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारी कर रहे विदेशी निवेशक! नोट करें टॉप 3 स्टॉक्स के नाम

भारतीय शेयर बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों (FIIs) की रणनीति बदलती दिख रही है. बड़े ब्लूचिप शेयरों में एक्सपोजर घटाने के साथ विदेशी निवेशकों ने कई मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाई है. जानिए किन 10 शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी हुई.
ब्लूचिप नहीं... इन 10 छोटे शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारी कर रहे विदेशी निवेशक! नोट करें टॉप 3 स्टॉक्स के नाम

ब्लूचिप नहीं... इन 10 छोटे शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारी कर रहे विदेशी निवेशक! नोट करें टॉप 3 स्टॉक्स के नाम

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की चाल बदल चुकी है. पहले जहां उनका फोकस Reliance, HDFC Bank, Infosys और TCS जैसे बड़े शेयरों पर रहता था, वहीं अब वे तेजी से ग्रोथ वाली छोटी कंपनियों की ओर बढ़ रहे हैं.

आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार साल में विदेशी निवेशकों ने कई मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कई गुना बढ़ाई है. इनमें कुछ शेयर ऐसे हैं जहां FPI होल्डिंग 10-15% से बढ़कर 40-50% तक पहुंच गई है.

Home First Finance में सबसे बड़ा दांव

विदेशी निवेशकों की सबसे पसंदीदा कंपनी Home First Finance बनकर उभरी है. मार्च 2022 में इस कंपनी में FPI हिस्सेदारी 10.9% थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 45.7% हो गई. यानी चार साल में 34.8 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी.

Home First Finance Company India Ltd

यह पूरे डेटा में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है और बताती है कि विदेशी निवेशकों का इस हाउसिंग फाइनेंस कंपनी पर भरोसा लगातार बढ़ा है.

CarTrade में 50% के पार पहुंची होल्डिंग

दूसरे नंबर पर CarTrade है. इस कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 17.6% से बढ़कर 51% तक पहुंच गई. यानी 33.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी. सबसे खास बात यह है कि अब कंपनी के आधे से ज्यादा शेयर विदेशी निवेशकों के पास हैं, जो इसे FPI की सबसे पसंदीदा कंपनियों में शामिल करता है.

Max Healthcare पर भी बड़ा भरोसा

तीसरे नंबर पर Max Healthcare है. मार्च 2022 में कंपनी में FPI हिस्सेदारी 14.6% थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 45.4% हो गई. यानी 30.8 प्रतिशत अंक की शानदार बढ़ोतरी. हेल्थकेयर सेक्टर में बढ़ती संभावनाओं और कंपनी की मजबूत ग्रोथ ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है.

इन 7 शेयरों में भी बढ़ी हिस्सेदारी

टॉप 3 के अलावा विदेशी निवेशकों ने कई अन्य कंपनियों में भी बड़ा दांव लगाया है.

  • TD Power में हिस्सेदारी 2.1% से बढ़कर 26.7% हो गई.
  • Eternal में FPI होल्डिंग 10.4% से बढ़कर 30.8% पहुंच गई.
  • GE Vernova T&D में हिस्सेदारी सिर्फ 0.3% से बढ़कर 20.4% हो गई.
  • AWL Agri Business में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 2% से बढ़कर 21.9% हो गई.
  • One97 Communications (Paytm) में यह 4.4% से बढ़कर 24.3% पहुंच गई.
  • Aptus Value Housing Finance में FPI होल्डिंग 11.4% से बढ़कर 30.3% हो गई.
  • Auctus Chemicals में हिस्सेदारी 2.2% से बढ़कर 19.5% तक पहुंच गई.

बड़े शेयरों से क्यों घटा मोह?

दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान Reliance Industries, HDFC Bank, Infosys, TCS, Kotak Mahindra Bank, Asian Paints और Tech Mahindra जैसे बड़े शेयरों का FPI पोर्टफोलियो में योगदान लगातार घटा है. इससे साफ संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक अब सिर्फ बड़े और सुरक्षित शेयरों में पैसा लगाने के बजाय ज्यादा ग्रोथ की संभावना वाले बिजनेस तलाश रहे हैं.

क्या संकेत मिल रहा है?

FPI की यह रणनीति बताती है कि विदेशी निवेशकों का फोकस अब तेजी से बदल रहा है. वे उन कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं जहां आने वाले वर्षों में तेज कारोबार विस्तार और बेहतर कमाई की संभावना दिखाई दे रही है. यही वजह है कि मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों में उनकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जबकि कई बड़े ब्लूचिप शेयरों का पोर्टफोलियो में वजन कम हुआ है.

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