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IGL, MGL Share Price: सरकार ने हाल ही में IGL और MGL जैसी सिटी गैस कंपनियों को मिलने वाली APM (Administered Pricing Mechanism) गैस के आवंटन में 18% से 20% की कटौती की है. अब इसकी भरपाई New Well Gas से होगी. यह बदलाव सीधे तौर पर कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे पर असर डाल सकता है. आज IGL, MGL के शेयरों में गिरावट भी दर्ज हुई है. MGL Share Price करीब 5% गिरा था, वहीं IGL में ढाई पर्सेंट की गिरावट आई थी. इस रिपोर्ट में समझते हैं कि यह कटौती क्या है, इसका असर क्यों होगा, और ब्रोकरेज हाउसेज़ इस पर क्या कह रहे हैं.
IGL को मिलने वाली APM गैस में 20% की कटौती की गई है. MGL के लिए कटौती 18% रही. कटौती की भरपाई New Well Gas (NWG) से की जाएगी, जिसकी कीमत APM गैस से ज्यादा है. अनुमान के मुताबिक, New Well Gas की कीमत APM से करीब $1.3/mmBtu ज्यादा है. mmBtu का मतलब है Million British Thermal Units, जो गैस की मात्रा मापने की यूनिट है.
New Well Gas की कीमत कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतों से जुड़ी होती है. फिलहाल $65 के क्रूड पर NWG की कीमत करीब $7.2/mmBtu है. अगर कच्चा तेल चढ़ता है, तो NWG की कीमत भी बढ़ेगी — जिससे इन कंपनियों की लागत और बढ़ सकती है.
कंपनियों की मार्जिन पर असर पड़ेगा. कंपनियां NWG को पूरी तरह ग्राहकों पर पास ऑन नहीं कर पाएंगी. इसका सीधा असर मुनाफे और मार्जिन पर पड़ेगा. CNG प्राइस हाइक करना एक उपाय हो सकता है, लेकिन बाजार की प्रतिस्पर्धा और पॉलिसी कंडीशंस के चलते इसमें भी सीमाएं हैं.
Jefferies ने MGL के लिए ‘Underperform’ की रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹1100 से बढ़ाकर ₹1220 किया है. MGL का शेयर 1255 रुपये के आसपास है, यानी कि ब्रोकरेज ने मौजूदा भाव से नीचे का टारगेट दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक APM कटौती से MGL की CNG वॉल्यूम में 26% तक की गिरावट आ सकती है, जबकि लागत पूरी तरह पास ऑन करना मुश्किल है. हालांकि, NWG दूसरी वैकल्पिक गैसों की तुलना में सस्ती है, इसलिए कुछ हद तक राहत की बात भी है.
वहीं CLSA का अनुमान है कि IGL और MGL को CNG की कीमत में ₹0.60/kg तक बढ़ोतरी करनी होगी ताकि लागत में बढ़ोतरी को कवर किया जा सके. CLSA ने MGL और IGL दोनों पर ‘Accumulate’ रेटिंग कायम रखते हुए, MGL के लिए टारगेट ₹1710 और IGL के लिए ₹220 तय किया है. MGL का शेयर 1,255 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था, यानी कि टारगेट प्राइस 36% ऊपर है. IGL का शेयर 174 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है, ऐसे में ब्रोकरेज का टारगेट प्राइस 26% ऊपर है.
कंपनियां प्राइस हाइक का रास्ता अपना सकती हैं, जैसेकि सीमित दायरे में CNG कीमतें बढ़ाना. वॉल्यूम ग्रोथ को लेकर ज्यादा बिक्री से मार्जिन के नुकसान को बैलेंस करने का की कोशिश कर सकती हैं. अन्य गैस सोर्स ढूंझ सकती हैं. भविष्य में सरकार से ज्यादा APM गैस आवंटन की मांग की जा सकती है. कुल मिलाकर, IGL और MGL जैसी कंपनियों के लिए APM गैस कटौती लागत बढ़ाने वाला फैक्टर है, लेकिन इसके साथ-साथ यह नीति बदलाव का संकेत भी है. ऐसे में कंपनियों को अपनी कीमत निर्धारण नीति और संचालन कुशलता पर काम करना होगा.