&format=webp&quality=medium)
DMart पर लॉन्ग टर्म के लिए ब्रोकरेज को नहीं है भरोसा.
शेयर बाजार में जब भी रिटेल सेक्टर की बात आती है, तो राधाकिशन दमानी की कंपनी 'एवेन्यू सुपरमार्ट्स' यानी डीमार्ट (DMart) का नाम सबसे ऊपर आता है. डीमार्ट ने अपने बिजनेस मॉडल से सालों तक निवेशकों को मालामाल किया है. हाल के दिनों में कंपनी ने स्टोर्स खोलने की अपनी रफ्तार भी बढ़ाई है और ऑपरेशनल लेवल पर भी सुधार दिखाया है. लेकिन, इन सब अच्छी खबरों के बीच दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस HSBC ने एक ऐसी रिपोर्ट दी है, जिसने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
फिलहाल डीमार्ट का शेयर 4,614 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है. HSBC ने इसका टारगेट प्राइस तो बढ़ाया है, लेकिन उनकी 'Reduce' (हिस्सेदारी घटाने) की रेटिंग अब भी बरकरार है. यानी ब्रोकरेज को लगता है कि लंबी रेस में इस शेयर के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं.
HSBC ने डीमार्ट पर अपना टारगेट प्राइस 3,500 रुपये से बढ़ाकर 4,070 रुपये कर दिया है. हालांकि, यह नया टारगेट भी मौजूदा बाजार भाव से काफी नीचे है. ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी ने स्टोर खोलने की अपनी क्षमता में जबरदस्त सुधार किया है, लेकिन बाजार की कड़ी टक्कर और भविष्य के मॉडल को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है.
ये भी पढ़ें: आने वाले दिनों में IT शेयरों का क्या होगा? CITI की 'कॉशियस' रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन, हाथ मलते रह जाएंगे निवेशक
डीमार्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से यह रही है कि वह अपने स्टोर्स की संख्या कितनी तेजी से बढ़ा सकता है. कंपनी खुद की जमीन खरीदकर स्टोर बनाने के मॉडल पर काम करती है, जिसमें समय लगता है. लेकिन अब लगता है कि कंपनी ने इस बाधा को पार कर लिया है.
| विवरण | पिछला अनुमान (FY27-28) | नया अनुमान (FY27-28) |
| नए स्टोर्स की संख्या | 65-70 स्टोर्स | 90-95 स्टोर्स |
महंगाई का बढ़ना आम आदमी के लिए भले ही बुरी खबर हो, लेकिन डीमार्ट जैसे 'वैल्यू रिटेलर' के लिए यह फायदेमंद साबित हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में बढ़ती महंगाई की वजह से डीमार्ट की 'लाइक-फॉर-लाइक' (LFL) सेल्स ग्रोथ में रिकवरी आ सकती है.
ये भी पढ़ें: Risk भी, Reward भी! Federal Bank के शेयरों पर ₹260 से ₹340 तक टारगेट रेंज, जानिए करना है निवेश या रहना है दूर?
जब जरूरी चीजों के दाम बढ़ते हैं, तो ग्राहक बचत करने के लिए सस्ते विकल्पों और डिस्काउंट वाले स्टोर्स (जैसे डीमार्ट) की तरफ रुख करते हैं. इससे स्टोर में फुटफॉल यानी ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और लोग जरूरी सामान ज्यादा मात्रा में खरीदते हैं. हालांकि, HSBC का कहना है कि यह फायदा सिर्फ 'साइक्लिकल' (कुछ समय के लिए) है, 'स्ट्रक्चरल' (स्थायी) नहीं.
डीमार्ट की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'सबसे कम कीमत' (Value Leadership) रही है. लेकिन अब शहरी बाजारों में खेल बदल रहा है. ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेयर्स ने ग्राहकों की आदतें बदल दी हैं.
शहरी इलाकों में डीमार्ट की 'सबसे सस्ता होने' वाली छवि अब उतनी मजबूत नहीं रह गई है. दूसरे रिटेलर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियां अपनी प्राइवेट लेबल स्ट्रेटजी और छोटे स्टोर फॉर्मेट के जरिए ग्राहकों को लुभा रही हैं. लोगों को अब 10 मिनट में डिलीवरी चाहिए, जिसके लिए वे थोड़ा ज्यादा पैसा देने को भी तैयार हैं, ऐसे में डीमार्ट के बड़े स्टोर्स के लिए चुनौती बढ़ गई है.
डीमार्ट के सामने अब एक बड़ी दुविधा है. एक तरफ उसे तेजी से स्टोर बढ़ाकर अपनी ग्रोथ साबित करनी है, तो दूसरी तरफ बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच अपने मार्जिन (मुनाफे) को बचाए रखना है. जैसे-जैसे बाजार में भीड़ बढ़ रही है, डीमार्ट के लिए अपना दबदबा बनाए रखना महंगा साबित हो सकता है.
ये भी पढ़ें: 'डोमिनो इफेक्ट': तेल की कीमत बढ़ने से कमर्शियल गैस समेत सबकुछ महंगा! $126 पहुंचा क्रूड और सिलेंडर के दाम ₹1000 बढ़े
नए स्टोर्स खोलने में भारी निवेश की जरूरत होगी. दूसरे फॉर्मेट्स और ऑनलाइन कंपनियों से मुकाबला करने के लिए कीमतों को और कम रखना पड़ सकता है, जिससे मार्जिन पर दबाव आएगा. बड़े स्टोर मॉडल के साथ क्विक कॉमर्स की तेजी का मुकाबला करना आसान नहीं होगा.
डीमार्ट एक शानदार कंपनी है और इसमें कोई शक नहीं कि इसका मैनेजमेंट काबिल है. स्टोर विस्तार की बढ़ती रफ्तार और ऑपरेशन्स में सुधार इसके लिए अच्छी खबर है. लेकिन HSBC की रिपोर्ट हमें यह याद दिलाती है कि बाजार हमेशा बदलता रहता है.
आज की तारीख में डीमार्ट के सामने सिर्फ दूसरे किराना स्टोर्स नहीं, बल्कि टेक-आधारित डिलीवरी कंपनियां खड़ी हैं. अगर आप लॉन्ग टर्म निवेशक हैं, तो आपको यह देखना होगा कि क्या डीमार्ट अपने पुराने जलवे को नए दौर के कॉम्पिटिशन के बीच बरकरार रख पाएगा. फिलहाल के लिए, टारगेट बढ़ाना राहत की बात है, लेकिन 'रिड्यूस' रेटिंग सावधानी बरतने का इशारा कर रही है.
HSBC ने डीमार्ट के लिए क्या नया टारगेट दिया है?
HSBC ने डीमार्ट (Avenue Supermarts) का टारगेट प्राइस 3,500 रुपये से बढ़ाकर 4,070 रुपये कर दिया है.
टारगेट बढ़ाने के बाद भी 'Reduce' रेटिंग क्यों दी गई है?
ब्रोकरेज को लगता है कि स्टोर विस्तार अच्छा है, लेकिन क्विक कॉमर्स और अन्य रिटेलर्स से बढ़ता मुकाबला भविष्य में कंपनी की ग्रोथ और मार्जिन पर दबाव डाल सकता है.
अगले दो सालों में डीमार्ट कितने नए स्टोर्स खोल सकता है?
नए अनुमानों के मुताबिक, डीमार्ट वित्त वर्ष 2027 और 2028 में करीब 90 से 95 नए स्टोर्स जोड़ सकता है.
क्या महंगाई से डीमार्ट को कोई फायदा होगा?
हां, महंगाई बढ़ने पर ग्राहक बचत के लिए वैल्यू रिटेलर्स की ओर जाते हैं, जिससे डीमार्ट की सेल्स और फुटफॉल में सुधार होने की उम्मीद है.
डीमार्ट के सामने सबसे बड़ा रिस्क क्या है?
सबसे बड़ा रिस्क शहरी बाजारों में बढ़ता कॉम्पिटिशन और क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती पैठ है, जो ग्राहकों को तेज डिलीवरी की सुविधा दे रही हैं.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)