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शेयर बाजार में जब कोई चमकता हुआ सितारा अचानक टूटने लगता है, तो निवेशक अक्सर डर जाते हैं. लेकिन समझदार निवेशक जानते हैं कि कभी-कभी यह गिरावट एक बड़ा मौका लेकर आती है. हम बात कर रहे हैं डिक्सन टेक्नोलॉजीज (Dixon Tech) की, जो भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया का एक बड़ा नाम है.
पिछले कुछ दिनों से इस शेयर में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे यह अपने 52-हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है. लेकिन इसी बीच ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस HSBC ने एक ऐसी रिपोर्ट दी है, जिसने बाजार में हलचल मचा दी है. टारगेट भले ही घटा दिया गया हो, लेकिन मुनाफे की उम्मीद अभी भी बहुत ज्यादा है.
डिक्सन के शेयर पिछले एक महीने में करीब 12% और तीन महीनों में 30% तक टूट चुके हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि यह मल्टीबैगर स्टॉक अचानक सुस्त पड़ गया? HSBC की रिपोर्ट में इसके पीछे कुछ ठोस कारण बताए गए हैं. सबसे बड़ी वजह है मेमरी की कीमतों में अचानक आया उछाल. इसके अलावा, कंपनी के कुछ जॉइंट वेंचर (JV) को मिलने वाली मंजूरियों में देरी हो रही है. मोबाइल PLI स्कीम के खत्म होने की चिंताओं ने भी निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है.
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बाजार को लग रहा है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजे थोड़े फीके रह सकते हैं क्योंकि इस दौरान कोई बहुत बड़ा इवेंट या ट्रिगर नजर नहीं आ रहा है. इन्हीं सब वजहों से HSBC ने अपना टारगेट प्राइस 19,600 रुपये से घटाकर 15,500 रुपये कर दिया है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि नया टारगेट भी आज की कीमत (करीब 11,825 रुपये) से 31% ऊपर है.
अगर आप डिक्सन को सिर्फ एक साधारण कंपनी समझ रहे हैं, तो रुकिए. यह भारत की सबसे बड़ी स्वदेशी डिजाइन और समाधान वाली कंपनी है. आसान भाषा में कहें तो यह बड़ी-बड़ी ग्लोबल कंपनियों के लिए टीवी, स्मार्टफोन, एलईडी लाइट और पीसीबी असेंबली बनाती है. इसे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) का राजा माना जाता है.
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कंपनी का प्रदर्शन काफी दमदार रहा है. कंपनी के शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर 185% की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई है. यही नहीं, कंपनी का ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) 40% रहा है, जिसे बहुत शानदार माना जाता है. पिछले तीन सालों में इसका औसत रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 28% रहा है.
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डिक्सन अब सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी अब सेमीकंडक्टर से जुड़े पीसीबी फैब्रिकेशन (PCB Fabrication) में अपनी क्षमता बढ़ा रही है. इसके लिए कंपनी ने कई ग्लोबल ब्रांड्स के साथ नए समझौते किए हैं. भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'PLI स्कीम' का पूरा फायदा उठाते हुए डिक्सन अब चिप-एम्बेडेड पीसीबी और हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है.
कंपनी का पूरा फोकस अब स्मार्टफोन और एलईडी मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार करने पर है. वह ऐसी साझेदारियां तलाश रही है जो उसे सेमीकंडक्टर सेक्टर में एक बड़ा खिलाड़ी बना सकें. यही वजह है कि गिरावट के बावजूद एक्सपर्ट्स को इसके भविष्य पर पूरा भरोसा है.
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सिर्फ HSBC ही नहीं, बल्कि नोमुरा (Nomura) जैसी दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ने भी डिक्सन पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है. नोमुरा ने इसका टारगेट 16,598 रुपये रखा है. उनका कहना है कि भले ही शॉर्ट-टर्म में ग्रोथ थोड़ी धीमी दिख रही हो, लेकिन लॉन्ग टर्म के लिए कंपनी का नजरिया बहुत मजबूत है.
फिलहाल यह स्टॉक अपनी पुरानी वैल्यूएशन के मुकाबले काफी सस्ते में मिल रहा है, जो इसे निवेश के लिए आकर्षक बनाता है. हालांकि जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने भी इसके टारगेट में 30% की कटौती की है, लेकिन ज्यादातर जानकारों का मानना है कि सेक्टर की समस्याओं और प्रॉफिट बुकिंग के कारण यह गिरावट आई है, जो जल्द ही थम सकती है.
Q1. HSBC ने डिक्सन टेक्नोलॉजीज के लिए नया टारगेट क्या दिया है?
A1. HSBC ने डिक्सन के लिए अपना टारगेट प्राइस 19,600 रुपये से घटाकर 15,500 रुपये कर दिया है, लेकिन 'Buy' की सलाह बरकरार रखी है.
Q2. डिक्सन के शेयर में हालिया गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
A2. मेमरी की कीमतों में बढ़ोतरी, जॉइंट वेंचर की मंजूरी में देरी और मोबाइल PLI स्कीम के खत्म होने की चिंताओं के कारण शेयर में गिरावट आई है.
Q3. कंपनी के वित्तीय नतीजे कैसे रहे हैं?
A3. वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कंपनी के शुद्ध मुनाफे में 185% की सालाना वृद्धि हुई है और इसका ROCE 40% रहा है.
Q4. क्या डिक्सन सेमीकंडक्टर सेक्टर में काम कर रही है?
A4. जी हां, कंपनी सेमीकंडक्टर से जुड़े पीसीबी फैब्रिकेशन (PCB Fabrication) में अपनी क्षमता बढ़ा रही है और ग्लोबल कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही है.
Q5. डिक्सन का 52-हफ्तों का निचला स्तर क्या है?
A5. डिक्सन के शेयर ने 7 जनवरी 2026 को 11,480 रुपये का अपना 52-हफ्तों का निचला स्तर छुआ था.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)