पहले खराब नतीजे आए, फिर ब्रोकरेज ने टारगेट घटाए; फिर भी 8% चढ़ा ₹10,943 वाला शेयर; SELL के पहले जान लें नया Target 

Dixon Tech Share Price: Q4 में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ कमजोर रही, EBITDA घटा और स्मार्टफोन बिजनेस का आउटलुक भी थोड़ा सुस्त दिखा. इसके बावजूद बाजार में खरीदारी क्यों लौटी? इसकी सबसे बड़ी वजह है आने वाले समय के ग्रोथ ट्रिगर्स और कई बड़े ब्रोकरेज हाउसेस का अब भी कंपनी की लॉन्ग टर्म स्टोरी पर भरोसा बनाए रखना.
पहले खराब नतीजे आए, फिर ब्रोकरेज ने टारगेट घटाए; फिर भी 8% चढ़ा ₹10,943 वाला शेयर; SELL के पहले जान लें नया Target 

Dixon tech के शेयरों में Q4 नतीजों के बाद दिखी तेजी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AI/ChatGPT)

Dixon Tech Share Price: EMS सेक्टर की दिग्गज कंपनी Dixon Technologies के शेयरों में खराब Q4 नतीजों के बावजूद बुधवार को जोरदार रिकवरी देखने को मिली. शेयर करीब 8% उछलकर 11,030 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया. दिलचस्प बात ये है कि कंपनी के नतीजे बहुत दमदार नहीं थे. कुछ ब्रोकरेज फर्म्स ने अपने टारगेट प्राइस में कटौती भी की है.

Q4 में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ कमजोर रही, EBITDA घटा और स्मार्टफोन बिजनेस का आउटलुक भी थोड़ा सुस्त दिखा. इसके बावजूद बाजार में खरीदारी क्यों लौटी? इसकी सबसे बड़ी वजह है आने वाले समय के ग्रोथ ट्रिगर्स और कई बड़े ब्रोकरेज हाउसेस का अब भी कंपनी की लॉन्ग टर्म स्टोरी पर भरोसा बनाए रखना.

कंपनी ने Q4 में तिमाही आधार पर रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 2% दिखाई, जबकि EBITDA करीब 8% घटा. कंज्यूमर सेंटीमेंट कमजोर रहने और मेमोरी चिप की कीमतें बढ़ने का असर बिजनेस पर दिखा. इसके अलावा Vivo JV की मंजूरी में देरी भी चिंता का कारण बनी हुई है. लेकिन ऐसा लग रहा है कि बाजार फिलहाल सिर्फ तिमाही नतीजों को नहीं, बल्कि आने वाले 2-3 साल की ग्रोथ कहानी को ज्यादा अहमियत दे रहा है.

Dixon Tech Q4 Results

HSBC को नए ग्रोथ ट्रिगर्स पर भरोसा

ब्रोकरेज HSBC ने Dixon Tech पर Hold रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया है. यानी मौजूदा भाव से करीब 9% अपसाइड की संभावना.

HSBC का कहना है कि Q4 के नंबर्स कुल मिलाकर उम्मीद के मुताबिक रहे. मोबाइल फोन वॉल्यूम थोड़ा कमजोर रहा, लेकिन कंपनी लगातार नए बिजनेस क्षेत्रों में एंट्री की तैयारी कर रही है. डेटा सेंटर सर्वर्स जैसे नए ग्रोथ लीवर्स भविष्य में बड़ा मौका बन सकते हैं. हालांकि ब्रोकरेज ने Vivo JV में देरी की वजह से FY27 EPS अनुमान करीब 4% घटाया है.

JP Morgan अभी भी बुलिश

JP Morgan ने Dixon Tech पर Overweight रेटिंग बनाए रखी है. हालांकि टारगेट प्राइस को 13,000 से घटाकर 12,700 रुपये किया गया है. इसके बावजूद ब्रोकरेज को शेयर में करीब 16% अपसाइड दिख रहा है.

ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा कमजोरी अस्थायी हो सकती है और Dixon लंबे समय में EMS सेक्टर की सबसे मजबूत कंपनियों में बनी रह सकती है. कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और क्लाइंट बेस अभी भी उसकी बड़ी ताकत है.

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UBS को 25% तक का अपसाइड दिख रहा

UBS ने भी Dixon Tech पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है. टारगेट प्राइस 13,700 रुपये रखा गया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 25% ऊपर है.

UBS का मानना है कि कंपनी का लॉन्ग टर्म मैन्युफैक्चरिंग मौका अभी भी मजबूत है. भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम लगातार बढ़ रहा है और Dixon उसका बड़ा फायदा उठा सकती है.

सबसे ज्यादा बुलिश Macquarie

Macquarie इस शेयर पर सबसे ज्यादा बुलिश दिखा. ब्रोकरेज ने Outperform रेटिंग के साथ 15,000 रुपये का टारगेट दिया है, यानी करीब 37% अपसाइड.

Macquarie का कहना है कि Q4 में हल्की बढ़त देखने को मिला और FY27 कॉमेंट्री पॉजिटिव रही. मैनेजमेंट का मानना है कि स्मार्टफोन वॉल्यूम्स भले फ्लैट रहें, लेकिन हायर रियलाइजेशन की वजह से रेवेन्यू ग्रोथ बनी रह सकती है. कंपनी 12-15% हायर रियलाइजेशन की उम्मीद कर रही है.

Jefferies और CLSA क्यों सतर्क?

जहां कुछ ब्रोकरेज बुलिश हैं, वहीं Jefferies और CLSA ने थोड़ा सतर्क रुख अपनाया है.

Jefferies ने Hold रेटिंग रखते हुए टारगेट प्राइस घटाकर 10,280 रुपये कर दिया है. यानी मौजूदा स्तर से करीब 6% डाउनसाइड. ब्रोकरेज का कहना है कि शेयर का वैल्युएशन अभी भी काफी महंगा है. Dixon FY27 के अनुमानित अर्निंग्स के मुकाबले करीब 51x PE पर ट्रेड कर रहा है, जो कई EMS पीयर्स से ज्यादा है.

Jefferies के मुताबिक H2FY26 में सेल्स ग्रोथ काफी धीमी हो गई. H1 में जहां ग्रोथ 53% थी, वहीं H2 में सिर्फ 2% रह गई. इसके पीछे कंज्यूमर डिमांड स्लोडाउन और मेमोरी की कीमतों में तेजी बड़ा कारण रहा.

CLSA ने भी Hold रेटिंग रखते हुए टारगेट प्राइस घटाकर 10,400 रुपये कर दिया है. ब्रोकरेज का मानना है कि ग्लोबल मेमोरी प्राइस अगर लंबे समय तक ऊंचे रहे, तो कंपनी की अर्निंग्स पर दबाव बना रह सकता है. साथ ही स्मार्टफोन मार्केट शेयर अब पीक के करीब दिख रहा है.

Goldman Sachs सबसे ज्यादा Bearish

Goldman Sachs ने Dixon Tech पर Sell रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस घटाकर 9,790 रुपये कर दिया है. यानी मौजूदा स्तर से करीब 10% डाउनसाइड.

ब्रोकरेज को चिंता है कि नियर टर्म में अर्निंग ग्रोथ कमजोर रह सकती है और मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.

आखिर बाजार क्यों खरीद रहा शेयर?

भले ही Q4 नतीजे कमजोर रहे हों, लेकिन निवेशक फिलहाल Dixon की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पर दांव लगा रहे हैं. भारत में EMS सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और Dixon इस थीम की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों में शामिल है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 Dixon Technologies क्या करती है?

Dixon Technologies भारत की बड़ी EMS (Electronics Manufacturing Services) कंपनी है. यह मोबाइल, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई consumer devices बनाती है.

Q2 EMS सेक्टर क्या होता है?

EMS सेक्टर उन कंपनियों का होता है जो दूसरे ब्रांड्स के लिए electronics products manufacture करती हैं.

Q3 Vivo JV का Dixon के लिए कितना महत्व है?

Vivo JV कंपनी के smartphone manufacturing business के लिए बड़ा growth trigger माना जा रहा है. इसकी मंजूरी में देरी फिलहाल चिंता का कारण है.

Q4 क्या Dixon Tech अभी भी expensive valuation पर ट्रेड कर रहा है?

कुछ ब्रोकरेज जैसे Jefferies और CLSA का मानना है कि valuation अभी भी काफी ऊंचा है, जबकि bullish ब्रोकरेज future growth potential पर फोकस कर रहे हैं.

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