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ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमत में तेजी से उछाल देखा जा रहा है. इंडोनेशिया में फ्रीपोर्ट-मैकमोरन की ग्रासबर्ग खदान में मिट्टी भरने के बाद कॉपर की कीमतों में करीब 5 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे ग्लोबल कॉपर प्रोडक्शन में 2.5 लाख टन से ज्यादा की कमी आ सकती है. ऐसे में राइजिंग डिमांड और फॉलिंग सप्लाई के कारण कॉपर की कीमत बढ़ेगी. हिंदुस्तान कॉपर देश की एकमात्र कंपनी है जो कॉपर ओर की माइनिंग करती है. इस स्टॉक पर फोकस कर सकते हैं.
Hindustan Copper का शेयर हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में यह शेयर करीब -5% की गिरावट के साथ 311 रुपए पर बंद हुआ. पिछले 5 सत्रों से लगातार इस शेयर में जोरदार एक्शन था और इसमें यह करीब 18% तक उछला. क्लोजिंग आधार पर इस शेयर ने पिछले एक हफ्ते में 10.4%, दो हफ्ते में 11% एक महीने में 35%, इस साल अब तक 26%, एक साल में -9%, दो साल में 100% तीन साल में 195% का रिटर्न दिया है.
Hindustan Copper देश की एकमात्र कॉपर कंपनी है जो कॉपर माइनिंग, स्मेल्टिंग, रीफाइनिंग और कॉपर रॉड्स बनाने का काम करती है. इस कंपनी का गठन 1967 में हुआ था और इसे मिनिरत्न का दर्जा मिला हुआ है. वर्तमान में 66.14% ओनरशिप सरकार के पास है. भारत के 45% कॉपर रिजर्व का एक्सेस इस कंपनी के पास है. कंपनी के पास 755.32 मिलियन टन कॉपर का रिजर्व और रिसोर्स है. ग्लोबली 5600 मिलियन टन कॉपर का रिजर्व एंड रिसोर्स है. FY25 में कंपनी का कॉपर प्रोडक्शन 25.24 Kt था जो ग्लोबल प्रोडक्शन का महज 0.12% था.
कॉपर की कीमतें आने वाले समय में 11,700 डॉलर मीट्रिक प्रति टन तक पहुंच सकती है. इसकी वजह कॉपर की मांग बढ़ना है और आपूर्ति का सीमित होना है. यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई. MCX पर सितंबर एक्सपायरी के कॉपर फ्यूचर्स का दाम गुरुवार को 950 रुपए पर पहुंच गया, जबकि LME पर कॉपर फ्यूचर्स का दाम लगभग 10,300 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया. व्यापारियों ने इस उछाल का कारण ग्रासबर्ग खदान में उत्पादन में व्यवधान को बताया. इससे ग्लोबल कॉपर प्रोडक्शन में 2.5 लाख टन से ज्यादा की कमी आ सकती है.
विश्लेषकों का कहना है कि ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन के कारण आपूर्ति में कमी और लगातार मांग के कारण इस वर्ष कॉपर की कीमतों में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि हुई है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा कि इलेक्ट्रिफिकेशन, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने, ग्रिड अपग्रेडेशन, रिन्यूएबल एनर्जी सेंटर्स और एआई-संचालित डेटा केंद्रों में वृद्धि ने इस तेजी को बढ़ावा दिया है, जो सभी कॉपर पर अत्यधिक निर्भर हैं.
इन दबावों के कारण कॉपर स्टॉक कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो 5 साल के औसत से भी नीचे है. 2025 के पहले 7 महीनों में बाजार में 1,01,000 टन सरप्लस स्टॉक था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 4,01,000 टन अधिशेष स्टॉक था. फ्रीपोर्ट-मैकमोरन ने अपनी ग्रासबर्ग खदान से कॉपर की शिपमेंट पर फोर्स मैज्योर घोषित कर दिया और ब्लॉककेव संचालन को अनिश्चित काल के लिए रोक दिया. चीन ने सितंबर की शुरुआत में प्रोसेस्ड कॉपर के उत्पादन में भी 5 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी, जिससे बाजार पर लगभग 500,000 टन का असर पड़ा. मोतीलाल ओसवाल ने एक नोट में कहा कि कॉपर माइनर्स को उच्च कीमतों से लाभ होने की संभावना है, और निकट भविष्य में उनके मुनाफे में वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है.
(IANS इनपुट के साथ)