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BSE Share Price: BSE Ltd. का शेयर बीते एक साल में निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दे चुका है. भारत के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज ने बीते एक साल में लगभग 190% का रिटर्न दिया है, जबकि पिछले पांच साल में 5000% से ज्यादा की तेजी दर्ज की है. हाल ही में 10 जून को शेयर ने ₹3030 का ऑल टाइम हाई छुआ था, लेकिन वहां से अब तक यह करीब 11% फिसल चुका है. बुधवार को शेयर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. प्री-ओपनिंग में 5% गिरावट के बाद दोपहर 12:16 बजे तक यह 1% की गिरावट के साथ ₹2650 पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन अब नई चिंता एक्सपायरी के दिन को शिफ्ट करने को लेकर हो रही है.
इस गिरावट की मुख्य वजह BSE द्वारा इक्विटी डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी तारीख में बदलाव का ऐलान है. अब तक जहां BSE में एक्सपायरी मंगलवार को होती थी, वहीं 1 सितंबर 2025 से यह गुरुवार को होगी, जैसा कि NSE में पहले से ही होता है. SEBI की मंजूरी के बाद BSE ने यह बदलाव किया है ताकि प्रणाली में एकरूपता लाई जा सके. हालांकि, इस बदलाव से कंपनी के डेरिवेटिव वॉल्यूम और मार्केट शेयर पर असर पड़ सकता है.
फिलहाल, इंडेक्स ऑप्शन में BSE का मंगलवार को 40% मार्केट शेयर है, लेकिन गुरुवार को यह सिर्फ 8% ही रह जाता है. NSE गुरुवार को 92% मार्केट शेयर के साथ काफी मजबूत स्थिति में है. ऐसे में BSE के लिए गुरुवार की एक्सपायरी एक चुनौती बन सकती है.
Goldman Sachs का मानना है कि इस बदलाव से BSE का मार्केट शेयर मौजूदा 24% से घटकर 21% तक जा सकता है. कंपनी को दोबारा 24% हिस्सेदारी पाने में 6–7 महीने लग सकते हैं. उन्होंने FY26 की EPS (प्रति शेयर आय) में 2% की कटौती की है, हालांकि FY27 और FY28 के अनुमान पहले जैसे ही रखे हैं. गोल्डमैन ने BSE पर अपनी रेटिंग Neutral रखी है और टारगेट प्राइस को ₹2490 से घटाकर ₹2430 कर दिया है.
वहीं Jefferies का कहना है कि नए एक्सपायरी डे की वजह से वॉल्यूम पर 5–10% तक असर पड़ सकता है, लेकिन यदि BSE लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स और नए क्लाइंट्स पर फोकस करे तो इस असर की भरपाई की जा सकती है. उन्होंने शेयर पर Hold रेटिंग बनाए रखी है और ₹2900 का टारगेट दिया है.
पिछले कुछ समय में BSE ने अक्टूबर 2023 से अपने कॉन्ट्रैक्ट्स को नए रूप में लॉन्च करके धीरे-धीरे मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाई थी. हर महीने औसतन 0.5% शेयर बढ़ता दिखा. ऐसे में अब नए एक्सपायरी डे के बावजूद कंपनी के पास मार्केट शेयर वापस पाने की संभावना बनी हुई है, लेकिन इसमें समय और रणनीति दोनों की जरूरत है. हालांकि, पिछले एक साल में शेयर ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है, ऐसे में कुछ मुनाफावसूली आ सकती है. नई चुनौती के चलते शेयर में थोड़ी और कमजोरी आ सकती है. लॉन्ग टर्म में कंपनी की स्ट्रैटेजी और मैनेजमेंट कॉमेंट्री पर फोकस करना होगा.