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फरवरी महीने में इस शेयर ने 3227 रुपए का लाइफ हाई बनाया था. (AI जेनेरेटड फोटो)
आज BSE समेत मार्केट इन्फ्रा के सभी शेयरों में जबरदस्त एक्शन दिख रहा है. खबर लिखे जाने के समय BSE का शेयर करीब 7% की तेजी के साथ 2870 रुपए के पार कारोबार कर रहा है. आइए जानते हैं कि बीएसई के शेयर में आज इतनी तेजी क्यों है और निवेशकों को क्या सलाह है. बता दें कि एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने बीएसई शेयर को लेकर एक फ्रेश रिपोर्ट जारी की है और टारगेट प्राइस बढ़ाया है.
आज GROWW, एंजल वन, मोतीलाल ओसवाल जैसे सभी मार्केट इन्फ्रा स्टॉक्स का जोश हाई है. दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर नॉर्म्स की डेडलाइन 3 महीने के लिए बढ़ा दिया है. अब ये नियम 1 अप्रैल 2026 की जगह 1 जुलाई से लागू होगा. डेडलाइन बढ़ाने के कारण ब्रोकर और मार्जिन ट्रेड फेसिलिटी प्रोवाइडर को अब लिक्विडिटी को लेकर तीन और महीने का समय मिल गया है.
दरअसल रिजर्व बैंक ओवरऑल लेवरेज को घटाने का प्रयास कर रहा है जिससे स्पेकुलेशन को कम किया जा सके. फिलहाल RBI की तरफ से लेवरेज को लेकर 3 महीने की राहत दी गई है लेकिन मीडियम टर्म में इसका असर जरूर होगा. आने वाले समय में लेवरेज और लिक्विडिटी पर दबाव देखने को मिलेगा.
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ब्रोकरेज की बात करें तो एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने BSE शेयर के लिए रेटिंग को ADD मेंटेन किया है लेकिन टारगेट प्राइस 3310 रुपए से बढ़ाकर 3450 रुपए कर दिया है. लास्ट सेशन में यह शेयर 2684 रुपए पर था. इसके मुकाबले यह टारगेट 28% अधिक है. बता दें कि फरवरी महीने में इस शेयर ने 3227 रुपए का लाइफ हाई बनाया था.

ब्रोकरेज ने कहा कि पिछले 18 महीनों में डेरिवेटिव्स सेगमेंट को लेकर कई अहम बदलाव हुए लेकिन ट्रेडिंग एक्टिविटी को लेकर जोश घटा नहीं है. एक्सपायरी के दिन में बदलाव के बाद से BSE का मार्केट शेयर घटने की जगह बढ़ा ही है. नोशनल मार्केट शेयर 38% से बढ़कर मार्च में 44% तक पहुंच गया, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम शेयर 24.4% से बढ़कर 26.1% पर पहुंच गया है. RBI की तरफ से भी बैंक गारंटी नियम को तीन महीने के लिए टाला गया है. कुल मिलाकर टाइट रेग्युलेटरी नॉर्म्स के बावजूद BSE ने अपनी पकड़ मजबूत की है.
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इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक मौजूदा समय में करीब 35% मार्जिन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बैंक गारंटी से सपोर्टेड है. अगर इसमें आधा हिस्सा शुद्ध बैंक गारंटी माना जाए और उस पर 50% का प्रभाव लागू किया जाए तो डेरिवेटिव्स वॉल्यूम पर करीब 8-10% का नेगेटिव असर देखने को मिल सकता है.
रिजर्व बैंक ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर नॉर्म्स की डेडलाइन 1 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का ऐलान किया जिसके कारण BSE समेत मार्केट इंफ्रा स्टॉक्स में जोरदार तेजी देखने को मिली है. हालांकि, मीडियम-टू-लॉन्ग टर्म में इसका असर देखने को मिलेगा. Q4 में बीएसई के दमदार प्रदर्शन की उम्मीद है. ऐसे में स्टॉक में फिलहाल पॉजिटिव ट्रेंड है लेकिन आगे रेगुलेटरी रिस्क पर नजर रखना जरूरी होगा.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 BSE शेयर क्यों एक्शन दिख रहा है?
RBI द्वारा नए नियमों की डेडलाइन टालने से सेक्टर में राहत और तेजी आई है.
Q2 RBI ने क्या राहत दी है?
कैपिटल मार्केट एक्सपोजर नॉर्म्स को 1 अप्रैल से बढ़ाकर 1 जुलाई 2026 कर दिया गया है.
Q3 नए नियम का सबसे बड़ा असर क्या होगा?
ब्रोकर्स को 100% कोलैट्रल के साथ फंडिंग लेनी होगी, जिससे लेवरेज घटेगा.
Q4 BSE के लिए सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर क्या है?
डेरिवेटिव्स खासकर ऑप्शंस सेगमेंट से मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ.
Q5 निवेशकों को क्या रणनीति रखनी चाहिए?
शॉर्ट टर्म में तेजी का फायदा लें, लेकिन लॉन्ग टर्म में रेगुलेटरी रिस्क पर नजर रखें.