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BSE Share Price लगातार 52-वीक हाई पर, आगे निवेशकों के लिए ब्रोकरेज की राय. (Image: Investor Presentation)
BSE Share Price: देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज BSE Ltd ने मार्च 2026 तिमाही में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने निवेशकों का ध्यान फिर से अपनी ओर खींच लिया है. कंपनी के दमदार नतीजों के बाद शुक्रवार को BSE का शेयर NSE पर ₹3994 के नए 52-वीक हाई तक पहुंच गया. हालांकि, ऊपरी स्तरों पर कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली और शेयर बाद में लगभग सपाट कारोबार करता दिखा.
11:20 बजे BSE Share Price 3,962 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा था. शेयर 3,832-3,994 के रेंज में ट्रेड कर रहा था.
कंपनी का कहना है कि यह उसके 150 साल के इतिहास का सबसे मजबूत वित्तीय प्रदर्शन रहा है. मजबूत डेरिवेटिव ट्रेडिंग, बढ़ती मार्केट एक्टिविटी और रिटेल-इंस्टीट्यूशनल भागीदारी ने BSE की कमाई को नई ऊंचाई तक पहुंचाया है.
मार्च 2026 तिमाही में BSE का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 61% बढ़कर ₹795.47 करोड़ पहुंच गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹493.67 करोड़ था. वहीं कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू 84.7% बढ़कर ₹1564 करोड़ रही, जो एक साल पहले ₹847 करोड़ थी. कंपनी का EBITDA 119% की शानदार बढ़त के साथ ₹1061 करोड़ पहुंच गया. सबसे बड़ी बात यह रही कि EBITDA मार्जिन 57.2% से बढ़कर 67.9% हो गया. यानी कंपनी सिर्फ ज्यादा कमाई ही नहीं कर रही, बल्कि उसकी ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी तेजी से सुधर रही है.
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| पैरामीटर | Q4FY26 | Q4FY25 | बदलाव |
| Revenue | ₹1564 करोड़ | ₹847 करोड़ | 84.70% |
| EBITDA | ₹1061 करोड़ | ₹484 करोड़ | 119.20% |
| EBITDA Margin | 67.90% | 57.20% | +1069 bps |
| Net Profit | ₹795.47 करोड़ | ₹493.67 करोड़ | 61.10% |
BSE की इस तेज ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा कारण डेरिवेटिव सेगमेंट रहा. कंपनी की ट्रांजैक्शन चार्ज से होने वाली आय 114% बढ़कर ₹1311 करोड़ पहुंच गई. इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में औसत दैनिक लॉट्स 82% बढ़े, जबकि औसत दैनिक नोटशनल टर्नओवर 119% उछलकर ₹245 लाख करोड़ पहुंच गया. यानी ज्यादा ट्रेडिंग एक्टिविटी और बढ़ती भागीदारी का सीधा फायदा कंपनी को मिला.
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हालांकि कंपनी के सभी बिजनेस सेगमेंट्स में तेजी नहीं रही. लिस्टिंग रेवेन्यू में हल्की गिरावट दर्ज की गई. यह आय ₹125.3 करोड़ से घटकर ₹118.8 करोड़ रही. इसके बावजूद डेरिवेटिव कारोबार की तेज ग्रोथ ने इस कमजोरी को पूरी तरह संतुलित कर दिया.
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दमदार नतीजों के साथ कंपनी ने निवेशकों को डिविडेंड का भी तोहफा दिया है. BSE ने ₹2 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹10 के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है. हालांकि यह डिविडेंड AGM में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद ही मिलेगा.

कंपनी अब कमोडिटी डेरिवेटिव कारोबार में विस्तार की तैयारी कर रही है. मैनेजमेंट का कहना है कि वह सिर्फ एक्सपायरी डे ट्रेडिंग पर निर्भर रहने के बजाय अलग और नए प्रोडक्ट्स पर फोकस करेगी.
इसके अलावा BSE को तीन नए मंथली इंडेक्स डेरिवेटिव लॉन्च करने की मंजूरी भी मिल चुकी है. कंपनी का IT आधारित नया इंडेक्स डेरिवेटिव 11 मई 2026 से लॉन्च होगा.
मैनेजमेंट का लक्ष्य कैश मार्केट शेयर को मौजूदा 7-8% से बढ़ाकर डबल डिजिट तक पहुंचाना है. वहीं डेरिवेटिव सेगमेंट में प्रतिभागियों की संख्या 587 से बढ़ाकर 700 तक ले जाने की योजना है.
BSE अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs पर भी फोकस बढ़ा रही है. कंपनी के मुताबिक, FPI भागीदारी 100 से बढ़कर 520 तक पहुंच चुकी है और आगे इसे 800 तक ले जाने का लक्ष्य है. अगर ऐसा होता है तो मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग वॉल्यूम और तेजी से बढ़ सकता है.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 स्टॉक एक्सचेंज कैसे कमाई करते हैं?
स्टॉक एक्सचेंज मुख्य रूप से ट्रांजैक्शन फीस, लिस्टिंग फीस, डेटा सर्विसेज और डेरिवेटिव ट्रेडिंग से कमाई करते हैं.
Q2 डेरिवेटिव ट्रेडिंग क्या होती है?
डेरिवेटिव ऐसे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जिनकी वैल्यू किसी शेयर, इंडेक्स या कमोडिटी पर आधारित होती है. इसमें Futures और Options सबसे लोकप्रिय हैं.
Q3 52-Week High का क्या मतलब होता है?
जब कोई शेयर पिछले 52 हफ्तों यानी एक साल के दौरान अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचता है, तो उसे 52-Week High कहा जाता है.
Q4 Transaction Charges Revenue क्यों अहम होता है?
ज्यादा ट्रेडिंग एक्टिविटी होने पर एक्सचेंज को ज्यादा ट्रांजैक्शन फीस मिलती है. इसलिए यह किसी एक्सचेंज की कमाई का अहम हिस्सा माना जाता है.
Q5 क्या एक्सचेंज कंपनियों पर भी बाजार की तेजी-मंदी का असर पड़ता है?
हां, बाजार में ज्यादा ट्रेडिंग और निवेशक भागीदारी बढ़ने पर एक्सचेंज कंपनियों की कमाई आमतौर पर बढ़ती है.