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HSBC ने डाउनग्रेड किए OMC Stocks. (Image: AI Generated)
Oil Stocks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब साफ तौर पर कच्चे तेल के बाजार में दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में लगातार चौथे सत्र तेजी देखी जा रही है और भाव $105 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए हैं. यह स्तर पिछले तीन साल में पहली बार देखने को मिला है जब ब्रेंट $104 के ऊपर टिकने की कोशिश कर रहा है. इस बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC ने भारतीय तेल कंपनियों के शेयरों को डाउनग्रेड कर दिया है, साथ ही टारगेट प्राइस भी घटाया है.
एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर Strait of Hormuz लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें और ज्यादा उछल सकती हैं. इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी दबाव बढ़ सकता है.
तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष है. Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव ने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई रूट को जोखिम में डाल दिया है.
तेल बाजार के लिए सबसे सेंसिटिव पॉइंट Strait of Hormuz है. यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर यह जलडमरूमध्य 3 महीने तक बंद रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत $164 प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. वहीं अगर यह 2 महीने तक बंद रहता है, तो कीमतें करीब $140 प्रति बैरल तक जा सकती हैं.
सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब $2 की तेजी के साथ $105.15 तक पहुंच गया. वहीं West Texas Intermediate (WTI) क्रूड भी करीब $100 प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सबसे ज्यादा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ता है. यही वजह है कि ग्लोबल ब्रोकरेज HSBC ने भारतीय OMC कंपनियों पर अपना नजरिया कमजोर कर दिया है.
ब्रोकरेज का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो कंपनियों को मार्केटिंग लॉस का सामना करना पड़ सकता है. यहां तक कि $75 प्रति बैरल के स्तर पर भी मार्जिन पर दबाव बन सकता है.
इसी वजह से HSBC ने OMC सेक्टर को Downgrade कर Hold कर दिया है और कंपनियों की कमाई के अनुमान (earnings estimates) और वैल्युएशन मल्टीपल्स में कटौती की है.
ब्रोकरेज ने कई प्रमुख तेल कंपनियों के टारगेट प्राइस में बड़ी कटौती की है.
HPCL Share Price: Hindustan Petroleum Corporation Limited के स्टॉक को Buy से घटाकर Hold कर दिया गया है. टारगेट प्राइस ₹620 से घटाकर ₹360 कर दिया गया है, यानी करीब 42% की कटौती हुई है.
IOCL Share Price: Indian Oil Corporation के लिए भी Buy से Hold की रेटिंग दी गई है. टारगेट प्राइस ₹220 से घटाकर ₹150 कर दिया गया है.
BPCL Share Price: Bharat Petroleum Corporation Limited के लिए टारगेट ₹470 से घटाकर ₹340 कर दिया गया है और रेटिंग Hold कर दी गई है.
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दिलचस्प बात यह है कि जहां OMC कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को ऊंचे क्रूड प्राइस का फायदा मिल सकता है. इसी वजह से Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के लिए HSBC ने टारगेट प्राइस ₹200 से बढ़ाकर ₹240 कर दिया है. हालांकि ब्रोकरेज ने इस पर Reduce रेटिंग बरकरार रखी है.
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ब्रोकरेज का कहना है कि ऊंचे तेल दाम ONGC की कमाई को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन सरकारी नीतियों से जुड़े जोखिम (policy risks) इसके अपसाइड को सीमित कर सकते हैं.

ग्लोबल ब्रोकरेज Citigroup ने भी हाल ही में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मिडिल ईस्ट का तनाव तेल से ज्यादा गैस वैल्यू चेन के लिए जोखिम पैदा कर सकता है. भारत जैसे देशों में LNG और गैस की सप्लाई प्रभावित होने पर ऊर्जा लागत और बढ़ सकती है.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे भारतीय बाजार और कई सेक्टरों पर पड़ता है.
निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि फिलहाल ऊर्जा सेक्टर में स्टॉक चुनते समय सावधानी जरूरी है. अपस्ट्रीम कंपनियां जैसे ONGC बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, जबकि OMC कंपनियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
1. Brent crude क्या होता है?
Brent crude अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख तेल बेंचमार्क है, जिसके आधार पर दुनिया के ज्यादातर देशों में तेल की कीमत तय होती है.
2. Strait of Hormuz क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है.
3. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से OMC कंपनियों पर दबाव क्यों आता है?
OMC कंपनियां कच्चा तेल खरीदकर पेट्रोल-डीजल बेचती हैं. अगर कच्चा तेल महंगा हो जाए और कीमतें तुरंत नहीं बढ़ाई जा सकें, तो कंपनियों का मार्जिन घट जाता है.
4. ONGC को ऊंचे तेल दाम से फायदा क्यों होता है?
ONGC तेल का उत्पादन करती है. इसलिए जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो कंपनी की आय बढ़ सकती है.
5. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?
तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है, महंगाई बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है. इससे शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
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