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Stock Market Crash: टैरिफ वॉर और ग्लोबल मंदी की आहट के बीच भारतीय शेयर बाजारों में भी बहुत तेजी से गिरावट बढ़ती दिख रही है. सोमवार को Sensex-Nifty में करीब 5-5% की तेजी दिखाई दी. लेकिन इस बीच ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक्स और ब्रोकरेज हाउसेज़ ने भारतीय शेयर बाजारों को लेकर अपने नजरिए में कुछ अहम बदलाव किए हैं. Goldman Sachs, JP Morgan और Bernstein की नई स्ट्रैटेजी से यह साफ है कि भले ही निकट भविष्य में कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन भारत अभी भी निवेशकों के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन बना हुआ है.
Goldman Sachs ने अगले 12 महीनों के लिए निफ्टी का लक्ष्य 25,500 से घटाकर 25,000 कर दिया है. ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि आर्थिक ग्रोथ में धीमापन आने वाले वर्षों में कंपनियों की आय पर असर डाल सकता है. FY25 के लिए EPS ग्रोथ का अनुमान 12% से घटाकर 11%, जबकि FY27 के लिए 15% से घटाकर 14% कर दिया गया है. Goldman का यह आकलन बाजार के कंसेंसस अनुमान से करीब 4% नीचे है, जो निवेशकों के लिए सतर्कता का संकेत है.
टैरिफ से जुड़ी हालिया घोषणाओं के बाद JP Morgan को भारत, चीन और सिंगापुर जैसे बाजारों में खरीदारी का मौका नजर आ रहा है. ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि शुरुआती गिरावट के बाद यहां ट्रेडिंग के लिहाज से एक मजबूत रैली आ सकती है. भारत को JP Morgan ने “trade-insulated” और साइकलिकली बेहतर अर्थव्यवस्था बताया है. उनके मुताबिक, भारतीय बाजार में बैंकिंग, कंज्यूमर, पावर, सीमेंट, डिफेंस और हॉस्पिटल सेक्टर मजबूत नजर आते हैं.
Bernstein ने चेताया है कि मौजूदा हालात में पूरी तरह रिसेशन-प्रूफ पोर्टफोलियो बनाना आसान नहीं है. उनके अनुसार, लगभग सभी स्टॉक्स पर किसी न किसी तरह का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रिस्क बना हुआ है. ऐसे में अगर निवेशक पूरी तरह रिस्क-फ्री निवेश चाहते हैं, तो उन्हें इक्विटी की बजाय फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने की सलाह दी गई है.
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Bernstein ने अपने मॉडल पोर्टफोलियो में भी अहम फेरबदल किए हैं. Power Grid और M&M को शामिल किया गया है, जबकि Coforge को बाहर कर दिया गया है. इसके अलावा पोर्टफोलियो में IT सेक्टर का एक्सपोजर घटाया गया है, वहीं फाइनेंशियल्स सेक्टर को सबसे ऊपर रखा गया है. ब्रोकरेज ने कंज्यूमर सेक्टर में भी हिस्सेदारी बढ़ाई है.