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Stock Market Crash: हफ्ते का पहला कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी तनाव वाला रहा. सेंसेक्स और निफ्टी 50 इंडेक्स भारी गिरावट के साथ खुले. बाजारों ने करीब 3 फीसदी की गिरावट देखी लेकिन बंद होने से पहले बाजार ने निचले स्तर से रिकवरी देखी. हालांकि रिकवरी के बाद भी सेंसेक्स 1.70 फीसदी की गिरावट के साथ, 77500 के लेवल के पास बंद हुआ. वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 1.70 फीसदी की गिरावट aके साथ 24000 के लेवल के पास बंद हुआ.
आज बाजार में भयंकर उतार-चढ़ाव देखने को मिला. पिछले एक दशक में, कई संकट जैसे कोविड-19 महामारी, वैश्विक युद्ध और कॉरपोरेट विवाद के बावजूद Nifty 50 ने लगभग 68% रिटर्न दिया है, जबकि Sensex ने 195% से ज्यादा का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है. यहां जानें कि बीते एक दशक में स्टॉक मार्केट में कितने बड़े क्रैश आए हैं?
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साल - 2016
8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार की ओर से अचानक नोटबंदी की घोषणा हुई. इस ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. इसके अगले दिन यानी 9 नवंबर 2016 को बाजार बुरी तरह टूटा.
उस दिन Sensex करीब 1,689 अंक (6.12%) गिरकर 26,902 पर आया, जबकि Nifty 50 में 541 अंक (6.33%) की गिरावट दर्ज हुई और यह 8002 के स्तर पर बंद हुआ.
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साल - 2020
कोविड-19 का दौर किसी के लिए भी भुलना मुश्किल है. ये दौर वित्तीय तौर पर तो भारी था ही लेकिन भावनात्मक तौर पर इस दौर ने कई लोगों की कमर तोड़ी. कोविड-19 महामारी हाल के इतिहास में शेयर बाजार की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जाती है.
23 मार्च 2020 को भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई. उस दिन Sensex 3,935 अंक (13.15%) गिरकर 25,981.24 के लेवल पर बंद हुआ. जबकि Nifty 50 में 1,135 अंक (12.98%) की भारी गिरावट आई और ये 7,610.25 के लेवल पर बंद हुआ.
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साल - 2023
तीन साल पहले जनवरी में अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप को लेकर कई रिपोर्ट्स साझा की थी. जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा. रिपोर्ट आने के बाद कुछ ही हफ्तों में अडानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप 100 अरब डॉलर से ज्यादा घट गया.
इस तेज गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी, खासकर बैंकों के अडानी ग्रुप में एक्सपोजर को लेकर. इसका असर Nifty 50 समेत पूरे बाजार पर पड़ा और बाजार में कुछ समय तक तेज उतार-चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला.
साल - 2024
2024 के आम चुनावों के नतीजों वाले दिन भी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. चुनाव परिणाम से एक दिन पहले एग्जिट पोल के आधार पर बाजार ने रिकॉर्ड ऊंचाई छू ली थी, लेकिन वास्तविक नतीजे आने के बाद स्थिति बदल गई.
इसे महामारी के बाद का सबसे बड़ा “नॉन-पैंडेमिक” मार्केट क्रैश माना गया, जब Sensex और Nifty में भारी गिरावट दर्ज की गई. राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बाजार में घबराहट बढ़ी और Sensex लगभग 6% तक गिर गया. वही निफ्टी 50 इंडेक्स भी 5.93 फीसदी तक टूटा था.
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साल – 2026
9 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. आज के दिन Sensex करीब 2200 (3% से ज्यादा) अंक गिरा था. जबकि Nifty 50 में 700 अंक से ज्यादा (3% से अधिक) की गिरावट आई और यह 24,000 के नीचे फिसल गया.
इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों का 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना था. तेल की कीमतें बढ़ने से उन कंपनियों पर दबाव बढ़ गया जो कच्चे माल के रूप में तेल पर निर्भर हैं. इस वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और पेंट कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे पूरे बाजार पर दबाव बन गया.
1. शेयर बाजार क्रैश क्या होता है?
जब बहुत कम समय में बाजार में तेज गिरावट आती है और बड़े पैमाने पर निवेशकों की संपत्ति घट जाती है, उसे शेयर बाजार क्रैश कहा जाता है.
2. पिछले 10 साल में सबसे बड़ा क्रैश कौन सा था?
COVID-19 महामारी के दौरान 2020 में भारतीय बाजार में सबसे तेज और बड़ी गिरावट देखने को मिली.
3. हिंडनबर्ग-अडानी विवाद का बाजार पर क्या असर पड़ा?
2023 में इस विवाद के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई और बाजार में भी अस्थिरता बढ़ गई.
4. क्या युद्ध का असर शेयर बाजार पर पड़ता है?
हाँ. युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं, वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है और निवेशकों में डर पैदा होता है, जिससे बाजार गिर सकता है.
5. क्या बाजार क्रैश के बाद रिकवर करता है?
इतिहास बताता है कि ज्यादातर बड़े क्रैश के बाद बाजार समय के साथ रिकवर करता है और नए रिकॉर्ड भी बनाता है.
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