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अगर आप गहने बनवाने या निवेश के लिए सही समय का इंतजार कर रहे थे, तो बाजार से आपके लिए बहुत बड़ी खबर आई है. पिछले दो महीनों में बुलियन मार्केट (Bullion Market) में जो हलचल हुई है, उसने सबको हैरान कर दिया है.
जनवरी के अंत में जो चांदी (Silver) और सोना (Gold) 'आसमान' छू रहे थे, वह अब काफी हद तक 'जमीन' पर आ गए हैं. खासकर चांदी की कीमतों में आई ₹2 लाख से ज्यादा की गिरावट ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है. आइए, इस पूरी गिरावट का विश्लेषण करते हैं और समझते हैं कि रेट कार्ड में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया.
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चांदी ने इस साल निवेशकों को एक 'रोलर-कोस्टर' राइड पर रखा है:
रिकॉर्ड हाई (29 जनवरी 2026): MCX पर चांदी ने ₹4,39,337 प्रति किलोग्राम का अब तक का सबसे उच्चतम स्तर छुआ था. उस समय औद्योगिक मांग और वैश्विक अनिश्चितता ने कीमतों को हवा दी थी.
मौजूदा स्थिति (29 मार्च 2026): महज 60 दिनों के भीतर चांदी का भाव गिरकर ₹2,27,954 के करीब पहुंच गया है.
कुल गिरावट: चांदी करीब ₹2,11,383 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है. यह उन लोगों के लिए 'गोल्डन चांस' है जो भारी मात्रा में चांदी खरीदना चाहते थे.

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सोने की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखी गई है, जिससे शादी-ब्याह वाले घरों को बड़ी राहत मिली है:
शिखर स्तर (29 जनवरी 2026): सोना ₹1,93,096 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था.
ताजा रेट (29 मार्च 2026): अब यह गिरकर ₹1,44,282 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है.
राहत: सोने की कीमतों में दो महीने में करीब ₹48,814 की कमी आई है.

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यह गिरावट अचानक नहीं हुई है, इसकी 3 बड़ी वजहें हैं:
1- यूएस डॉलर की मजबूती: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है. जब डॉलर महंगा होता है, तो सोने-चांदी में बिकवाली (Profit Booking) बढ़ जाती है.
2- ब्याज दरों का गणित: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों को 'हायर फॉर लॉन्गर' (ज्यादा समय तक ऊंचा रखना) रखने के संकेतों ने निवेशकों को बॉन्ड्स की ओर मोड़ दिया है, जिससे सोने-चांदी की मांग घटी है.
3- लिक्विडिटी ट्रैप: मार्च के महीने में अक्सर निवेशक अपनी पोजीशन साफ करते हैं और मुनाफा वसूली करते हैं, जिसका असर घरेलू कीमतों पर भी दिखा है.
| चांदी (प्रति किलो) | ₹4,39,337 | ₹2,27,954 | - ₹2,11,383 |
| सोना (प्रति 10 ग्राम) | ₹1,93,096 | ₹1,44,282 | - ₹48,814 |
इतनी बड़ी गिरावट के बाद बाजार में एक 'कंसोलिडेशन' (स्थिरता) का दौर आ सकता है.
खरीदारों के लिए: अगर आप गहने लेना चाहते हैं, तो यह कीमतों का एक अच्छा स्तर है.
निवेशकों के लिए: चांदी औद्योगिक धातु (Industrial Metal) भी है, इसलिए सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में इसकी मांग भविष्य में फिर से कीमतें बढ़ा सकती है.
चांदी का ₹2.11 लाख और सोने का ₹48,000 सस्ता होना कोई मामूली बात नहीं है. यह पिछले कुछ वर्षों की सबसे बड़ी 'प्राइस करेक्शन' में से एक है. हालांकि बाजार हमेशा जोखिमों के अधीन होता है, लेकिन मौजूदा रेट निश्चित रूप से उन लोगों के लिए आकर्षक हैं जो ऊंचे दामों की वजह से खरीदारी टाल रहे थे.
1- क्या चांदी के दाम और गिर सकते हैं?
बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन ₹2.25 लाख के आसपास चांदी को मजबूत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.
2- 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने में क्या अंतर है?
24 कैरेट शुद्ध सोना (99.9%) होता है, जबकि 22 कैरेट में अन्य धातुएं मिली होती हैं, जिससे यह गहने बनाने के लिए मजबूत बनता है.
3- चांदी की कीमतों में सोने से ज्यादा गिरावट क्यों आई?
चांदी एक औद्योगिक धातु भी है. वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती का असर चांदी पर सोने के मुकाबले ज्यादा और तेजी से पड़ता है.
4- क्या इस गिरावट का असर ज्वेलरी मेकिंग चार्ज पर पड़ेगा?
नहीं, मेकिंग चार्ज ज्वेलर्स के अपने मानक होते हैं, यह केवल धातु की शुद्ध कीमत (Spot Price) में आई गिरावट है.
5- सोना-चांदी खरीदने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है?
भौतिक (Physical) खरीदारी के अलावा आप डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में भी निवेश कर सकते हैं.
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