&format=webp&quality=medium)
मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भी सोने-चांदी में जारी गिरावट. (Image: AI-generated)
Gold-Silver Price: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच सोने का भाव 2.5 महीने और चांदी 3 महीने के निचले स्तर पर पहुंच चुकी है. सोना अपने ऑल टाइम हाई से 32% नीचे पहुंच चुका है और चांदी 54% नीचे आ गई है. अब सवाव है कि क्या सोना ₹1 लाख और चांदी ₹1.5 लाख तक फिसल सकती है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि युद्ध कितना लंबा चलता है. अगर तनाव बढ़ता है, डॉलर मजबूत होता है और रेट कट की उम्मीदें कम होती हैं तो इन स्तरों तक गिरावट मुमकिन है.
हालांकि मौजूदा गिरावट को “पैनिक सेलिंग” माना जा रहा है और बाजार कभी भी पलट सकता है. ऐसे में जल्दबाजी में खरीदारी से बचने और फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है, जब तक बाजार में स्थिरता नहीं दिखती.
ये हैरानी की बात है कि इस बार सोना और चांदी में बिल्कुल उल्टा ट्रेंड देखने को मिला है. आमतौर पर जियोपॉलिटिकल तनाव में बुलियन की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है.
कॉमेक्स गोल्ड पिछले सेशन में लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ $30 टूटकर $4575 पर बंद हुआ. पिछले तीन दिनों में सोना करीब $425 गिर चुका है. एक हफ्ते में सोने में करीब 10% की गिरावट आई है, जो सितंबर 2011 के बाद सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है. वहीं, कॉमेक्स सिल्वर में लगातार आठवें दिन गिरावट रही और यह 2.2% टूटकर $70 के नीचे बंद हुआ. आठ दिनों में चांदी करीब 25% लुढ़क चुकी है.
युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले 23 दिनों में MCX गोल्ड करीब ₹41,000 टूट चुका है. 2 मार्च को सोना ₹1,69,880 पर था. कॉमेक्स गोल्ड भी $5,434 से गिरकर काफी नीचे आ गया है.
चांदी में गिरावट और ज्यादा तेज रही है:
| धातु | रिकॉर्ड हाई | 23 मार्च 2026 | गिरावट |
| सोना | ₹1.93 लाख | ₹1.29 लाख | 32% |
| चांदी | ₹4.39 लाख | ₹1.99 लाख | 54.5% |
चांदी में गिरावट और ज्यादा गहरी हो चुकी है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इसमें लंबी कमजोरी का दौर शुरू हो गया है.
इस ऊंचाई तक पहुंचने में चांदी को 15 साल लगे थे. 2025 में फिर $50 का स्तर छुआ, लेकिन अब गिरावट ने ट्रेंड बदल दिया है.
इस बार गिरावट के पीछे कई बड़े फैक्टर काम कर रहे हैं:
इसके उलट, 2011 में यूरो जोन डेट क्राइसिस ने चांदी को मजबूती दी थी, लेकिन इस बार हालात अलग हैं.

सोना अक्सर निवेश और सुरक्षित एसेट के तौर पर चर्चा में रहता है, लेकिन चांदी की कहानी उससे कहीं ज्यादा व्यापक है. चांदी सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ, ग्रीन एनर्जी और निवेश- तीनों का अहम हिस्सा है. यही वजह है कि इसकी मांग कई अलग-अलग सेक्टर्स से आती है.
चांदी एक बेहतरीन इलेक्ट्रिकल कंडक्टर है, यानी यह बिजली को बहुत तेजी और कुशलता से ट्रांसमिट करती है. यही कारण है कि इसका इस्तेमाल कई हाई-टेक और आधुनिक इंडस्ट्रीज में होता है.
ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन के बढ़ते ट्रेंड के साथ चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड लगातार बढ़ रही है.
सरकारें और मिंट्स (टकसाल) भी चांदी के बड़े खरीदार होते हैं.
LIVE TV:
शॉर्ट टर्म में बुलियन में ट्रेंड कमजोर बना हुआ है. वोलैटिलिटी ज्यादा रहने की संभावना है. सुरक्षित निवेश का पारंपरिक नजरिया बदलता दिख रहा है. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह धीरे-धीरे खरीदारी का अवसर बन सकता है, लेकिन जल्दबाजी में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है.
1. क्या जियोपॉलिटिकल तनाव में सोना हमेशा बढ़ता है?
आमतौर पर हां, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती और अन्य फैक्टर्स के कारण ट्रेंड उल्टा रहा.
2. चांदी में गिरावट ज्यादा क्यों है?
चांदी इंडस्ट्रियल मेटल भी है, इसलिए ग्लोबल ग्रोथ की चिंता का असर ज्यादा पड़ता है.
3. क्या यह निवेश का सही समय है?
लंबी अवधि के लिए धीरे-धीरे निवेश किया जा सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में जोखिम बना हुआ है.
4. क्या सोना और गिरेगा?
अगर डॉलर मजबूत और बॉन्ड यील्ड ऊंची रहती है, तो दबाव जारी रह सकता है.
5. निवेशकों को क्या रणनीति रखनी चाहिए?
एकमुश्त निवेश से बचें, चरणबद्ध निवेश करें और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखें.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)