Sensex-Nifty Crash: दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा; वो 6 वजहें जिन्होंने लाई बिकवाली की आंधी 

Sensex Nifty Crash: ग्लोबल तनाव, कच्चे तेल की आग, रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी, FIIs की लगातार बिकवाली और एक्सपायरी के दबाव ने बाजार का पूरा मूड बिगाड़ दिया. ऊपर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार दूसरी अपील के बाद बाजार में डर और सावधानी का माहौल भी साफ दिखाई दिया.
Sensex-Nifty Crash: दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा; वो 6 वजहें जिन्होंने लाई बिकवाली की आंधी 

शेयर बाजार में और गहराई गिरावट, बाजार में बिकवाली की आंधी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Sensex Nifty Crash: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार (12 मई, 2026) को भारी तबाही देखने को मिली. सेंसेक्स 1500 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,400 के नीचे फिसल गया. आज अकेले मार्केट कैप में ₹9.6 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज हुई. सोमवार को बाजार का मार्केट कैप ₹5.71 लाख करोड़ घटा था. सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में निवेशकों की करीब ₹15 लाख करोड़ की दौलत साफ हो गई.

ग्लोबल तनाव, कच्चे तेल की आग, रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी, FIIs की लगातार बिकवाली और एक्सपायरी के दबाव ने बाजार का पूरा मूड बिगाड़ दिया. ऊपर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार दूसरी अपील के बाद बाजार में डर और सावधानी का माहौल भी साफ दिखाई दिया.

बाजार में भारी गिरावट क्यों?

ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया, तनाव और बढ़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को “Garbage Proposal” बताते हुए खारिज कर दिया. इसके बाद मिडिल ईस्ट तनाव और बढ़ गया. ट्रंप ने यहां तक कहा कि सीजफायर कभी भी टूट सकता है. इससे ग्लोबल मार्केट में Risk-Off Sentiment मजबूत हुआ और निवेशकों ने इक्विटी से दूरी बनानी शुरू कर दी.

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कच्चा तेल $105 के ऊपर, भारत के लिए बड़ी चिंता

ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होना सीधे देश के Current Account और Inflation पर दबाव बढ़ाता है. ऊंचे कच्चे तेल की वजह से Oil Marketing Companies की अंडर-रिकवरी बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है. यही वजह रही कि बाजार में डर और बढ़ गया.

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.71/$ के नए निचले स्तर पर पहुंच गया. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों का भरोसा और कमजोर करता है, क्योंकि इससे उनके रिटर्न पर असर पड़ता है. रुपये की कमजोरी से आयात बिल बढ़ने और महंगाई बढ़ने की चिंता भी बढ़ गई है.

FIIs की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं. बड़े विदेशी फंड Risk कम करने के लिए पैसा निकाल रहे हैं. जब FIIs लगातार बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव और बढ़ जाता है, खासकर तब जब ग्लोबल माहौल पहले से कमजोर हो.

एक्सपायरी का दबाव

आज Nifty की Weekly F&O Expiry भी थी. ऐसे दिनों में वॉलेटिलिटी सामान्य से ज्यादा रहती है. कमजोर सेंटीमेंट के बीच ट्रेडर्स ने भी लॉन्ग पोजीशनकाटीं, जिससे गिरावट और तेज हो गई.

किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा दबाव?

IT सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी. निवेशकों को डर है कि ग्लोबल डिमांड और टेक अर्निंग्स पर असर पड़ सकता है. रियल्टी, मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली. हालांकि मेटल और Oil & Gas सेक्टर में कुछ खरीदारी जरूर दिखाई दी. कमोडिटी से जुड़े शेयरों में निवेशकों ने थोड़ा डिफेंसिव अप्रोच अपनाया.

अनिल सिंघवी का क्या कहना है?

मार्केट गुरु अनिल सिंघवी के मुताबिक बाजार पर कई बड़े दबाव एक साथ काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि PM मोदी की लगातार दूसरी अपील के बाद बाजार में डर और सावधानी बढ़ी है. निवेशकों को लग रहा है कि सरकार आगे कुछ बड़े कदम उठा सकती है. उन्होंने कहा कि रुपये की कमजोरी, FIIs की बिकवाली, कच्चे तेल की तेजी और अमेरिका-ईरान तनाव ने मिलकर बाजार का सेंटीमेंट खराब किया है. इसके अलावा Nifty और Bank Nifty दोनों अहम सपोर्ट लेवल तोड़ चुके हैं, जिससे टेक्निकल कमजोरी भी बढ़ गई है.

अब किन लेवल्स पर रखें नजर?

अनिल सिंहवी के मुताबिक आने वाले सत्रों में कुछ अहम लेवल्स पर नजर रखना जरूरी होगा.

इंडेक्ससपोर्ट ज़ोनरिकवरी रेंज
Nifty23300-2346523750-23825
Bank Nifty53425-5370054350-54550

उन्होंने साफ कहा कि बाजार फिलहाल “Danger Zone” में ट्रेड कर रहा है. जब तक Nifty और Bank Nifty मजबूत रिकवरी नहीं दिखाते, तब तक दबाव बना रह सकता है.

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

ऐसे समय में पैनिक सेलिंग से बचना जरूरी माना जाता है. बाजार में गिरावट तेज जरूर है, लेकिन इस तरह के फेज़ में ही लॉन्ग टर्म निवेशक मजबूत कंपनियों पर नजर रखते हैं. हालांकि फिलहाल वॉलेटिलिटी काफी ज्यादा है. इसलिए शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को स्ट्रिक्ट स्टॉपलॉस और रिस्क मैनेजमेंट के साथ चलने की सलाह दी जा रही है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 शेयर बाजार में गिरावट आने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

घबराकर तुरंत फैसले लेने से बचना चाहिए. पहले गिरावट की वजह और अपने निवेश का उद्देश्य समझना जरूरी होता है.

Q2 क्या हर बड़ी गिरावट Bear Market की शुरुआत होती है?

जरूरी नहीं. कई बार Global Events या Short-Term Panic की वजह से भी तेज correction आता है.

Q3 India VIX बढ़ने का क्या मतलब होता है?

India VIX बढ़ना बाजार में डर और Volatility बढ़ने का संकेत माना जाता है.

Q4 कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय बाजार पर असर क्यों पड़ता है?

भारत तेल आयात करता है. तेल महंगा होने से Inflation, Fiscal Deficit और Rupee पर दबाव बढ़ता है.

Q5 FIIs की बिकवाली कितनी अहम होती है?

FIIs बड़े निवेशक होते हैं. उनकी लगातार बिकवाली बाजार sentiment और liquidity दोनों को प्रभावित करती है.

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