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(Image source- AI)
Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. हफ्ते के अंत तक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 3% तक गिर गए. इस हफ्ते दोनों प्रमुख इंडेक्स में करीब 2.9% की गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स 81,287.19 से गिरकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,178.65 से फिसलकर 24,450.45 पर बंद हुए.
इस दौरान फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) लगातार बिकवाली करते रहे. एफआईआई ने इस हफ्ते भारतीय बाजार से 23,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की. ग्लोबल स्तर पर जोखिम से बचने की रणनीति के कारण विदेशी निवेशक सतर्क नजर आए.
हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DII) के मजबूत निवेश ने बाजार में गिरावट को कुछ हद तक संभालने में मदद की.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है.ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है.
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प्रमुख इंडेक्स के अलावा ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में रहे. बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में भी हफ्ते के दौरान लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई. सेक्टर के हिसाब से देखें तो, अधिकांश इंडेक्स निगेटिव दायरे में बंद हुए.
सबसे ज्यादा गिरावट बीएसई रियल्टी, बीएसई ऑयल एंड गैस, बीएसई बैंकएक्स, बीएसई ऑटो और बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में देखी गई. इनमें क्रमशः 4.9%, 4.8%, 4.6%, 3.9% और 3.1% की गिरावट दर्ज की गई.
हालांकि बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स में हल्की बढ़त देखने को मिली और यह 0.2% बढ़कर बंद हुए. इसके अलावा डिफेंस सेक्टर के शेयरों में भी लगभग 3% की बढ़त दर्ज की गई, क्योंकि वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों की दिलचस्पी रक्षा कंपनियों में बढ़ी है.
वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के अनुसार, इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में वैश्विक जोखिम और घरेलू मजबूती के बीच खींचतान देखने को मिली. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण FII की लगातार बिकवाली उनके द्वारा अपनाई जा रही जोखिम से बचाव की रणनीति को दर्शाती है.
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों के निवेश और एसआईपी के जरिए लगातार आ रहे फंड ने बाजार को सहारा दिया, जिससे गिरावट ज्यादा गहरी नहीं हुई.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी50 इंडेक्स 24,450 के आसपास अपने 200 डे मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है. इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण बाजार की दीर्घकालिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है.
इस बीच, बाजार में अस्थिरता भी बढ़ी है. ट्रेडिंग सत्र के दौरान इंडिया VIX इंडेक्स में 11% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जो यह दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की स्थिति में हैं.
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