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SEBI Statement on Madhabi Puri Buch FIR: एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और नियमों का उल्लंघन के संबंध में शेयर बाजार नियामक सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है. ये एक कंपनी को BSE में लिस्टिंग की मंजूरी देने का मामला है. आरोप था कि सेबी नियमों का पालन किए बिना लिस्टिंग की मंजूरी दी गई. सेबी ने ACB कोर्ट ऑर्डर पर सफाई जारी की है. सेबी ने अपनी सफाई में कहा कि मामला 1994 का है. सेबी को पक्ष रखने का कोई भी मौका नहीं दिया गया.
सेबी ने कहा कि वह ‘इस आदेश को चुनौती देने के लिए उचित कानूनी कदम उठाएगा और सभी मामलों में नियमों का सही पालन करवाने के लिए प्रतिबद्ध है." सेबी की पूर्व चेयरपर्सन, सेबी के तीन मौजूदा सदस्यों, और बीएसई के दो अफसरों के खिलाफ मुंबई की एसीबी अदालत में एक अर्जी दी गई थी. हालांकि, ये अधिकारी उस वक्त पर अपने संबंधित पदों पर नहीं थे, फिर भी अदालत ने बिना कोई नोटिस जारी किए या सेबी को तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने का कोई अवसर दिए बिना आवेदन को अनुमति दे दी.”
सेबी के बयान के अनुसार, “आवेदक को मामूली बातों पर और आदतन केस करने वाले के रूप में जाना जाता है, जिसके पिछले आवेदनों को अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया था, और कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया गया था.” कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि, "आरोपों से ऐसे अपराध का पता चलता है जिस पर पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकती है, इसलिए इसकी जांच जरूरी है. पहली नजर में, नियमों की अनदेखी और मिलीभगत के सबूत हैं, इसलिए इसकी बिना किसी पक्षपात के जांच होनी चाहिए."
कोर्ट के मुताबिक, 'कानून लागू करने वालों और सेबी की ओर से कोई कार्रवाई न होने के कारण, CrPC की धारा 156(3) के तहत कोर्ट को दखल देने की जरूरत है.'आरोपों की गंभीरता, लागू कानूनों और स्थापित कानूनी मिसालों को ध्यान में रखते हुए, यह न्यायालय इसे उचित मानता है.' अदालत ने कहा कि वह जांच की निगरानी करेगा और 30 दिनों के भीतर (मामले की) स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है.
सेबी पूर्व अध्यक्ष बुच के अलावा जिन अन्य अधिकारियों के खिलाफ अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है, उनमें बीएसई के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुंदररामन राममूर्ति, इसके तत्कालीन चेयरमैन और जनहित निदेशक प्रमोद अग्रवाल और सेबी के तीन पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय शामिल हैं.