डेरिवेटिव्स मार्केट में बदलाव की तैयारी में SEBI, CTM को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव, जारी किया कंसल्टेशन पेपर

सेबी ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग और कंप्लायंस से जुड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है. सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है. इन प्रस्तावों पर 4 जून 2026 तक आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं.
डेरिवेटिव्स मार्केट में बदलाव की तैयारी में SEBI, CTM को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव, जारी किया कंसल्टेशन पेपर

सेबी ने डेरिवेटिव्स पर जारी किया कंसल्टेशन पेपर (File Photo)

मार्केट रेगुलेटर सिक्युरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग और कंप्लायंस से जुड़े बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है. सेबी का मकसद इसके जरिए स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन्स और कॉमोडिटी डेरिवेटिव्स से जुड़े नियमों को आसान बनाना कंप्लायंस के बोझ को कम करना और ट्रे़डिंग प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है. इसके लिए सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया है. सेबी ने इन प्रस्तावों पर 4 जून 2026 तक आम जनता से सुझाव मांगे हैं.

क्लोज टू मनी के कॉन्सेप्ट को हटाने का प्रस्ताव

सेबी के प्रस्तावों के मुताबिक कमोडिटी ऑप्शन्स से क्लोज टू मनी (CTM) के कॉन्सेप्ट को पूरी तरह से हटाने का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे ट्रेडिंग और रिस्क मैनेजमेंट को आसान बनाया जा सके.

प्रक्रिया जटिल और अनिश्चित

  • अभी ऑप्शंस को इन द मनी, आउट ऑफ द मनी और क्लोज टू मनी में बांटा जाता है.
  • सेबी के कंसलटेशन पेपर के मुताबिक क्लोज टू मनी मैकेनिज्म के कारण ऑप्शन सेलर्स के लिए प्रक्रिया जटिल और अनिश्चित हो जाती है.
  • क्लोज टू मनी को हटा देने से ट्रेडिंग और रिस्क मैनेजमेंट काफी आसान हो जाएंगे.
  • दुनिया के प्रमुख ग्लोबल कमोडिटी एक्सचेंज भी क्लोज-टू-मनी ढांचे का पालन नहीं करते हैं.

इक्विटी डेरिवेटिव्स को मर्ज करने का सुझाव

सेबी ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स के कई चैप्टर्स को इक्विटी डेरिवेटिव्स नियमों में मर्ज करने का सुझाव दिया है. इससे नियम आसान होंगे और नियमों का डुप्लीकेशन घटेगा.

एक्सचेंज के एमडी को मिले ये अधिकार

  • एक्सचेंज के एमडी को अब इमरजेंसी स्थितियों जैसे त्योहार, कोई हड़ताल या खराब मौसम में कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी की तारीख बदलने का अधिकार देने का प्रस्ताव है.
  • एक्सचेंज को पोजीशन लिमिट मॉनिटरिंग का काम क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को आउटसोर्स करने की भी छूट होगी, जिसके लिए दोनों के बीच एक आधिकारिक एग्रीमेंट होना जरूरी होगा.
  • यदि एक्सचेंज मौजूदा नियमों से ज्यादा सख्त पोजीशन लिमिट लगाते हैं, तो उन्हें अब सेबी को जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी.

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कमेटी की मीटिंग कम करने का प्रस्ताव

नॉन एग्री कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए प्रोडक्ट एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग को साल में दो बार से घटाकर 1 बार करने का प्रस्ताव है, जिससे यह एग्री कमोडिटीज के समान हो जाएगा.

पुराने BMC को हटाने की तैयारी

  • डेरिवेटिव्स ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग अब अखबारों में करने की जरूरत नहीं होगी, इसे सीधे एक्सचेंज की वेबसाइट पर डिस्क्लोज किया जा सकेगा.
  • इंडेक्स डेरिवेटिव्स सक्सेस रिपोर्ट भी अब अलग से सेबी को भेजने के बजाय सीधे वेबसाइट पर डालने का प्रस्ताव है.
  • रीजनल एक्सचेंजों के खत्म होने के बाद पुराने BMC नियमों को भी हटाने की तैयारी है, क्योंकि नेशनवाइड ट्रेडिंग टर्मिनल नियम अब अप्रासंगिक हो गए हैं.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 डेरिवेटिव्स क्या होते हैं?

डेरिवेटिव्स एक तरह के वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट होते हैं, जिनकी अपनी कोई स्वतंत्र वैल्यू नहीं होती है. इनकी कीमत स्टॉक, करेंसी, कमोडिटी या मार्केट इंडेक्स के प्रदर्शन और कीमतों पर निर्भर करती है.

Q2 कमोडिटी डेरिवेटिव्स किसे कहते हैं?

डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का अंडरलाइंग एसेट कोई फिजिकल कॉमोडिटी जैसे सोना, चांदी, कच्चा तेल या कृषि उत्पाद होता, तो उसे कमोडिटी डेरिवेटिव्स कहा जाता है.

Q3 क्लोज टू द मनी का क्या मतलब होता है?

कमोडिटी मार्केट में क्लोज टू द मनी ऐसे ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स को कहते हैं, जिनका स्ट्राइक प्राइस अंडरलाइंग कमोडिटी के मौजूदा स्पॉट प्राइस के बेहद करीब होता है.

Q4 ऑप्शंस ट्रेडिंग में स्ट्राइक प्राइस क्या होता है?

स्ट्राइक प्राइस वह पूर्व निर्धारित कीमत होती है जिस पर किसी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को खरीदने या बेचने का अधिकार भविष्य की एक तय एक्सपायरी पर लागू होता है.

Q5 क्लियरिंग कॉर्पोरेशन क्या होता है?

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन स्टॉक एक्सचेंज से जुड़ी एक स्वतंत्र संस्थ है, जो मार्केट में होने वाले सौदी की गारंटी लेती है. साथ ही यह फंड्स और शेयर, कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट का काम करती है.

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