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मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि शॉर्ट सेलिंग के लिए मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सेबी ने कहा, "एक मीडिया रिपोर्ट में शॉर्ट सेलिंग के नियमों में बदलाव की बात की गई थी, जो 22 दिसंबर 2025 से लागू होंगे. यह रिपोर्ट गलत है." इससे पहले, बुधवार को सेबी ने म्यूचुअल फंड नियमों में व्यापक बदलाव को मंजूरी दी थी, ताकि लागत की पारदर्शिता को बेहतर किया जा सके और निवेशकों पर खर्च का बोझ कम किया जा सके. सेबी ने कहा कि ये बदलाव निवेशकों की सुरक्षा और ट्रांसपेरेंसी को मजबूत करेंगे, साथ ही म्यूचुअल फंड खर्चों को वास्तविक लागतों के करीब लाने में मदद करेंगे.
सेबी बोर्ड ने इन बदलावों को मंजूरी दे दी और यह विस्तृत समीक्षा के बाद मौजूदा 1996 के नियमों की जगह नए सेबी (म्यूचुअल फंड्स) रेगुलेशन, 2026 के तहत लागू किए जाएंगे. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कुल व्यय अनुपात (टीईआर) के नियमों में किया गया है.
TER में शामिल नहीं होंगे ये शुल्क
नए नियमों के तहत टीईआर तीन हिस्सों में बांटा जाएगा, जिसमें बेस एक्सपेंस रेशियो (बीईआर), ब्रोकर शुल्क और वैधानिक या नियामक शुल्क शामिल हैं.
एग्जिट लोड की सीमा घटाई
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सेबी ने डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन पर भी कड़े नियम लगाए हैं और कुछ म्यूचुअल फंड स्कीमों के लिए प्रदर्शन-आधारित खर्च की अनुमति दी है, लेकिन यह नियामक शर्तों के तहत होगा. इसके अलावा, सेबी ने बेस एक्सपेंस रेशियो की सीमा को कुछ फंड कटेगरी के लिए कम किया है। जैसे कि इंडेक्स फंड्स और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) के लिए बीईआर की सीमा 1 प्रतिशत से घटाकर 0.9 प्रतिशत कर दी गई है। क्लोज-एंडेड इक्विटी स्कीमों के लिए यह लिमिट 1.25 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत की गई है.
सवाल: क्या शॉर्ट सेलिंग के नियमों में कोई बदलाव हुआ है?
जवाब: सेबी ने साफ किया है कि शॉर्ट सेलिंग के मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सवाल: म्यूचुअल फंड के नए नियमों का मुख्य लक्ष्य क्या है?
जवाब: निवेशकों के लिए खर्च का बोझ कम करना और फंड प्रबंधन की लागत में पारदर्शिता (transparency) लाना.
सवाल: ये नए नियम कब और किस नाम से लागू होंगे?
जवाब: ये पुराने 1996 के नियमों की जगह नए 'सेबी (म्यूचुअल फंड्स) रेगुलेशन, 2026' के तहत लागू होंगे.
सवाल: TER को अब कितने भागों में बांटा जाएगा?
जवाब: इसे तीन हिस्सों में बांटा जाएगा: बेस एक्सपेंस रेशियो (BER), ब्रोकर शुल्क और वैधानिक/नियामक शुल्क.
सवाल: इंडेक्स फंड्स और ETF के लिए खर्च की नई सीमा क्या है?
जवाब: इनके लिए बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) की सीमा को 1 प्रतिशत से घटाकर 0.9 प्रतिशत कर दिया गया है.