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डीमैट खातों (Demat Account) में सेंधमारी और अनधिकृत लेनदेन को रोकने के लिए SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. SEBI ने UPI की तरह SIM binding व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे निवेशकों के खाते अधिक सुरक्षित हो सकें. जी बिजनेस के ऑपरेशन "डीमैट डाका" में निवेशकों के डीमैट खातों में सेंधमारी और अनधिकृत लेनदेन के मामले को उठाया गया था, जिसके बाद अब सेबी ने यह अहम प्रस्ताव दिया है.
SEBI के प्रस्ताव के अनुसार, क्लाइंट के यूनिक कोड, उनके डिवाइस और SIM तीनों का वेरिफिकेशन जरूरी होगा. इसके बाद ही निवेशक अपने डीमैट खाते में लॉग इन कर पाएंगे और ट्रेडिंग कर सकेंगे. इससे SIM स्पूफिंग, अनधिकृत सौदे और गलत ट्रांसफर जैसी समस्याओं से बचाव होगा.
SEBI पहले इस नई सुरक्षा व्यवस्था को 10 बड़े ब्रोकर्स के ग्राहकों पर लागू करने की योजना बना रहा है. ऐसा इसलिए ताकि इसका असर समझा जा सके और निवेशकों को किसी तरह की परेशानी ना हो. शुरू में यह ऐच्छिक होगा, यानी निवेशकों के लिए यह अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन बाद में इसे सभी के लिए लागू किया जा सकता है.
SEBI की योजना के अनुसार, आगे चलकर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेशियल रिकॉग्निशन जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी. इससे लॉगिन प्रक्रिया और ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी.
नई व्यवस्था के तहत, क्लाइंट को अपने खाते में लॉग इन से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी. यानी कब, कहां और किस डिवाइस से लॉग इन किया गया, यह सब रिकॉर्ड रहेगा. इसके अलावा, निवेशकों को टेंपररी लॉक, दूसरे डिवाइस से लॉग आउट करने, सौदे पर लिमिट लगाने और तय करने की सुविधा भी मिलेगी कि कौन-सा ट्रेड हो सकता है और कौन-सा नहीं.