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सेबी (SEBI) ने आईपीओ, एसएमई आईपीओ (SME IPO) और दोबारा लिस्ट होने वाले शेयरों के लिए 'प्राइस डिस्कवरी रूल्स' में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
शेयर बाजार के निवेशकों और कंपनियों के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) एक और बड़ा बदलाव करने जा रहा है. आईपीओ (IPO) और दोबारा लिस्ट होने वाले शेयरों (Re-listed Shares) की कीमतों में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए सेबी ने एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है.
अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग जानबूझकर कृत्रिम तरीके से शेयरों की शुरुआती कीमतों को दबाने (Artificially Suppressed Price Discovery) की कोशिश करते हैं. ऐसी शिकायतों के बाद सेबी ने इस पूरे सिस्टम को सुधारने का फैसला किया है. इस नए ड्राफ्ट पर सेबी ने 11 जून 2026 तक जनता और एक्सपर्ट्स से सुझाव मांगे हैं.
बाजार नियामक सेबी के पास पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि कुछ लोग या सिंडिकेट मिलकर आईपीओ और दोबारा लिस्ट होने वाले शेयरों की कीमतों को शुरुआती दौर में जानबूझकर दबा देते हैं. चूंकि छोटे निवेशकों (Retail Investors) को इसके तकनीकी पहलुओं की ज्यादा समझ नहीं होती, इसलिए वे इस हेरफेर का शिकार हो जाते हैं.
इसी पारदिर्शता को बहाल करने के लिए सेबी ने नियमों को कड़ा करने का फैसला किया है. अब 5 अलग-अलग पैन (PAN) कार्ड धारक स्वतंत्र निवेशकों की मौजूदगी अनिवार्य करके सेबी यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कीमतों का निर्धारण पूरी तरह से वास्तविक मांग और आपूर्ति (Demand & Supply) के आधार पर हो, न कि किसी सांठगांठ के जरिए.
सेबी का यह नया प्रस्ताव विशेष रूप से एसएमई (SME) आईपीओ और उन कंपनियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा जो किसी वजह से बाजार से लंबे समय के लिए बाहर (Suspend) हो गई थीं. बुक वैल्यू के आधार पर बेस प्राइस तय होने से निवेशकों को कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति का अंदाजा मिल सकेगा. 11 जून 2026 तक सभी पक्षों से राय लेने के बाद सेबी इन नियमों को अंतिम रूप देकर शेयर बाजार में लागू कर देगा.
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