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क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आपके निवेश का कोई वारिस यानी नॉमिनी तय न हो, तो उस पैसे का क्या होता है? करोड़ों रुपये आज भी 'अनक्लेमड एसेट्स' के तौर पर पड़े हुए हैं क्योंकि निवेशकों ने अपने खातों में नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी. इसी बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी में है.
सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि अब डीमैट और म्यूचुअल फंड खातों में नॉमिनेशन 'डिफ़ॉल्ट' (Default) मोड पर होगा. इसका मतलब यह है कि सिस्टम अब यह मानकर चलेगा कि आपको नॉमिनी बनाना ही है. यह कदम उन लाखों निवेशकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है जो अक्सर कागजी कार्रवाई के आलस में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं करते हैं.
अभी तक के सिस्टम में कई लोग नॉमिनेशन की प्रक्रिया को टाल देते थे. लेकिन सेबी के नए प्रस्ताव के बाद खेल बदल जाएगा. अब 'ऑटो ऑप्ट-इन' (Auto Opt-in) का सिस्टम होगा. यानी नॉमिनेशन की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाएगी. अगर कोई निवेशक यह चाहता है कि उसका कोई नॉमिनी न हो, तो उसे खुद 'ऑप्ट-आउट' (Opt-out) का विकल्प चुनना होगा.
खास बात यह है कि सेबी अब वीडियो-आधारित 'ऑप्ट-आउट' प्रक्रिया को हटाने पर विचार कर रहा है ताकि काम और आसान हो सके. हालांकि, अगर आप नॉमिनी नहीं बनाना चाहते, तो सिस्टम आपको एक पॉप-अप के जरिए अलर्ट करेगा और आपकी स्पष्ट सहमति (Consent) मांगेगा. सेबी का पूरा फोकस इस बात पर है कि किसी भी निवेशक का पैसा भविष्य में लावारिस न रह जाए.
अक्सर हम काम की व्यस्तता में जरूरी काम भूल जाते हैं. सेबी ने इसका भी इलाज ढूंढ लिया है. अब निवेशकों को एसएमएस (SMS), ईमेल और मोबाइल ऐप पॉप-अप के जरिए नॉमिनेशन पूरा करने के लिए 'नजिंग' (Nudging) यानी याद दिलाया जाएगा. यह डिजिटल अलर्ट तब तक मिलते रहेंगे जब तक आप अपना फैसला दर्ज नहीं कर देते.
सेबी के आंकड़ों से पता चला है कि ज्यादातर निवेशक अभी भी नॉमिनेशन नहीं कर रहे हैं, जो आने वाले समय में उनके परिवार के लिए कानूनी मुश्किलें खड़ी कर सकता है. इसी को देखते हुए अब ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही रास्तों को बहुत सरल बनाया जा रहा है.
सेबी ने एक और बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. पहले आप अपने खाते में 10 नॉमिनी तक जोड़ सकते थे, जिसे अब घटाकर 4 करने का प्रस्ताव है. सेबी का मानना है कि कम नॉमिनी होने से प्रक्रिया साफ और स्पष्ट रहती है. हालांकि, जॉइंट होल्डर्स की सीमा अभी भी 3 ही रहेगी, इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.
डिजिटल इंडिया के दौर में अब नॉमिनेशन के लिए आपको दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी. आप आधार ई-साइन (Aadhaar e-sign), डिजिटल सिग्नेचर (DSC) या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) के जरिए घर बैठे ऑनलाइन नॉमिनेशन कर सकेंगे. वहीं, फिजिकल फॉर्म भरने वालों के लिए भी राहत की बात यह है कि अब गवाह (Witness) की जरूरत आमतौर पर नहीं पड़ेगी.
नए नियमों में कुछ कानूनी बारीकियों को भी स्पष्ट किया गया है. अगर किसी नॉमिनी को 'ट्रस्टी' के तौर पर नियुक्त किया जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह उस संपत्ति को असली कानूनी वारिसों (Legal Heirs) के लिए सुरक्षित रखे.
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) होल्डर अब आपकी जगह नॉमिनेशन नहीं कर सकेगा. यह हक सिर्फ और सिर्फ मूल निवेशक का ही होगा. सेबी ने इन सभी प्रस्तावों पर जनता और एक्सपर्ट्स से 7 अप्रैल 2026 तक सुझाव और राय मांगी है. इसके बाद इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा.
Q: सेबी के नए प्रस्ताव के बाद नॉमिनेशन की प्रक्रिया में क्या बड़ा बदलाव आएगा?
A: अब डीमैट और म्यूचुअल फंड खातों में नॉमिनेशन अपने आप (Default) लागू होगा. निवेशकों को नॉमिनी नहीं बनाने के लिए खुद 'ऑप्ट-आउट' का विकल्प चुनना होगा.
Q: एक खाते में अब अधिकतम कितने नॉमिनी रखे जा सकेंगे?
A: सेबी ने नॉमिनी की अधिकतम सीमा को 10 से घटाकर 4 करने का प्रस्ताव दिया है.
Q: क्या ऑनलाइन नॉमिनेशन करना आसान होगा?
A: हां, अब आधार ई-साइन, डिजिटल सिग्नेचर या 2FA के जरिए ऑनलाइन नॉमिनेशन की प्रक्रिया को बहुत सरल बनाया जा रहा है.
Q: क्या पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) होल्डर नॉमिनी बदल सकता है?
A: नहीं, सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक POA होल्डर को नॉमिनेशन करने या बदलने का अधिकार नहीं होगा.
Q: इन प्रस्तावों पर राय देने की आखिरी तारीख क्या है?
A: सेबी ने इन नए बदलावों और प्रस्तावों पर सुझाव देने के लिए 7 अप्रैल 2026 तक का समय दिया है.