SEBI का बड़ा फैसला! अब 'एजुकेशन' के लिए नहीं मिलेगा ताजा मार्केट डेटा, 30 दिन के 'लैग' के साथ बदलेगा नियम

बाजार नियामक SEBI ने मार्केट डेटा के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम जारी किए हैं. 1 जुलाई 2026 से शैक्षणिक संस्थाएं केवल 30 दिन पुराना डेटा ही इस्तेमाल कर सकेंगी. इसका मकसद शिक्षा के नाम पर दी जाने वाली गलत निवेश सलाह और डेटा के दुरुपयोग को रोकना है. जानिए इन नियमों का ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म्स और निवेशकों पर क्या असर होगा.
SEBI का बड़ा फैसला! अब 'एजुकेशन' के लिए नहीं मिलेगा ताजा मार्केट डेटा, 30 दिन के 'लैग' के साथ बदलेगा नियम

SEBI ने कहा, अब 'एजुकेशन' के लिए नहीं मिलेगा ताजा मार्केट डेटा. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

पूंजी बाजार नियामक SEBI ने मार्केट डेटा शेयरिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है. नए नियमों के तहत अब एजुकेशनल पर्पज के लिए केवल 30 दिन पुराना प्राइस डेटा ही इस्तेमाल किया जा सकेगा.

SEBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब बाजार से जुड़े डेटा के गलत इस्तेमाल और निवेशकों को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही थी.

नए सर्कुलर के मुताबिक, अब किसी भी एजुकेशनल संस्था या ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म को 30 दिन से कम पुराना मार्केट प्राइस डेटा इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो जाएगा.

पुराने नियमों में क्या था?

अब तक डेटा शेयरिंग को लेकर अलग-अलग तरह के Lag Rules लागू थे. कुछ मामलों में 1 दिन पुराना डेटा इस्तेमाल किया जा सकता था, जबकि कुछ प्लेटफॉर्म्स को 3 महीने पुराने डेटा के इस्तेमाल की अनुमति थी.

लेकिन SEBI को इस व्यवस्था को लेकर कई Stakeholders से लगातार फीडबैक मिल रहा था. एक तरफ कुछ लोगों का कहना था कि 3 महीने का लंबा Lag एजुकेशनल इस्तेमाल के लिए बहुत ज्यादा है, वहीं दूसरी तरफ हालिया डेटा के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही थी.

इन्हीं चिंताओं को देखते हुए अब SEBI ने एक समान नियम लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत 30 दिन का Lag Rule सभी एजुकेशनल इस्तेमाल पर लागू होगा.

क्यों लिया गया यह फैसला?

SEBI को हाल के समय में यह फीडबैक मिला था कि कई प्लेटफॉर्म्स हालिया या लगभग रियल टाइम मार्केट डेटा का इस्तेमाल करके अप्रत्यक्ष रूप से निवेश सलाह जैसी गतिविधियां चला रहे थे. इससे बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा होने और निवेशकों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा था.

नियामक को यह भी चिंता थी कि एजुकेशनल परपज के नाम पर कुछ संस्थाएं ऐसे डेटा का इस्तेमाल कर रही थीं, जिससे Future Price Movement को लेकर संकेत दिए जा रहे थे. इसी वजह से SEBI ने डेटा इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपनाया है.

नए नियमों के तहत अब किसी भी संस्था को Security Name या Code Name का इस्तेमाल करके Future Price Advice देने की अनुमति नहीं होगी. यानी अगर कोई प्लेटफॉर्म किसी शेयर, इंडेक्स या सिक्योरिटी का नाम लेकर भविष्य की कीमतों को लेकर राय देता है, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है.

NISM को मिलेगी विशेष अनुमति

हालांकि SEBI ने National Institute of Securities Markets (NISM) को कुछ राहत दी है. NISM को अपनी Simulation Lab के लिए 1 दिन पुराने डेटा के इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी. इसका मतलब है कि NISM अपने ट्रेनिंग और Simulation Purpose के लिए तुलनात्मक रूप से हालिया मार्केट डेटा का इस्तेमाल कर सकेगा. लेकिन यह छूट केवल सीमित और विशेष शैक्षणिक उपयोग के लिए होगी.

Educational Entities पर क्या असर पड़ेगा?

नए नियम लागू होने के बाद सभी Educational Entities को अपने कंटेंट, ट्रेनिंग मॉडल और डेटा सिस्टम में बदलाव करना होगा. अब कोई भी संस्था 30 दिन के भीतर का Market Price Data इस्तेमाल नहीं कर सकेगी.

इससे उन प्लेटफॉर्म्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है जो हालिया मार्केट डेटा के आधार पर लाइव ट्रेनिंग, बैकटेस्टिंग या मार्केट बिहेवियर समझाने का काम करते हैं.

SEBI का मानना है कि इससे निवेशकों को भ्रमित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगेगी और एजुकेशनल प्लेटफॉर्म्स वास्तव में शिक्षा तक सीमित रहेंगे, न कि अप्रत्यक्ष सलाह देने वाले माध्यम बनेंगे.

Legal Agreement और Audit Trail अनिवार्य

SEBI ने डेटा शेयरिंग को लेकर Compliance Requirements भी सख्त कर दिए हैं. नए नियमों के तहत डेटा शेयरिंग करने वाली संस्थाओं के लिए Legal Agreement अनिवार्य होगा.

इसके अलावा Audit Trail बनाए रखना भी जरूरी होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर यह ट्रैक किया जा सके कि डेटा का इस्तेमाल कहां और किस तरीके से किया गया. इस कदम का मकसद डेटा के misuse को रोकना और जवाबदेही तय करना है.

मार्केट इकोसिस्टम पर क्या होगा असर?

SEBI के इस फैसले का असर पूरे मार्केट एजुकेशन इकोसिस्टम पर देखने को मिल सकता है. कई Fintech Platforms, Trading Academies और Market Training Companies को अपने सिस्टम अपडेट करने पड़ सकते हैं. हालांकि नियामक का फोकस साफ तौर पर निवेशकों की सुरक्षा और डेटा के जिम्मेदार इस्तेमाल पर नजर आ रहा है.

इसके अलावा, इससे एजुकेशनल कंटेंट और निवेश सलाह के बीच की सीमा और स्पष्ट हो जाएगी. इससे ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर भी निगरानी आसान होगी जो शिक्षा के नाम पर ट्रेडिंग संकेत देने का काम करते हैं.

1 जुलाई 2026 से लागू होंगे नियम

SEBI ने साफ किया है कि नए नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएंगे. यानी संस्थाओं के पास बदलाव लागू करने के लिए कुछ समय रहेगा. अब आने वाले महीनों में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि एजुकेशनल प्लेटफॉर्म्स और डेटा इस्तेमाल करने वाली संस्थाएं इन नए नियमों के मुताबिक खुद को कैसे ढालती हैं. SEBI का यह कदम साफ संकेत देता है कि बाजार नियामक अब डेटा सुरक्षा, निवेशक हित और मार्केट ट्रांसपेरेंसी को लेकर पहले से ज्यादा सख्त रुख अपनाने के मूड में है.

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