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अब म्यूचुअल फंड कंपनियों को दिनभर के लिए आसानी से मिल सकेगा पैसा. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
शेयर बाजार के रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India यानी SEBI ने म्यूचुअल फंड कंपनियों को राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है. SEBI ने एक नया मसौदा जारी किया है, जिसमें फंड कंपनियों को जरूरत पड़ने पर दिनभर के लिए उधार लेने की ज्यादा छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है. अगर यह नियम लागू होते हैं तो म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए रोजमर्रा के भुगतान और नकदी संभालना आसान हो जाएगा.
अभी तक म्यूचुअल फंड कंपनियां मुख्य रूप से निवेशकों को पैसा लौटाने यानी रिडेम्पशन के लिए ही इस तरह की उधारी ले सकती थीं. लेकिन अब SEBI चाहता है कि जरूरत पड़ने पर कंपनियां दूसरे जरूरी कामों के लिए भी दिनभर के लिए पैसा ले सकें. प्रस्ताव के मुताबिक भुगतान निपटाने, विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन और शेयर बाजार में रोजाना होने वाले घाटे-फायदे का हिसाब चुकाने जैसे कामों में भी इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
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पिछले कुछ समय में कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने SEBI को बताया था कि बाजार में तेजी से बढ़ते लेनदेन के बीच छोटी अवधि के लिए नकदी की जरूरत बढ़ रही है. कई बार दिनभर के भुगतान और बाजार से जुड़े जरूरी काम संभालने में परेशानी आती है. इसी को देखते हुए SEBI ने नियम आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है ताकि कंपनियों को थोड़े समय के लिए नकदी जुटाने में दिक्कत न हो.
SEBI ने साफ कहा है कि दिनभर के लिए लिया गया पैसा उसी दिन वापस करना जरूरी होगा. अगर पैसा अगले दिन तक जारी रहता है तो उस पर अलग नियम लागू होंगे. यानि यह सुविधा सिर्फ छोटी अवधि और बेहद जरूरी जरूरतों के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी.
SEBI ने अपने मसौदे में यह भी साफ किया है कि इस उधारी का खर्च म्यूचुअल फंड चलाने वाली कंपनी खुद उठाएगी. इसका बोझ निवेशकों पर नहीं डाला जाएगा. इसका मतलब यह है कि निवेशकों के रिटर्न पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा.
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SEBI ने इस प्रस्ताव पर बाजार से जुड़े लोगों और आम जनता से 3 जून तक सुझाव मांगे हैं. इसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जा सकता है. अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए भुगतान समय पर करना आसान होगा. नकदी की छोटी अवधि वाली दिक्कतें कम होंगी और बाजार से जुड़े रोजमर्रा के कामकाज बेहतर तरीके से हो सकेंगे. जानकारों का मानना है कि इससे तेजी से बढ़ रहे म्यूचुअल फंड सेक्टर को काफी मदद मिलेगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा.