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पूंजी बाजार नियामक SEBI ने निवेशकों के हितों की रक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. सेबी ने अब आधिकारिक तौर पर PaRRVA (Performance Audit and Report Verification Agency) फ्रेमवर्क को हरी झंडी दे दी है.
इस नए सिस्टम के आने से इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी और ट्रेडिंग के क्षेत्र में होने वाले दावों की सच्चाई अब निवेशकों के सामने शीशे की तरह साफ होगी. यह नया ढांचा 4 मई 2026 से पूरी तरह से लागू हो जाएगा. आइए समझते हैं कि आखिर क्या है PaRRVA और यह आपके निवेश के अनुभव को कैसे बदलेगा.
अक्सर सोशल मीडिया और विज्ञापनों में इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स (IA) और रिसर्च एनालिस्ट्स (RA) यह दावा करते हैं कि उनकी सलाह से निवेशकों को 50% या 100% तक का रिटर्न मिला है. कई बार ये दावे बिना किसी ठोस आधार के होते हैं.
PaRRVA (Performance Audit and Report Verification Agency) इसी समस्या का समाधान है. यह एक ऐसी स्वतंत्र एजेंसी है जो इन सलाहकारों और एल्गो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के 'परफॉर्मेंस' डेटा का ऑडिट और वेरिफिकेशन करेगी. इसका पायलट प्रोजेक्ट 8 दिसंबर 2025 से चल रहा था, जो अब 4 मई 2026 से नियमित सेवा में बदल जाएगा.
इस पूरे फ्रेमवर्क को चलाने के लिए सेबी ने दो बड़े दिग्गजों को जिम्मेदारी सौंपी है:
CARE Ratings बनी PaRRVA: यह मुख्य एजेंसी होगी जो सलाहकारों द्वारा जमा किए गए डेटा की शुद्धता की जांच करेगी. यह प्रमाणित करेगी कि जो मुनाफा या ट्रैक रिकॉर्ड दिखाया जा रहा है, वह सच है या नहीं. अब यह PaRRVA के नाम से जानी जाएगी.
NSE (PaRRVA डेटा सेंटर - PDC): नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इस पूरे सिस्टम के लिए 'डेटा सेंटर' का काम करेगा. सारा वेरिफाइड डेटा यहीं सुरक्षित रखा जाएगा.
पारदर्शिता: अब कोई भी एडवाइजर हवा-हवाई दावे नहीं कर पाएगा. उन्हें विज्ञापनों में केवल वही डेटा दिखाने की अनुमति होगी, जिसे PaRRVA ने वेरिफाई किया है.
भरोसा: निवेशकों को पता होगा कि जो ट्रैक रिकॉर्ड वह देख रहे हैं, वह सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी से प्रमाणित है.
एल्गो ट्रेडिंग में सुरक्षा: एल्गो ट्रेडिंग (कंप्यूटर आधारित ट्रेडिंग) में भी अब प्रदर्शन के आंकड़ों में हेरफेर करना मुश्किल होगा.
विज्ञापनों की विश्वसनीयता: सलाहकारों के लिए भी यह अच्छा है, क्योंकि एक 'वेरिफाइड' टैग उनके ब्रांड की वैल्यू बढ़ाएगा.
सेबी का PaRRVA फ्रेमवर्क भारतीय शेयर बाजार के लिए एक 'क्लीनिंग एजेंट' की तरह काम करेगा. यह उन लोगों को बाहर करेगा जो गलत आंकड़ों के जरिए मासूम निवेशकों को गुमराह करते हैं. 4 मई 2026 से शुरू होने वाला यह नया युग निवेशकों को सशक्त बनाएगा और उन्हें सही निर्णय लेने में मदद करेगा. अब निवेश की दुनिया में 'सिर्फ दावा' नहीं, बल्कि 'वेरिफाइड डेटा' ही राजा होगा.
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