सावधान! शेयर मार्केट सिखाने के नाम पर 'खेल' अब नहीं चलेगा! SEBI ने कसी कमर

SEBI ने स्टॉक मार्केट डेटा के एजुकेशन इस्तेमाल पर एक नया प्रस्ताव पेश किया है. अब एजुकेशन या जागरूकता फैलाने वाले वीडियो और क्लास में लाइव प्राइस डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.
सावधान! शेयर मार्केट सिखाने के नाम पर 'खेल' अब नहीं चलेगा! SEBI ने कसी कमर

शेयर मार्केट की एबीसीडी सिखाना अच्छी बात है, लेकिन अगर कोई पढ़ाई के नाम पर आपको लाइव मार्केट के भाव दिखाकर 'टिप्स' देने लगे, तो सावधान हो जाइए. मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अब साफ़ कर दिया है कि एजुकेशन और एडवाइजरी के बीच एक बहुत पतली लकीर है, जिसे कुछ लोग पार कर रहे हैं. इसी 'खेल' को रोकने के लिए SEBI एक नया नियम लेकर आया है.

दरअसल, SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है. इसमें कहा गया है कि अगर आप सिर्फ पढ़ाई या इन्वेस्टर अवेयरनेस के लिए डेटा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो अब आपको 30 दिन पुराने प्राइस डेटा से ही काम चलाना होगा. यानी आज जो बाजार में चल रहा है, उसे आप एजुकेशन के नाम पर नहीं दिखा सकते.

आखिर SEBI को क्यों उठानी पड़ी सख्ती?

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बाजार में पिछले कुछ समय से देखा गया कि कई लोग एजुकेशन की आड़ में लाइव डेटा का इस्तेमाल कर रहे थे. लाइव प्राइस देखकर एनालिसिस करना और फिर उस पर अपनी राय देना असल में 'इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी' के दायरे में आता है. SEBI का कहना है कि एडवाइजरी देने का हक सिर्फ उन्हीं को है जो SEBI के पास रजिस्टर्ड हैं.

बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी व्यक्ति लाइव प्राइस दिखाकर यह नहीं कह सकता कि आगे भाव ऊपर जाएगा या नीचे. अगर कोई ऐसा करता है, तो वह कानूनन गलत है. एजुकेशन कंटेंट में लाइव प्राइस दिखाने पर पहले ही रोक थी, लेकिन अलग-अलग सर्कुलर की वजह से डेटा के इस्तेमाल को लेकर कुछ कन्फ्यूजन था, जिसे अब दूर किया जा रहा है.

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1 दिन, 3 महीने और अब 30 दिन का गणित

SEBI ने इससे पहले दो अलग-अलग सर्कुलर जारी किए थे, जिससे नियम थोड़े उलझे हुए लग रहे थे-

मई 2024 का सर्कुलर

इसमें कहा गया था कि एक्सचेंज एजुकेशन के लिए डेटा 1 दिन की देरी (Time Lag) से शेयर करेंगे.

जनवरी 2025 का सर्कुलर

इसमें कहा गया था कि एजुकेशन देने वाले लोग 3 महीने पुराने डेटा का ही इस्तेमाल अपनी क्लास या वीडियो में कर पाएंगे. अब मार्केट के जानकारों और स्टेकहोल्डर्स ने अपनी चिंताएं जताईं.

किसी ने कहा 1 दिन का समय बहुत कम है, इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है. किसी ने कहा 3 महीने बहुत ज्यादा पुराने हैं, जिससे पढ़ाई बोरिंग और आउटडेटेड हो जाती है. इसीलिए SEBI ने बीच का रास्ता निकाला है और अब 30 दिन का यूनिफॉर्म Lag (देरी) प्रस्तावित किया है.

क्या बदलेगा इस नए नियम से?

अब डेटा शेयर करने वाले (जैसे स्टॉक एक्सचेंज) और डेटा इस्तेमाल करने वाले (एजुकेटर्स) दोनों के लिए एक ही नियम होगा.

डेटा शेयरिंग- स्टॉक एक्सचेंज अब एजुकेशन के लिए जो डेटा देंगे, वह कम से कम 30 दिन पुराना होगा.

डेटा यूसेज- पढ़ाने वाले लोग अपने कंटेंट, वीडियो या क्लास में जो भी प्राइस डेटा दिखाएंगे, वह भी 30 दिन पुराना होना जरूरी है.

इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप आज की तारीख में कोई स्टॉक मार्केट की क्लास ले रहे हैं, तो उसमें आपको जो चार्ट या भाव दिखाए जाएंगे, वे कम से कम एक महीने पुराने होने चाहिए. इससे यह पक्का होगा कि सिखाने वाला व्यक्ति आपको उस डेटा के आधार पर कोई 'ताजा टिप' नहीं दे पा रहा है.

एजुकेशन के नाम पर एडवाइजरी का खेल खत्म

SEBI ने साफ शब्दों में कहा है कि लाइव डेटा के आधार पर भविष्य के भावों का अंदाजा लगाना रिसर्च एनालिस्ट या इन्वेस्टमेंट एडवाइजर का काम है. जो लोग सिर्फ एजुकेशन दे रहे हैं, उन्हें इन कड़े नियमों से छूट तभी मिलेगी जब वे पुराने डेटा का इस्तेमाल करेंगे. अगर कोई पुराने डेटा पर सिखा रहा है, तो उस पर एडवाइजरी वाले सख्त नियम लागू नहीं होंगे.

इसके साथ ही, जनवरी 2025 के सर्कुलर में जो काम करने की मनाही (Prohibited Activities) की गई थी, वे पाबंदियां अभी भी जारी रहेंगी. यानी आप किसी भी तरह से रेगुलेटेड नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकते.

अपनी राय देने का है मौका

SEBI ने इस पर अभी सिर्फ प्रस्ताव रखा है और जनता से उनकी राय मांगी है. अगर आपको लगता है कि इसमें कुछ और बदलाव होने चाहिए या कोई और सुरक्षा के उपाय जोड़ने चाहिए, तो आप अपनी बात SEBI तक पहुंचा सकते हैं.

अंतिम तारीख- अपनी राय भेजने की आखिरी तारीख 27 जनवरी 2026 है.

कैसे भेजें- SEBI की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म के जरिए या ईमेल के जरिए अपने कमेंट्स भेजे जा सकते हैं.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-FAQs

Q 1: क्या अब मैं यूट्यूब पर लाइव मार्केट का एनालिसिस नहीं देख पाऊंगा?

A: अगर कोई सिर्फ एजुकेशन दे रहा है और वह SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर नहीं है, तो वह लाइव प्राइस का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. उसे 30 दिन पुराना डेटा दिखाना होगा.

Q 2: क्या यह नियम स्टॉक एक्सचेंजों पर भी लागू होता है?

A: हां, स्टॉक एक्सचेंजों को भी अब एजुकेशन के मकसद से डेटा शेयर करते वक्त कम से कम 30 दिन की देरी रखनी होगी.

Q 3: 30 दिन का ही समय क्यों चुना गया?

A: पहले 1 दिन और 3 महीने के अलग-अलग नियम थे. 30 दिन का समय इसलिए रखा गया है ताकि कंटेंट पढ़ाई के लिए काम का भी रहे और उसका गलत इस्तेमाल कर एडवाइजरी भी न दी जा सके.

Q 4: क्या रजिस्टर्ड एडवाइजर्स पर भी यह नियम लागू है?

A: यह नियम खास तौर पर 'सिर्फ एजुकेशन' देने वालों के लिए है. रजिस्टर्ड एडवाइजर्स और एनालिस्ट्स अपने तय नियमों के हिसाब से काम करते रहेंगे.

Q 5: क्या मैं इस प्रस्ताव पर अपनी राय दे सकता हूं?

A: जी हां, SEBI ने जनता से कमेंट्स मांगे हैं. आप 27 जनवरी 2026 तक SEBI की वेबसाइट या ईमेल के जरिए अपनी राय दे सकते हैं.

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