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SEBI का नया ऐलान!
शेयर बाजार में नियम जितने सख्त होते हैं, निवेशकों का भरोसा उतना ही मजबूत होता है. लेकिन कभी-कभी नियमों की पेचीदगी काम करने की रफ्तार को धीमा कर देती है. इसी को ध्यान में रखते हुए मार्केट रेगुलेटर SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने स्टॉक ब्रोकर्स के लिए एक बड़ी राहत की तैयारी की है. SEBI ने एक नया ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया है जिसका उद्देश्य 'Ease of Doing Business' यानी व्यापार करने में आसानी करनी है.
अभी तक स्टॉक ब्रोकर्स को अपने हर बैंक और डीमैट अकाउंट की पाई-पाई की खबर स्टॉक एक्सचेंज को देनी पड़ती थी. चाहे वह अकाउंट ब्रोकिंग के काम आए या न आए, कागजी कार्रवाई का बोझ बना रहता था. अब SEBI ने इस सिस्टम को थोड़ा हल्का और ज्यादा समझदार बनाने का प्रस्ताव रखा है.
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असल में स्टॉक एक्सचेंजों और ब्रोकर्स की तरफ से SEBI को कुछ सुझाव मिले थे. उनका कहना था कि जो ब्रोकर्स खुद बैंक हैं या 'प्राइमरी डीलर्स' के तौर पर काम करते हैं, उनके पास कई तरह के खाते होते हैं. इनमें से बहुत से खातों का स्टॉक ब्रोकिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. फिर भी नियम के मुताबिक उन्हें हर अकाउंट टैग करना पड़ता था और उसकी जानकारी देनी पड़ती थी. SEBI को लगा कि अगर रेगुलेटरी सिस्टम को ज्यादा कुशल बनाना है, तो इन गैर-जरूरी रिपोर्टिंग ऑब्लिगेशन्स को हटाना ही सही होगा.
पुराने मास्टर सर्कुलर (17 जून 2025) के हिसाब से ब्रोकर्स के सभी डीमैट खातों को टैग करना जरूरी था ताकि उनका मकसद साफ रहे. नए प्रस्ताव में एक बड़ी छूट दी गई है. अगर कोई स्टॉक ब्रोकर एक 'प्राइमरी डीलर' भी है, तो उसे उन डीमैट खातों को टैग करने की जरूरत नहीं होगी जिनका इस्तेमाल वह विशेष रूप से ब्रोकिंग के अलावा दूसरे कामों के लिए करता है. इससे ब्रोकर्स का कीमती समय बचेगा और फालतू की कागजी कार्रवाई कम होगी.
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ब्रोकर्स के लिए एक और राहत की खबर बैंक खातों को लेकर है. अब ऐसे स्टॉक ब्रोकर्स जो बैंक या प्राइमरी डीलर्स भी हैं, उन्हें सिर्फ उन बैंक खातों की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को देनी होगी जो उनके स्टॉक ब्रोकिंग बिजनेस से जुड़े हैं. दूसरे व्यक्तिगत या अलग बिजनेस वाले खातों की रिपोर्टिंग अब जरूरी नहीं होगी. यह कदम रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को और ज्यादा साफ-सुथरा बनाने के लिए उठाया गया है.
अब तक ब्रोकर्स को खुद अपनी डीमैट डिटेल्स एक्सचेंज को भेजनी पड़ती थी. SEBI ने इसे ऑटोमेट करने का प्रस्ताव दिया है. अब डिपॉजिटरी (जैसे NSDL या CDSL) सीधे स्टॉक एक्सचेंज को उन डीमैट खातों की जानकारी देंगे जो ब्रोकर्स द्वारा खोले या बंद किए जाएंगे.
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इसके लिए समय-सीमा और तरीका स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी मिलकर तय करेंगे. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि डेटा में गलती होने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और एक्सचेंज के पास रीयल-टाइम जानकारी होगी.
भले ही रिपोर्टिंग में ढील दी गई है, लेकिन जो जानकारी देनी जरूरी है, उसके लिए वक्त का पाबंद रहना होगा:
SEBI ने साफ किया है कि 17 जून 2025 के मास्टर सर्कुलर के बाकी सभी प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे. यह बदलाव सिर्फ रिपोर्टिंग को आसान बनाने के लिए हैं. अभी यह एक ड्राफ्ट है और इस पर जनता की राय मांगी गई है. एक बार फीडबैक मिलने के बाद, इसे लागू करने की तारीख तय की जाएगी. स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरी को निर्देश दिया गया है कि वे अपने बाय-लॉज और नियमों में जरूरी बदलाव करें ताकि इसे सुचारू रूप से जमीन पर उतारा जा सके.
SEBI का यह कदम यह दिखाता है कि रेगुलेटर अब सिर्फ डंडा चलाने में नहीं, बल्कि सिस्टम को सुधारने में भी यकीन रखता है. ब्रोकर्स के लिए रिपोर्टिंग के बोझ को कम करके SEBI ने बाजार में एक पॉजिटिव माहौल बनाने की कोशिश की है.
ब्रोकर के अलावा, मार्केट रेगुलेटर सेबी ने ‘SEBI Check’ टूल के लिए AI-Driven Calling Campaign भी शुरू किया है. इस कैंपेन के तहत पायलट आधार पर बहुभाषी जागरूकता अभियान लॉन्च किया जाएगा, इससे ‘SEBI Check’ टूल और Validated UPI Handles को बढ़ावा मिलेगा.
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