कौन हैं SEBI चीफ Madhabi Buch, हिंडनबर्ग खुलासे में आया नाम, अडानी केस में मिलीभगत का आरोप

Madhabi Puri Buch Profile: हिंडनबर्ग रिसर्च ने SEBI की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति पर अदाणी से जुड़ी विदेशी कोष में हिस्सेदारी होने का आरोप लगाया है. जानिए माधबी पुरी बुच से जुड़ी अहम बातें.
कौन हैं SEBI चीफ Madhabi Buch, हिंडनबर्ग खुलासे में आया नाम, अडानी केस में मिलीभगत का आरोप

Madhabi Puri Buch Profile: अमेरिकी शोध और निवेश कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने बाजार नियामक सिक्युरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति पर अदाणी से जुड़ी विदेशी कोष में हिस्सेदारी होने का आरोप लगाया है. हिंडनबर्ग ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि सेबी चेयरपर्सन बुच और उनके पति धबल बुच के पास उस विदेशी कोष में हिस्सेदारी है, जिसका उपयोग अदाणी समूह में कथित धन की हेराफेरी को लेकर इस्तेमाल किया गया. हालांकि सेबी प्रमुख ने आरोप को पूरी तरह आधारहीन बताया है. माधबी पुरी बुच सेबी की पहली महिला अध्यक्ष हैं. उनका कार्यकाल मार्च 2022 से शुरू हुआ था.

IIM से किया एमबीए, ICICI बैंक से की करियर की शुरुआत

माधबी पुरी बुच ने अपनी स्कूल की पढ़ाई फोर्ट कॉन्वेंट स्कूल मुंबई और कॉन्वेंट ऑफ जीसस मैरी स्कूल नई दिल्ली से की है. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन्स कॉलेज के मैथेमेटिक्स में ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने आगे चलकर IIM अहमदाबाद से एमबीए किया. माधबी पुरी बुच ने साल 1989 में आईसीआईसीआई बैंक के साथ अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर वह इनवेस्टमेंट बैंकर और कार्यकारी निदेशक जैसे अहम पदों पर रही थीं.

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2006 से 2011 तक आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज में रही थीं MD और CEO

साल 1993 से साल 1995 के बीच माधबी पुरी बुच ने वेस्ट चेशायर कॉलेज इंग्लैंड में बतौर लेक्चरर काम किया. 12 साल तक उन्होंने कई कंपनियों के सेल्स, मार्केटिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में अपनी सेवाएं दी थी. साल 2006 से 2011 तक उन्होंने आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ की जिम्मेदारी निभाई. इसके बाद वह साल 2011 में सिंगापुर चली गईं, यहां पर उन्होंने ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल एलएलपी में बड़ा पद संभाला.

न्यू डेवलपमेंट बैंक में रही थीं एडवाइजर, 2017 में बनी सेबी की पूर्णकालिक सदस्य

साल 2013 से साल 2017 तक उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक में बतौर एडवाइजर काम किया. इसके बाद साल 2017 में उन्हें सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया था. साल 2018 में उन्होंने सहारा ग्रुप के खिलाफ आदेश पारित किया, जिसमें सेबी के आदेश का उल्लंघन करते हुए निवेशकों से फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर के जरिए जुटाए गए 14 हजार करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया था. साल 2022 में उन्होंने सेबी के अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यभार संभाला था.

हिंडनबर्ग रिसर्च फर्म की रिपोर्ट पर माधबी बुच ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ सेबी ने प्रवर्तन कार्रवाई की है और कारण बताओ नोटिस जारी किया है, उसी के जवाब में हमें ही घेरने और चरित्र हनन करने का प्रयास किया गया है.’

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