SEBI का बड़ा एक्शन! 68 इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स का रजिस्ट्रेशन किया कैंसिल, जानें क्यों गिरी गाज?

SEBI ने रिन्यूअल फीस न भरने पर 68 इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की मान्यता रद्द कर दी. कई नोटिस भेजने के बावजूद जब भुगतान नहीं किया गया, तो SEBI ने Intermediaries Regulations, 2008 के तहत कार्रवाई की.
SEBI का बड़ा एक्शन! 68 इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स का रजिस्ट्रेशन किया कैंसिल, जानें क्यों गिरी गाज?

SEBI Investment Adviser: पूंजी बाजार नियामक SEBI ने गुरुवार को बड़ा कदम उठाते हुए 68 इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स (IA) की रजिस्ट्रेशन मान्यता रद्द कर दी. नियामक ने कहा कि इन सभी एडवाइजर्स ने रिन्यूअल फीस का भुगतान नहीं किया, जबकि समय रहते उन्हें कई बार नोटिस भी भेजे गए थे. SEBI के इस फैसले का असर सीधे उन निवेशकों पर पड़ता है जो निवेश सलाह के लिए इन संस्थाओं पर निर्भर रहते थे.

SEBI की डिजाइनेटेड अथॉरिटी सोमा मजूमदार ने अपने आदेश में कहा कि Intermediaries Regulations, 2008 के तहत Noticees No 1 to 68 के इन्वेस्टमेंट एडवाइजर सर्टिफिकेट रद्द किए जाते हैं. मतलब अब ये 68 संस्थाएं और व्यक्ति आधिकारिक तौर पर इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सेवा नहीं दे सकते.

किन एडवाइजर्स के रजिस्ट्रेशन हुए कैंसिल

रद्द की गई संस्थाओं की सूची में कई छोटे-बड़े नाम शामिल हैं. जैसे कि Truenorth Labs Pvt Ltd, Equity Mantra, Saurabh Mundra, Sheetal Agrawal, Ateet Hemant Wagh, Getbasis Securities and Technologies India Pvt Ltd, Lucid Technologies, Avenue Venture Partners Investment Adviser LLP और कुल 68 संस्थाएं/व्यक्ति इस सूची में हैं.

SEBI ने कहा कि इन सभी को बार-बार जानकारी दी गई, लेकिन फीस जमा न करने की वजह से पंजीकरण समाप्त करना पड़ा.

क्या कहते हैं SEBI के नियम?

SEBI के Investment Advisers (IA) Rules के अनुसार, हर रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर को हर 5 साल में रिन्यूअल फीस जमा करनी होती है. यह कदम इसलिए जरूरी होता है ताकि सलाहकार लगातार नियमों का पालन करते रहें और निवेशकों को सही सेवा मिलती रहे.

क्यों हुई कार्रवाई?

SEBI ने फरवरी से जून 2024 के बीच इन सभी 68 संस्थाओं को शो-कॉज नोटिस भेजे थे. इनमें पूछा गया था कि रिन्यूअल फीस क्यों नहीं जमा की गई और मान्यता क्यों न रद्द की जाए. लेकिन कई चेतावनियों और नोटिसों के बाद भी जब फीस जमा नहीं की गई, तो SEBI ने कार्रवाई को अंतिम रूप दिया.

SEBI ने कहा कि इन संस्थाओं की मान्यता पहले ही एक्सपायर हो चुकी थी. अगर इनका पंजीकरण रद्द नहीं किया जाता, तो इससे निवेशकों को भ्रम हो सकता था और कुछ सलाहकार पुराने रजिस्ट्रेशन का दुरुपयोग कर सकते थे, जिससे निवेशकों को धोखा होने का खतरा रहता. इसलिए SEBI ने स्पष्ट कहा कि निवेशकों को गुमराह होने से बचाने के लिए पंजीकरण रद्द करना जरूरी था.

निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?

इस कार्रवाई के बाद अब ये 68 एडवाइजर्स किसी भी निवेशक को वित्तीय सलाह, पोर्टफोलियो मार्गदर्शन, निवेश से जुड़े दस्तावेज, ट्रेडिंग/फंड मैनेजमेंट जैसे कोई भी सेवा पेशेवर रूप से नहीं दे सकते. निवेशकों को अब सलाह दी जाती है कि वे केवल SEBI-registered active advisors से ही मार्गदर्शन लें.

FAQs

1. SEBI ने 68 इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की मान्यता क्यों रद्द की?
क्योंकि उन्होंने रिन्यूअल फीस जमा नहीं की और कई नोटिसों के बाद भी जवाब नहीं दिया.

2. क्या ये सलाहकार अब निवेश सलाह दे सकते हैं?
नहीं, इनका SEBI पंजीकरण रद्द हो चुका है.

3. निवेशक कैसे जांचें कि कोई एडवाइजर SEBI-registered है?
निवेशक SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच कर सकते हैं.

4. रिन्यूअल फीस कितने समय बाद देनी होती है?
हर 5 साल में.

5. क्या यह कार्रवाई निवेशकों की सुरक्षा के लिए थी?
हां, SEBI का कहना है कि रद्द किए गए सर्टिफिकेट का गलत इस्तेमाल करके निवेशकों को गुमराह किया जा सकता था.

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