SEBI की बोर्ड मीटिंग; 6 बड़े फैसलों को मंजूरी, निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों को जरूर पता होने चाहिए

सेबी की बोर्ड मीटिंग हुई. 6 बड़े और अहम फैसले लिए गए. निवेशक और बाजार से जुड़े लोगों को इन फैसलों के बारे में जरूर पता होना चाहिए.
SEBI की बोर्ड मीटिंग; 6 बड़े फैसलों को मंजूरी, निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों को जरूर पता होने चाहिए

SEBI Meeting: मार्केट रेगुलेटर SEBI (सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) की आज अहम मीटिंग हुई. सेबी की बोर्ड मीटिंग कई बड़े फैसले लिए. SEBI ने AIF स्कीम बंद करने और रजिस्ट्रेशन सरेंडर से लेकर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट जैसी सिफारिशों को मंजूरी दी है. ज़ी बिजनेस की ओर से दिखाई गई कई खबरों पर मुहर लगी. ज़ी बिजनेस ने 18 मार्च को कुछ खबरें चलाई थीं, जिन पर इस बोर्ड बैठक में फैसला लिया गया है.

सेबी ने निवेशकों से लेकर बाजार के हितधारकों तक के लिए कई बड़े और अहम फैसले लिए. सेबी की बोर्ड बैठक में आपके लिए क्या खास निकला, इस खबर में इसकी जानकारी दी गई है.

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SEBI: 6 बड़े और अहम फैसले

SEBI

पहला फैसला - AIFs में बड़ी राहत

अब AIF अपनी स्कीम खत्म होने के बाद भी कुछ शर्तों के साथ पैसा (liquidation proceeds) अपने पास रख सकते हैं.

पहले नियम क्या था?

  • फंड खत्म होते ही पूरा पैसा निवेशकों को देना जरूरी था
  • बैंक अकाउंट बैलेंस शून्य (NIL) करना होता था
  • तभी रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर सकते थे

समस्या क्या थी?

  • टैक्स, केस या अन्य खर्च बाकी रहने पर पैसा रोकना पड़ता था
  • लेकिन नियम इसकी अनुमति नहीं देते थे
  • इसलिए फंड्स को बिना काम के भी एक्टिव रहना पड़ता था

अब क्या राहत मिली है?

AIF अब इन 3 स्थितियों में पैसा अपने पास रख सकते हैं:

1. केस या टैक्स नोटिस

अगर कोई कानूनी केस या टैक्स डिमांड (जैसे नोटिस) आया है

2. निवेशकों की मंजूरी

अगर 75% निवेशक (वैल्यू के हिसाब से) सहमत हैं

3. ऑपरेशनल खर्च

जरूरी खर्चों के लिए (बिल/डेटा के आधार पर), अधिकतम 3 साल तक

दूसरा फैसला - FPIs के लिए नेट सेटलमेंट की मंजूरी

सेबी ने Foreign Portfolio Investors (FPI) के लिए बड़ा राहत कदम उठाते हुए कैश मार्केट में फंड्स के नेट सेटलमेंट की अनुमति दे दी है. अभी तक FPIs को अपने सभी सौदों का सेटलमेंट ग्रॉस बेसिस पर करना पड़ता था, जिससे उन्हें ज्यादा फंडिंग कॉस्ट और फॉरेक्स से जुड़ी लागत उठानी पड़ती थी. नए नियम के तहत अब ऐसे सौदों में, जहां एक ही सेटलमेंट साइकिल में खरीद या बिक्री (आउट्राइट ट्रांजैक्शन) होती है, वहां नेट सेटलमेंट की सुविधा मिलेगी, जिससे खरीद और बिक्री की रकम आपस में एडजस्ट हो सकेगी.

हालांकि सिक्योरिटीज का सेटलमेंट पहले की तरह ग्रॉस बेसिस पर ही होगा और STT व स्टांप ड्यूटी भी लागू रहेंगे. इस बदलाव से खासतौर पर इंडेक्स रीबैलेंसिंग जैसे समय में FPIs की लागत कम होगी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी. जरूरी सिस्टम बदलावों के बाद यह नियम 31 दिसंबर 2026 तक लागू कर दिया जाएगा.

तीसरा फैसला - SIFs में निवेश आसान

सेबी ने Social Impact Fund (SIF) में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़ा बदलाव किया है. अब AIF के इस फंड में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि ₹2 लाख से घटाकर सिर्फ ₹1,000 कर दी गई है. इस फैसले का मकसद ज्यादा से ज्यादा छोटे निवेशकों को Social Stock Exchange से जोड़ना है. \

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साथ ही, यह नियम जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट्स के न्यूनतम निवेश मानक के साथ भी मेल खाता है, जिससे निवेश प्रक्रिया और आसान होगी. SEBI का मानना है कि इस बदलाव से सोशल इम्पैक्ट से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ेगा और फंडिंग को नया आधार मिलेगा.

चौथा फैसला - InvITs और REITs पर फोकस

सेबी ने InvITs और REITs के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के मकसद से नियमों में कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है. अब InvITs को प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद भी SPV में निवेश बनाए रखने की अनुमति दी गई है, ताकि लंबित दावों, टैक्स या कानूनी प्रक्रियाओं के चलते तुरंत एग्जिट का दबाव न रहे. साथ ही, इन ट्रस्ट्स को अब फंड्स के अस्थायी निवेश के लिए कम जोखिम वाले लिक्विड म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने की ज्यादा छूट दी गई है.

प्राइवेटली लिस्टेड InvITs को भी अब ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सीमित निवेश (10% तक) की अनुमति मिलेगी, जिससे उनके लिए नए अवसर खुलेंगे. SEBI ने यह साफ किया है कि ज्यादा लीवरेज (49% से 70%) वाले InvITs अब कुछ शर्तों के साथ कैपेक्स, मेंटेनेंस और पुराने कर्ज के रीफाइनेंस के लिए नया कर्ज ले सकेंगे. इन बदलावों का मकसद ऑपरेशनल दिक्कतों को कम करना, निवेश के विकल्प बढ़ाना और सेक्टर को ज्यादा लचीला बनाना है.

पांचवां फैसला - “Fit and Proper Person” नियमों में बदलाव

सेबी ने “Fit and Proper Person” नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है, ताकि एक तरफ बाजार में ईमानदार और विश्वसनीय लोगों की भागीदारी बनी रहे और दूसरी तरफ Ease of Doing Business भी सुनिश्चित हो सके. नए नियमों के तहत अब केवल FIR या आपराधिक शिकायत दर्ज होना किसी व्यक्ति को अपने आप अयोग्य नहीं बनाएगा, बल्कि हर मामले को अलग-अलग आधार पर देखा जाएगा.

आर्थिक अपराध या सिक्योरिटीज कानूनों से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने पर अयोग्यता लागू रहेगी. SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को ‘fit and proper’ न मानने से पहले उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा.

छठा फैसला - Conflict of Interest पर सख्ती

  • High-Level Committee (HLC) की सिफारिशें मंजूर
  • चेयरमेन और WTMs पर भी ट्रेडिंग रिस्ट्रिक्शन लागू
  • पूल्ड व्हीकल्स में निवेश की सशर्त अनुमति
  • ज्वाइनिंग पर निवेश के लिए 4 विकल्प – sell, freeze या plan के तहत एग्जिट
  • अनलिस्टेड इन्वेस्टमेंट को लिक्विड/फ्रीज करना अनिवार्य
  • Chairman और WTMs को ‘Insider’ की परिभाषा में शामिल किया गया
  • ‘Family’ की परिभाषा स्पष्ट और विस्तारित
  • फ्यूचर जॉब नेगोशिएशन की जानकारी देना अनिवार्य
  • कॉन्फ्लिक्ट रिपोर्टिंग के लिए डिजिटल सिस्टम और whistleblower फ्रेमवर्क
  • Assets & liabilities का डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क सख्त
  • सीनियर ऑफिशियल्स की संपत्ति सार्वजनिक करने का प्रावधान
  • Ethics & Compliance Office (OEC) की स्थापना होगी
  • Spouse और डिपेंडेंट फैमिली पर भी निवेश नियम लागू
  • Single intermediary में निवेश की 25% सीमा तय
  • SEBI अधिकारियों के लिए डिस्क्लोजर नॉर्म्स कड़े
  • Recusal फ्रेमवर्क लागू, conflict मामलों में दूरी जरूरी
  • कॉन्फ्लिक्ट ट्रैकिंग के लिए डिजिटल सिस्टम लागू होगा
  • बोर्ड मेंबर्स के नियमों पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार लेगी
  • ओवरसाइट कमिटी बनाने का प्रस्ताव
  • सेबी सर्विस रूल्स और 2008 कोड में बदलाव होंगे

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