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SEBI बोर्ड बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला.
जी बिजनेस एक्सक्लूसिव: भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर SEBI की अगली बोर्ड बैठक से जुड़ी एक बड़ी खबर निकलकर आ रही है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बार की मीटिंग में कुछ ऐसे क्रांतिकारी फैसलों पर मुहर लग सकती है, जो बाजार के पूरे ईकोसिस्टम को बदल कर रख देंगे.
एक तरफ जहां पारदर्शिता बढ़ाने के लिए SEBI अपने ही घर के 'भेद' खोलने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों के लिए रेड कार्पेट बिछाने का पूरा प्लान तैयार है. यह सिर्फ एक रेगुलेटरी मीटिंग नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला एक बड़ा कदम साबित होने वाला है.
बाजार में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए SEBI अब अपने ही घर से बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकता है. खबर है कि 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' को रोकने के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है. इसके तहत SEBI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ED) और उनसे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को अपने निवेश की जानकारी सार्वजनिक करनी पड़ सकती है.
अभी तक यह जानकारी सिर्फ विभाग के अंदर ही साझा की जाती थी, लेकिन अब इसे पब्लिक डोमेन में लाने की तैयारी है. नियमों का पालन और सख्ती से हो, इसके लिए SEBI के भीतर एक अलग ED ऑफिस बनाने पर भी विचार किया जा रहा है.
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए भारत में कारोबार करना अब और भी किफायती हो सकता है. बोर्ड बैठक में 'फंड नेटिंग' को मंजूरी देने का प्रस्ताव है. इसका मतलब यह है कि निवेशकों को अब पे-इन और पे-आउट को आपस में एडजस्ट करने की अनुमति मिल सकती है. इससे न सिर्फ उनकी लिक्विडिटी बेहतर होगी, बल्कि ट्रांजैक्शन की लागत यानी कॉस्ट मैनेजमेंट में भी बड़ी राहत मिलेगी. यह कदम भारतीय बाजार को वैश्विक निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बना सकता है.
अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) के निवेशकों के लिए भी कुछ अच्छी खबरें निकलकर आ सकती हैं. फंड को बंद करने यानी स्कीम विंड-अप और सरेंडर करने के नियमों को आसान बनाने पर चर्चा हो सकती है. इसके अलावा, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के लिए भी ढील देने की तैयारी है. खास तौर पर स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) में निवेश के नियमों को लचीला बनाया जा सकता है, जिससे इन सेक्टर्स में निवेश का फ्लो बढ़ेगा.
SEBI अपनी पात्रता मानदंडों यानी 'फिट एंड प्रॉपर' नियमों की भी समीक्षा कर सकता है. इसमें खुलासे और योग्यता से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावना है ताकि बाजार की शुद्धता बनी रहे. साथ ही, समाज की भलाई से जुड़े 'सोशल इम्पैक्ट फंड्स' को बढ़ावा देने के लिए AIF के तहत न्यूनतम निवेश की सीमा में भी ढील दी जा सकती है. इससे छोटे और सामाजिक सरोकार वाले निवेशकों को इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने का मौका मिलेगा.
Q: SEBI के अधिकारियों के लिए निवेश के नियमों में क्या बदलाव हो सकता है?
A: SEBI के ED और उससे ऊपर के अधिकारियों को अब अपने निवेश का पब्लिक डिस्क्लोजर यानी सार्वजनिक खुलासा करना पड़ सकता है, जो अब तक केवल आंतरिक स्तर पर होता था.
Q: विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए फंड नेटिंग से क्या फायदा होगा?
A: फंड नेटिंग की अनुमति मिलने से विदेशी निवेशकों को पे-इन और पे-आउट को एडजस्ट करने की सुविधा मिलेगी, जिससे उनका लिक्विडिटी और कॉस्ट मैनेजमेंट बेहतर होगा.
Q: AIF निवेशकों को बोर्ड बैठक से क्या राहत मिल सकती है?
A: AIF निवेशकों के लिए स्कीम को बंद करने (wind-up) और सरेंडर करने के नियमों को आसान बनाने पर विचार किया जा रहा है.
Q: REITs और InvITs के लिए क्या प्रस्ताव है?
A: इन ट्रस्टों के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी SPV में निवेश करने के नियमों में ढील दी जा सकती है.
Q: क्या सोशल इम्पैक्ट फंड्स से जुड़े नियमों में भी बदलाव होगा?
A: हां, सोशल इम्पैक्ट फंड्स को बढ़ावा देने के लिए AIF के तहत जो न्यूनतम निवेश (minimum investment) के नियम हैं, उनमें ढील दी जा सकती है.