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इतिहास में पहली बार रुपया 94 के नीचे फिसला है. (फाइल फोटो)
डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 94 के नीचे फिसला है. शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 17 पैसे कमजोर होकर 94.15 के स्तर पर खुला है जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर. ईरान युद्ध के कारण क्रूड ऑयल प्राइस हाई है. भारत जरूरत का करीब 85% क्रूड आयात करता है. नतीजन बढ़ते इंपोर्ट बिल से रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटिजिस्ट वीके विजय कुमार ने कहा कि ईरान क्राइसिस बरकरार है और FPI की तरफ से लगातार बिकवाली जारी है जिसने रुपए पर दबाव बनाकर रखा है. बीच-बीच में RBI की तरफ से भी रुपए को संभालने की कोशिश होती है और क्रूड का भाव भी अपने हाई से निचे आया है, इसके बावजूद FPI आउटफ्लो मेंटेन रहने से रुपए में लगातार गिरावट आ रही है.
HDFC सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा कि भारतीय बाजार में रिबाउंड आने के बावजूद रुपए पर दबाव बना हुआ है. इसका सबसे बड़ा कारण FPI आउटफ्लो है. मार्च के महीने में FPI की तरफ से अब तकरीब 11 बिलियन डॉलर की बड़ी बिकवाली की गई है. बिकवाली का यह ट्रेंड दिखा रहा है कि विदेशी निवेशक मैक्रो इकोनॉमिक सिचुएशन को लेकर चिंतित दिख रहे हैं.
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एम्बिट कैपिटल ने कहा कि रुपए में 6-7% तक की गिरावट आ सकती है. अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली और क्रूड का भाव 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है तो रुपया डॉलर के मुकाबले 97.5/98.9 के स्तर तक फिसल सकता है. रुपए के लिए पॉजिटिव फैक्टर की बात करें तो बीच-बीच में RBI की तरफ से डॉलर की सेलिंग कर इसे सपोर्ट करने का प्रयास किया जाता है.