डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 94 के नीचे फिसला, जानिए और कितनी गिरावट आ सकती है

रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है. शुक्रवार को पहली बार डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94 के नीचे फिसल गया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल प्राइस में तेजी और FPIs की लगातार बिकवाली से रुपए पर दबाव बना हुआ है.
डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 94 के नीचे फिसला, जानिए और कितनी गिरावट आ सकती है

इतिहास में पहली बार रुपया 94 के नीचे फिसला है. (फाइल फोटो)

डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 94 के नीचे फिसला है. शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 17 पैसे कमजोर होकर 94.15 के स्तर पर खुला है जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर. ईरान युद्ध के कारण क्रूड ऑयल प्राइस हाई है. भारत जरूरत का करीब 85% क्रूड आयात करता है. नतीजन बढ़ते इंपोर्ट बिल से रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटिजिस्ट वीके विजय कुमार ने कहा कि ईरान क्राइसिस बरकरार है और FPI की तरफ से लगातार बिकवाली जारी है जिसने रुपए पर दबाव बनाकर रखा है. बीच-बीच में RBI की तरफ से भी रुपए को संभालने की कोशिश होती है और क्रूड का भाव भी अपने हाई से निचे आया है, इसके बावजूद FPI आउटफ्लो मेंटेन रहने से रुपए में लगातार गिरावट आ रही है.

ईरान क्राइसिस के बाद रुपए का हाल

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  • पहली बार निकला 94/$ के पार
  • युद्द की शुरुआत से अबतक डॉलर के सामने 3 रुपए फिसला
  • FY 2025-26 (April-March) के बीच रुपया 9.5% फिसला
  • FY 2013-14 के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन (-10.5%)
  • लगातार छठे हफ्ते गिरा रुपया
  • इस साल YTD 5.2% से ज्यादा कमजोर
  • दुनिया की बड़ी करेंसी में सबसे कमजोर

इस गिरावट का कारण क्या है?

  • मिडिल ईस्ट में तनाव से कच्चे तेल में उबाल का असर
  • युद्द की शुरुआत से अबतक क्रूड 33% महंगा
  • ब्रेंट क्रूड $100 के ऊपर बरकरार
  • इस महीने दूसरी बार इंट्राडे में निकला $119 के ऊपर
  • हर $10 की बढ़त से CAD GDP करीब 0.5% से बढ़ता है
  • मजबूत डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की दोहरी मार
  • दुनिया की बड़ी करेंसीज में गिरावट का भी असर
  • FIIs की कैश इक्विटी में इस महीने 1.07 लाख करोड़ की बिकवाली
  • अप्रैल 2006 के बाद सबसे बड़ी बिकवाली हुई है
  • लगातार 9वें महीने विदेशी निवेशको की बिकवाली जारी

FPI की बिकवाली सबसे बड़ी वजह

HDFC सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा कि भारतीय बाजार में रिबाउंड आने के बावजूद रुपए पर दबाव बना हुआ है. इसका सबसे बड़ा कारण FPI आउटफ्लो है. मार्च के महीने में FPI की तरफ से अब तकरीब 11 बिलियन डॉलर की बड़ी बिकवाली की गई है. बिकवाली का यह ट्रेंड दिखा रहा है कि विदेशी निवेशक मैक्रो इकोनॉमिक सिचुएशन को लेकर चिंतित दिख रहे हैं.

आउटलुक क्या है

  • Bernstein- 98 तक फिसल सकता है रुपया
  • Societe Generale- 96 तक फिसल सकता है रुपया
  • BofA- 86 तक फिसल सकता है रुपया
  • ING Bank- 87 तक फिसल सकता है रुपया

कहां से आ सकती है पॉजिटिव खबर?

एम्बिट कैपिटल ने कहा कि रुपए में 6-7% तक की गिरावट आ सकती है. अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली और क्रूड का भाव 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है तो रुपया डॉलर के मुकाबले 97.5/98.9 के स्तर तक फिसल सकता है. रुपए के लिए पॉजिटिव फैक्टर की बात करें तो बीच-बीच में RBI की तरफ से डॉलर की सेलिंग कर इसे सपोर्ट करने का प्रयास किया जाता है.

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