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रुपए में गिरावट का सिलसिला जारी है. गुरुवार को रुपया 54 पैसे टूटकर 90.48 प्रति अमेरिकी डॉलर पर आ गया और अंत में 40 पैसे कमजोर होकर 90.37 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ. दरअसल खबर आई कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील मार्च 2026 से पहले फाइनल होने की उम्मीद नहीं है. इस खबर के सामने आने के बाद रुपए में जोरदार बिकवाली देखी गई. एक्सपर्ट का मानना है कि और गिरावट आ सकती है.
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील मार्च 2026 तक पूरा हो सकती है. FY27 के लिए भारत की अर्थव्यवस्था का आउटलुक मजबूत है. साथ में उन्होंने भारतीय रुपए को अंडर वैल्युड भी बताया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अगले साल मार्च तक संपन्न होने की संभावना जताए जाने से निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी.
इसके अलावा आयातकों की तरफ से डॉलर की मजबूत मांग और वैश्विक बाजार में बढ़े उतार-चढ़ाव ने भी रुपए पर दबाव बनाया. अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपए 89.95 पर शुरुआत की, लेकिन जल्दी ही कमजोर होकर 90.48 के स्तर तक गिर गया. बुधवार को यह 89.87 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, “CEA की टिप्पणी के बाद रुपए में तेज गिरावट आई. मेक्सिको द्वारा भारत एवं अन्य एशियाई देशों से आयात पर 50 फीसदी तक शुल्क लगाने की घोषणा ने भी बाजार धारणा को प्रभावित किया. इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भी हाई बॉन्ड यील्ड के कारण डेट बाजार से बिकवाली की.”
HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च ऐनालिस्ट राकेश परमार ने कहा कि आयातकों की तरफ से डॉलर की मजबूत डिमांड है जिसके कारण रुपए पर दबाव देखा जा रहा है. ग्लोबली मेटल्स के प्राइस बढ़ रहे हैं जिसके कारण मेटल इंपोर्टर की तरफ से जल्दबाजी में खरीदारी की जा रही है. फिलहाल RBI की तरफ से इसमें दखल नहीं दिया जा रहा है. टेक्निकल लिहाज से 90.70 पर रुपए का इमीडिएट रेसिसटेंस है. अब इंपोर्टेंट सपोर्ट शिप्ट होकर 90.10 पर आ गया है जो पहले 89.70 पर था. सपोर्ट में आए बदलाव से साफ पता चलता है कि आगे और गिरावट आ सकती है.
(भाषा इनपुट के साथ)