रिकॉर्ड स्तर पर फिसला रुपया, जानिए वो 5 फैक्टर्स जो भारतीय रुपए पर बना रहे दबाव; और कितना फिसलेगा?

डॉलर के मुकाबले रुपया आज 92.43 के न्यू रिकॉर्ड स्तर पर फिसल गया. जानिए रुपए में गिरावट के 5 प्रमुख कारण कौन से हैं और आने वाले समय में रुपए में कहां तक गिरावट आ सकती है. बता दें कि ईरान युद्ध से अब तक रुपया करीब 1.5% कमजोर हो चुका है.
रिकॉर्ड स्तर पर फिसला रुपया, जानिए वो 5 फैक्टर्स जो भारतीय रुपए पर बना रहे दबाव; और कितना फिसलेगा?

Dollar vs rupees.

मिडिल ईस्ट क्राइसिस के कारण भारत रुपए पर भारी दबाव देखा जा रहा है. शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपए 24 पैसे टूटकर 92.43 के न्यू रिकॉर्ड लो पर फिसल गया है. रुपए पर इस समय चौतरफा दबाव देखा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि अगर ईरान यु्द्ध लंबा खिचता है तो यह गिरावट जारी रहेगी और आने वाले समय में रुपया 95 के स्तर तक भी फिसल सकता है.

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क्यों कमजोर हो रहा है रुपया?

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LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी एक्सपर्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि ऑयल प्राइस मूवमेंट रुपए पर सबसे बुरा असर दिखा रहा है. क्रूड में तेजी से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा जो आने वाले समय में रुपए पर और दबाव दिखाएगा. एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च ऐनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा कि रुपए के लिए 92.50 पर रेसिसटेंस है जबकि डाउनसाइड प्रोटेक्शन 91.60 पर है.

95 के स्तर तक गिरावट संभव

इलारा कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ईरान क्राइसिस के कारण क्रूड में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है. इस समय क्रूड का भाव 100 डॉलर के पार पहुंच गया है. ब्रोकरेज ने कहा कि अगर यह युद्ध लंबा खिचता है तो क्रूड में तेजी बनी रहेगी. अगर FY27 के लिए क्रूड का औसत भाव 100 डॉलर प्रति बैरल रहता है तो डॉलर के मुकाबले रुपया 94-95 के स्तर तक फिसल सकता है.

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100-120 डॉलर क्रूड से रुपए पर कितना असर?

CareEdge रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अगर FY27 में क्रूड का औसत भाव 100 डॉलर प्रति बैरल रहता है तो रुपया 91-93 के दायरे में रहेगा. वहीं, अगर क्रूड का भाव 100-120 डॉलर की रेंज में पहुंचता है तो रुपया 93-95 के स्तर तक फिसल सकता है. इस परिस्थिति में भारत का जीडीपी ग्रोथ 70 bps तक घट सकता है.

FIIs की बिकवाली से भी रुपए पर दबाव

रुपए पर दबाव का एक और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से लगातार बिकवाली है. मार्च महीने में अब तक FIIs की तरफ से 46000 करोड़ रुपए से अधिक की बिकवाली की जा चुकी है. हालांकि, DIIs की तरफ से 60500 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी भी हुई है. जून 2025 के बाद से लगातार विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं.

  • रुपया अगले एक साल में 6-7.5% तक और कमजोर हो सकता है
  • डॉलर के मुकाबले 97.5-98.9 के स्तर तक फिसल सकता है रुपया
  • आने वाले समय में रुपए को संभालने में RBI का एक्शन महत्वपूर्ण रहेगा

7.5% तक और कमजोर हो सकता है रुपया

एंबिट कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सिमुलेशन मॉडल के आधार पर रुपया अगले एक साल में 6-7.5% तक और कमजोर हो सकता है. क्रूड में तेजी के कारण कैपिटल फ्लो में कमी आएगी और ट्रेड डेफिसिट बढ़ेगा जिसके कारण रुपए पर डबल दबाव आता है. अगर क्रूड ऑयल 90-110 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में रहता है तो रुपया डॉलर के मुकाबले 97.5-98.9 के स्तर तक फिसल सकता है. हालांकि, RBI की तरफ से फिर से दखल दिया जा रहा है. डॉलर बेचकर रुपए को सपोर्ट करने की कोशिश हो रही है. आने वाले समय में सेंट्रल बैंक का एक्शन महत्वपूर्ण रहेगा.

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