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रुपया आज भी नए लो पर पहुंचा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AI/ChatGPT)
Why is Rupee Falling: भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है और सोमवार को ये एक बार फिर से डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंच गया. सुबह के कारोबार में रुपया गिरकर 96.21 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा. यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र है जब रुपये ने नया ऑल टाइम लो बनाया है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भारतीय करेंसी पर दबाव और बढ़ा दिया है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है. ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, उसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर पड़ता है. इस बार भी यही देखने को मिल रहा है. ईरान युद्ध के बाद से रुपया करीब 5.5% कमजोर हो चुका है और एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है.
रुपये पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों से आ रहा है. ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. तेल महंगा होने का मतलब है कि भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे. इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है. डॉलर इंडेक्स 99.40 के लेवल पर पहुंच गया है.
इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल बना दिया है. निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भाग रहे हैं और अमेरिकी डॉलर में पैसा डाल रहे हैं. यही वजह है कि डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है और उभरते बाजारों की करेंसी दबाव में हैं.
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एक और बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी है. US 10-year Treasury yield 4.6% के ऊपर पहुंच गई है, जो करीब एक साल के ऊंचे स्तर पर है. जब अमेरिका में बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की तरफ शिफ्ट करते हैं. इससे भारतीय बाजारों और रुपये दोनों पर दबाव आता है.
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ट्रेडर्स के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक लगातार बाजार में दखल दे रहा है ताकि रुपये की गिरावट बहुत तेज न हो. जानकारी है कि शुक्रवार को भी RBI ने डॉलर बेचकर रुपये को 96 के ऊपर से वापस नीचे लाने की कोशिश की थी.
हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और ग्लोबल तनाव कम नहीं होता, तो RBI सिर्फ गिरावट की रफ्तार को कंट्रोल कर पाएगा, पूरी तरह रोक नहीं पाएगा.
रुपये की कमजोरी का असर सीधे शेयर बाजार पर भी दिख सकता है. जिन कंपनियों का कच्चे तेल या आयात पर ज्यादा खर्च है, उन पर दबाव बढ़ सकता है. एयरलाइन, पेंट, केमिकल और ऑटो सेक्टर की कंपनियों के मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं.
वहीं IT और फार्मा कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है. कमजोर रुपया इनके निर्यात कारोबार के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ने का भी खतरा है. अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रहती है तो FIIs भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है.
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रुपये की कमजोरी का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा. आयात महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहेगा. इलेक्ट्रॉनिक्स, गोल्ड और विदेश से आने वाले कई सामान महंगे हो सकते हैं.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर क्यों पहुंचा?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया तनाव, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से रुपये पर दबाव बढ़ा है.
Q2 कमजोर रुपये से किन सेक्टर्स को नुकसान हो सकता है?
एयरलाइन, पेंट, ऑटो और तेल पर निर्भर कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ सकता है क्योंकि उनका आयात खर्च बढ़ जाता है.
Q3 क्या कमजोर रुपया IT कंपनियों के लिए अच्छा है?
हां, IT और फार्मा जैसी निर्यात आधारित कंपनियों को फायदा हो सकता है क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है.
Q4 RBI रुपये को कैसे संभालता है?
RBI बाजार में डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को कंट्रोल करने की कोशिश करता है ताकि करेंसी में ज्यादा अस्थिरता न आए.
Q5 आम लोगों पर इसका क्या असर होगा?
अगर रुपया लगातार कमजोर रहता है तो पेट्रोल, गोल्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई आयातित सामान महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ सकती है.