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Rupee: कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और डॉलर की बढ़ती मांग के बीच सोमवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 92.20 पर खुला और गिरकर 92.52 प्रति डॉलर के नए ऑल-टाइम लो तक पहुंच गया.
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल से रुपये पर दबाव बढ़ा है. सोमवार को क्रूड की कीमतें करीब 25% बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं, जिससे तेल आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ गई.
करेंसी एक्सपर्ट के. एन. डे के अनुसार रुपया शुक्रवार के बंद स्तर के मुकाबले करीब 46 पैसे की गिरावट के साथ खुला. उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों और आयातकों की ओर से डॉलर की मजबूत मांग बनी हुई है, जिसकी वजह से रुपये पर दबाव है. हालांकि जरूरत पड़ने पर RBI की दखलअंदाजी बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोक सकती है.
वहीं Enrich Money के CEO पोनमुदी आर का कहना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महंगे क्रूड की वजह से USD/INR जोड़ी नए रिकॉर्ड स्तरों के आसपास कारोबार कर रही है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल सप्लाई रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे क्रूड महंगा हुआ है और निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर बढ़ रहे हैं.
तकनीकी नजरिए से भी फिलहाल डॉलर मजबूत स्थिति में दिख रहा है. चार्ट पर लगातार ऊंचे हाई और ऊंचे लो बन रहे हैं, जो डॉलर के पक्ष में ट्रेंड को मजबूत बताते हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर USD/INR 92.30–92.32 के ऊपर टिकता है, तो इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है. वहीं नीचे की तरफ 91.90–92.00 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है. इसके नीचे जाने पर थोड़ी मुनाफावसूली या RBI की संभावित दखल देखने को मिल सकती है.
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है.