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SEBI के बड़े एक्शन के बाद टूटा जेम्स और ज्वेलरी सेगमेंट का ये शेयर, जानें डीटेल्स (फाइल फोटो)
जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर की लिस्टेड कंपनी Rajesh Exports पर मार्केट रेगुलेटर सेबी ने बड़ा एक्शन लिया. सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने इस कंपनी के खिलाफ 109 पेज का अंतरिम आदेश जारी किया है, जिसमें कंपनी की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया गया है.
इस कार्रवाई का असर कंपनी के शेयर पर भी दिखाई दिया और 5 जून 2026 को स्टॉक 5% के लोअर सर्किट के साथ कारोबार करता नजर आया. 4 जून को कंपनी का शेयर करीब 104 रुपए के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन SEBI के आदेश के बाद निवेशकों की ओर से दबाव देखने को मिला.
SEBI के मुताबिक यह जांच 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 की अवधि को कवर करती है. जांच की शुरुआत शेयरधारकों की ओर से वित्तीय आंकड़ों में कथित गड़बड़ी और गलत प्रस्तुतीकरण की शिकायत मिलने के बाद की गई. जांच के दौरान नियामक ने कंपनी की अकाउंटिंग पद्धतियों, वित्तीय खुलासों और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन की समीक्षा की.
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SEBI के अंतरिम आदेश के मुताबिक FY21 से FY25 के बीच कंपनी ने अपनी विदेशी सब्सिडियरी से करीब 15.45 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू दिखाया. हालांकि जांच में सामने आया कि इनमें से करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू को लेकर गंभीर सवाल उठे और इसे कथित तौर पर गलत तरीके से दिखाया गया.
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नियामक ने यह भी कहा कि कंपनी की कुल आय का लगभग 97-99% हिस्सा विदेशी सब्सिडियरी से दिखाया गया, लेकिन संबंधित वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए. SEBI ने दावा किया कि कंपनी ने मांगे जाने के बावजूद ग्राहकों, सप्लायर्स और देनदारों-लेनदारों (Debtors/Creditors) की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हुई.
आदेश में यह भी कहा गया कि कंपनी के फंड को कथित तौर पर प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं और निजी खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रमोटर स्तर पर गोल्ड डेरिवेटिव ट्रेडिंग की गतिविधियों की जांच की गई. इसके बाद SEBI ने प्रमोटर राजेश मेहता को शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने से रोक दिया.
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इसके अलावा कंपनी ने अफ्रीका में गोल्ड माइन में 1,035 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया था, लेकिन सत्यापन के दौरान नियामक को कथित निवेश के समर्थन में पर्याप्त जानकारी नहीं मिली.
SEBI की जांच में यह भी सामने आया कि करीब 11,400 करोड़ रुपये के गोल्ड खरीद-बिक्री रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे, जबकि संबंधित स्टॉकब्रोकर ने ऐसे लेनदेन से इनकार किया.
कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 54.55% है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों (FIIs) की हिस्सेदारी 14.26%, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की हिस्सेदारी 10.8% और पब्लिक शेयरहोल्डिंग 20.4% है.
| Duration | Change (%) |
| 1 हफ्ता | -14.22 |
| 1 महीना | -13.12 |
| 1 साल | -48.57 |
| 3 साल | -81.93 |
| 5 साल | -80.55 |
| 10 साल | -80.12 |
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