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भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते कई बड़े आर्थिक संकेतों से दिशा लेगा. इनमें सबसे अहम हैं Q2 FY26 GDP डेटा, IIP डेटा, ग्लोबल मार्केट का रुख और FII की खरीद-बिक्री. पिछले कुछ हफ्तों में बाजार ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और अब निवेशक आने वाले आर्थिक डेटा के आधार पर नई रणनीति तैयार कर रहे हैं.
निवेशकों की नजर इस हफ्ते जारी होने वाले दूसरे तिमाही (Q2) GDP आंकड़ों पर रहेगी. ये डेटा बताएगा कि अप्रैल-जून की तुलना में जुलाई-सितंबर की अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कैसा रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि GDP नंबर उम्मीदों के आसपास रहे तो बाजार में स्थिरता रहेगी, लेकिन कमजोर आंकड़े मिलते हैं तो इंडेक्स पर दबाव आ सकता है.
ग्लोबल मार्केट से इस समय संकेत बहुत साफ नहीं हैं. अमेरिका और यूरोप के बाजारों में मिश्रित रुझान देखने को मिल रहे हैं. साथ ही, अमेरिकी टेक कंपनियों में कमजोरी का असर भारतीय आईटी स्टॉक्स पर भी पड़ा है. एशियाई बाजारों में भी दुकान खुलते ही लगातार उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहे हैं.
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि ग्लोबल संकेत अभी क्लियर नहीं हैं, इसलिए निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए. उनके मुताबिक बैंकिंग, ऑटो, आईटी और कंजंप्शन सेक्टर में कमाई अच्छी दिखाई दे रही है, इसलिए इनमें निवेशक ज्यादा भरोसा दिखा सकते हैं.
पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों यानी FII की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है. कई दिनों में उन्होंने बिकवाली की, तो अचानक से खरीदारी शुरू कर दी. यह रुझान बाजार की चाल को प्रभावित करता है. विश्लेषकों का कहना है कि अगर FIIs की तरफ से लगातार खरीदारी आती है तो बाजार में मजबूती बनी रहेगी.
पिछले हफ्ते निफ्टी ने 26,000 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर मजबूती से क्लोज दिया. यह बाजार में बनी मजबूती और निवेशकों के भरोसे को दिखाता है. निफ्टी इस समय अपने 20-दिन, 50-दिन और 200-दिन के मूविंग एवरेज के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो कि एक मजबूत तकनीकी संकेत माना जाता है. चॉइस ब्रोकिंग की अमृता शिंदे के मुताबिक, जब तक निफ्टी इन प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर बना है, तब तक बाजार में तेजी का रुझान बना रह सकता है.
पिछला हफ्ता बाजार के लिए बेहतर रहा. निफ्टी 0.68% ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.50% बढ़ा. इसमें सबसे बड़ा योगदान Q2 की मजबूत कमाई, घटती महंगाई और भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत में आए सकारात्मक संकेतों का रहा. हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा. Nifty Midcap100 इंडेक्स 0.76% गिरा, जबकि Smallcap100 में 2.2% की भारी गिरावट आई.
आईटी सेक्टर पिछले हफ्ते सबसे बड़ा गेनर रहा, हालांकि अमेरिकी टेक बाजार की कमजोरी का असर कुछ कंपनियों पर दिखा. इसके अलावा ऑटो और सर्विस सेक्टर भी टॉप गेनर में शामिल रहे. लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अगर भारतीय रुपये पर दबाव जारी रहा तो आने वाले दिनों में मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है.
अजीत मिश्रा का कहना है कि इस समय ट्रेडिंग में बहुत सावधानी की जरूरत है. उन्होंने सलाह दी-
• एक्सपायरी के आसपास ज्यादा जोखिम न लें.
• बड़े आर्थिक डेटा आने से पहले वेट एंड वॉच रणनीति रखें.
• खरीदारी सिर्फ मजबूत सपोर्ट स्तरों पर ही करें.
• सेक्टर चुनते समय कमाई दिखाने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दें.
बाजार की दिशा इस सप्ताह कई चीजों पर निर्भर करेगी-
• Q2 GDP कैसा आता है.
• अमेरिका और एशियाई बाजार का रुख कैसा रहता है.
• डॉलर और रुपये की चाल कैसी रहती है.
• FII की खरीदारी बढ़ती है या नहीं.
जरूरी डेटा और ग्लोबल संकेत अगर मजबूत आते हैं तो बाजार में तेजी देखी जा सकती है. लेकिन अगर संकेत कमजोर मिलते हैं तो मुनाफावसूली और गिरावट की संभावना भी बरकरार है.
खबर से जुड़े FAQs
Q1. इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा किस पर निर्भर करेगी.
Q2 GDP डेटा, ग्लोबल संकेतों और FII की चाल पर.
Q2. निफ्टी के लिए 26,000 क्यों महत्वपूर्ण है.
यह बड़ा रेजिस्टेंस था, जिसके ऊपर क्लोज देना बाजार की मजबूती दिखाता है.
Q3. कौन-से सेक्टर इस समय मजबूत दिख रहे हैं.
बैंकिंग, ऑटो, आईटी और कंजंप्शन सेक्टर में कमाई बेहतर है.
Q4. पिछले हफ्ते मिडकैप और स्मॉलकैप क्यों गिरे.
कमजोर ग्लोबल संकेत और निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली का असर.
Q5. ट्रेडर्स को क्या रणनीति अपनानी चाहिए.
सपोर्ट लेवल के पास खरीदें और बड़े डेटा आने तक सावधानी रखें.