Published: 9:46 AM, Jun 3, 2025
|Updated: 9:58 AM, Jun 3, 2025
Trading vs Investing: वैसे अक्सर लोग ये ही सोचते हैं कि ट्रेडिंग और इनवेस्टिंग एक ही चीज होती हैं. लोगों के इसी भ्रम के कारण अक्सर वो ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनाकर जल्दी मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं, लेकिन सच ये है कि शेयर बाजार में पैसा कमाने के ये दो अलग-अलग ऑप्शन हैं.अगर आप शेयर बाजार से पैसा बनाना चाहते हैं, तो जरूर जानें कि ट्रेडिंग और इनवेस्टिंग में बुनियादी फर्क क्या है?
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आमतौर पर निवेशक ट्रेडिंग और इनवेस्टिंग को हमेशा एक जैसा ही समझे हैं ,लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,क्योंकि हकीकत में ट्रेडिंग और इनवेस्टिंग अलग अलग होते हैं. ये दोनों ही शेयर मार्केट में पैसा बनाने के दो बिल्कुल अलग रास्ते हैं. ऐसा मानते हैं कि ट्रेडिंग में जल्दी मुनाफा कमाने का फोकस किया जाता है, जबकि इनवेस्टिंग लॉन्ग टाइम के लिए पैसा बनाने पर फोकस होता है. अगर आप शेयर बाजार में सही दिशा चुनना चाहते हैं तो पहले इन दोनों के बीच का अंतर समझिए.
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आपको बता दें कि ट्रेडिंग का मतलब है शेयर, कमोडिटी या करेंसी जैसी फाइनेंशियल एसेट्स को थोड़े कम टाइम के लिए खरीदना और फिर बेच देना. वैसे इसका मकसद है शेयर मार्केट की घटती-बढ़ती कीमतों का फायदा उठाकर तुरंत मुनाफे को कमाना.
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जबकि इनवेस्टिंग की बात करें तो यह एक लॉन्ग टाइम की रणनीति होती है. इसमें लोग शेयर या बाकी एसेट्स को सालों या दशकों तक होल्ड करने का काम करते हैं. इनवेस्टिंग का काम होता है कि टाइम के साथ संपत्ति बनाना,कैपिटल ग्रोथ, डिविडेंड और कंपाउंडिंग के जरिए.
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ट्रेडिंग में बार-बार खरीद-बिक्री की जाती है, जिस वजह से शॉर्ट टर्म प्राइस मूवमेंट का बेनेफिट्स लिया जाता है.ट्रेडिंग में जोखिम ज्यादा होता है क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव खूब होता है. जबकि इनवेस्टिंग में शेयर या एसेट को लंबे टाइम तक होल्ड करते हैं, जिससे लॉन्ग टर्म ग्रोथ और डिविडेंड का बेनेफिट्स मिल जाता है. ट्रेडिंग जहां टेक्निकल एनालिसिस पर आधारित होती है तो इनवेस्टिंग फंडामेंटल एनालिसिस पर आधारित होती है.
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ट्रेडिंग में शेयरों को कुछ घंटों, कुछ दिनों या फिर चंद हफ्तों तक के लिए होल्ड किया जाता है. इस कम होल्डिंग के जरिए जल्दी मुनाफा कमाने के लिए मार्केट की चाल का बेनेफिट्स लिया जाता है.जबकि इनवेस्टिंग में निवेश कई सालों तक होल्ड रखते हैं, इस निवेश में निवेशक शॉर्ट टर्म गिरावट से घबराते नहीं और अपने इनवेस्टमेंट को समय देते हैं फ्यूचर में ग्रो करके फायदा पहुंचाए.
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एक तरफ ट्रेडिंग में लगातार खरीद-बिक्री होती है, जिस कारण से इसमें आपको कंपाउंडिंग का असली जादू नहीं मिलेगा. वहीं, इनवेस्टिंग में आप सालों तक निवेश बनाए रखते हैं , जिससे लॉन्ग टाइम में कंपाउंडिंग का तगड़ा फायदा आपको मिलता है.
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वैसे ट्रेडिंग में शेयर 1 साल से पहले बेच दिए दिए जाते हैं, इसी कारण से इनको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) मानते हैं और इनवेस्टिंग में आप शेयर 1 साल से ज्यादा समय के लिए रखते हैं और प्रॉफिट लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) में ये आता है.
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वैसे तो ये दोनों ही बाजार में निवेश का रूप हैं तो रिस्क दोनों में है और इसके अलावा आप अपनी सुविधा के हिसाब से किसी एक को चुनें. क्योंकि ट्रेडिंग में रिस्क ज्यादा रहता है तो अगर आप लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा चाहते हैं तो इनवेस्टिंग का ऑप्शन चुनिए.बाकी निवेश से पहले किसी जानकार से सलाह जरूर लें.