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होर्मुज स्ट्रेट 167 किमी लंबा संकरा समुद्री रास्ता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मिडिल ईस्ट में तनाव ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है. पहले आशंका थी कि होर्मुज स्ट्रेट बंद हो सकता है- जिससे तेल $120 प्रति बैरल तक जा सकता था. अब ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि फिलहाल जलमार्ग बंद करने का इरादा नहीं है.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
एक्सपर्ट्स अभी भी मान रहे हैं कि कच्चे तेल में तेजी का जोखिम बना हुआ है. इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम, सोना-चांदी की कीमत और शेयर बाजार पर दिख सकता है.
अगर यह पूरी तरह बंद हो जाता तो क्रूड $70 से सीधे $120 तक जा सकता था.
अब अनुमान $100 तक का लगाया जा रहा है.
1. टैंकरों पर हमले
2. इंश्योरेंस और शिपिंग लागत
युद्ध का मतलब है “वॉर रिस्क प्रीमियम”.
ये सब आखिरकार तेल की कीमत में जुड़ते हैं.
3. मार्केट में पैनिक
पेट्रोल-डीजल 4-5 रुपए तक महंगा?
अगर क्रूड $100 तक जाता है:
सरकार चाहें तो:
या चुनावी/आर्थिक कारणों से कीमतें स्थिर रख सकती है.
जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर “सेफ हेवन” में जाते हैं.
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का अनुमान:
युद्ध में गोल्ड की मांग बढ़ना ऐतिहासिक ट्रेंड है.
विदेशी निवेशक पहले से सावधान हैं. ऐसे में वोलैटिलिटी बढ़ना तय है.
दुनिया के प्रमुख ऑयल चोक पॉइंट्स:
इनमें होर्मुज सबसे बड़ा है- रोजाना 1.8 से 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है.
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सैद्धांतिक रूप से यह उसका सबसे बड़ा “जियोपॉलिटिकल हथियार” है.
लेकिन:
इसलिए फिलहाल यह आखिरी विकल्प माना जा रहा है.
सरकार पहले से बैकअप प्लान पर काम कर रही है.
यानी महंगाई दर ऊपर जा सकती है.
अगर आप:
Bottom Line
होर्मुज अभी बंद नहीं हुआ है. लेकिन खतरा टला भी नहीं है. अगर तनाव बढ़ता है, तो पेट्रोल-डीजल 4-5 रुपए महंगा, सोना ₹30,000 तक उछल सकता है, शेयर बाजार डगमगा सकता है, फिलहाल बाजार “वेट एंड वॉच” में है- लेकिन तैयारी रखना ही समझदारी है.
Q1. होर्मुज स्ट्रेट क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला प्रमुख तेल मार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है.
Q2. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत पर क्या असर पड़ता है?
ईंधन महंगा होता है, ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है और महंगाई पर दबाव आता है.
Q3. युद्ध के समय सोने की कीमत क्यों बढ़ती है?
निवेशक अस्थिरता में सुरक्षित निवेश विकल्प तलाशते हैं, इसलिए सोने की मांग बढ़ती है.
Q4. भारत कितना तेल आयात करता है?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85–90% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है.
Q5. पेट्रोल-डीजल की कीमत कौन तय करता है?
तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर रेट तय करती हैं, लेकिन टैक्स और नीतिगत फैसला सरकार के हाथ में होता है.
Q6. क्या भू-राजनीतिक तनाव शेयर बाजार को प्रभावित करता है?
हां, ऐसे समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है और निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर जाते हैं.