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ईरान-इजरायल युद्ध का मौजूदा तनाव भारत पर अब असर डालने लगा है. (Image Source- AI)
तेल और गैस क्षेत्र में आई हालिया रिपोर्ट ने निवेशकों और बाजार एक्सपर्ट्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है. नोमुरा के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर एटीएफ और डीजल क्रैक स्प्रेड में जो उछाल देखने को मिला है, वह न केवल अप्रत्याशित है बल्कि इसने रिफाइनिंग सेक्टर की पूरी गतिशीलता को बदल कर रख दिया है. एटीएफ की कीमतें अपने पुराने सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए दोगुने स्तर तक पहुंच गई हैं, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में नई बहस छेड़ दी है.
बाजार की इस बदली हुई चाल के बीच, प्राइवेट सेक्टर की बड़ी कंपनियों के लिए यह मौका एक सुनहरे अवसर की तरह है, जो आगामी तिमाही में अपने मुनाफे के आंकड़ों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती हैं. वहीं दूसरी ओर, OMCs के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है. रिफाइनिंग मार्जिन से होने वाला मुनाफा ईंधन विपणन के बढ़ते नुकसान के तले दब सकता है. आखिर ये आंकड़े बाजार को किस दिशा में ले जा रहे हैं और किन कंपनियों को सतर्क रहने की जरूरत है?
ईरान-इजरायल युद्ध का मौजूदा तनाव केवल एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा है. जहां एक तरफ बड़ी प्राइवेट रिफाइनिंग दिग्गज कंपनियां तेल के बढ़ते वैश्विक मार्जिन का लाभ उठाकर रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) बढ़ते मार्केटिंग घाटे और आपूर्ति श्रृंखला के संकट के बीच पिस रही हैं.
| एटीएफ क्रैक स्प्रेड | पुराना स्तर | $144 |
| डीजल क्रैक स्प्रेड | पुराना स्तर | $57 |
| सिंगापुर जीआरएम | $3.4 | $30 |
सबसे बड़ी चिंता का विषय होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है. यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारत के लिए केवल तेल के विकल्प खोजना ही काफी नहीं होगा, बल्कि रसोई गैस (LPG) और उर्वरक (Fertilizer) जैसे क्षेत्रों में सप्लाई शॉक का सामना करना पड़ सकता है.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)