शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी खबर! NSE के CEO ने बताया कब आएगा IPO और निवेश का क्या है सीक्रेट?

NSE के एमडी और सीईओ आशीष चौहान ने बाजार के भविष्य और बहुप्रतीक्षित NSE IPO पर बड़ा अपडेट दिया है. जानें निफ्टी के 25 हजार तक के सफर और निवेश की नई रणनीति के बारे में.
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी खबर! NSE के CEO ने बताया कब आएगा IPO और निवेश का क्या है सीक्रेट?

NSE के CEO ने बताया कब आएगा IPO और निवेश का क्या है सीक्रेट. (Image Source- AI)

शेयर बाजार में इस समय हर तरफ एक ही चर्चा है और वह है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का आने वाला IPO. निवेशकों के बीच इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है. इसी बीच NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ आशीष चौहान ने बाजार की मौजूदा स्थिति, भविष्य की संभावनाओं और सबसे खास तौर पर IPO को लेकर कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं. उनकी बातों से न सिर्फ बाजार की दिशा का पता चलता है, बल्कि यह भी समझ आता है कि एक आम निवेशक को लंबे समय में बाजार से कैसे फायदा मिल सकता है.

बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के बीच आशीष चौहान ने जिस तरह से निफ्टी के सफर को समझाया है, वह हर उस व्यक्ति के लिए आंखें खोलने वाला है जो रातों-रात अमीर बनने का सपना देखता है. उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि कैसे संयम और समय बाजार में सबसे बड़े हथियार होते हैं. आइए जानते हैं कि भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख ने आने वाले समय के लिए क्या रोडमैप तैयार किया है.

निफ्टी का 1000 से 25,000 तक का सफर

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आशीष चौहान ने बीते सालों की यादें ताजा करते हुए बताया कि निफ्टी की शुरुआत 3 नवंबर 1995 को हुई थी. उस समय इसका बेस यानी आधार अंक सिर्फ 1000 था. आज के समय में निफ्टी 25,000 अंकों के स्तर के करीब खड़ा है. यह ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है.

उन्होंने एक बहुत ही साधारण सा उदाहरण देकर समझाया कि अगर किसी ने उस समय 1000 रुपये का निवेश किया होता और उसे लंबी अवधि तक संभाल कर रखा होता, तो आज वह पैसा डिविडेंड को मिलाकर लगभग 28 से 30 हजार रुपये बन गया होता. इसका मतलब है कि अगर आप बाजार में टिके रहते हैं, तो 12-13 परसेंट का रिटर्न पाना कोई मुश्किल काम नहीं है.

IPO को लेकर क्या है ताजा तैयारी?

बाजार के सबसे बड़े सवाल यानी NSE के IPO पर जवाब देते हुए सीईओ ने कहा कि इसकी प्रक्रिया अब रफ्तार पकड़ रही है. इसी मार्च के महीने में मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति की जाएगी. अब सवाल उठता है कि इसका भाव क्या होगा? तो उन्होंने साफ किया कि वैल्यूएशन क्या होगी, यह पूरी तरह से मर्चेंट बैंकर्स ही तय करेंगे.

सेबी (SEBI) की तरफ से भी राहत मिली है. चूंकि NSE में कोई एक बड़ा प्रमोटर नहीं है, इसलिए सेबी ने लोअर फ्लोट की अनुमति दे दी है. तैयारियों को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि चौथी तिमाही यानी Q4 तक यह IPO बाजार में आ सकता है. यह उन निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका होगा जो देश के प्रमुख एक्सचेंज का हिस्सा बनना चाहते हैं.

वैश्विक हलचल और भारतीय बाजार

दुनियाभर में चल रही वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव का असर क्या भारत पर पड़ेगा? इस पर आशीष चौहान का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली उथल-पुथल नियंत्रण में रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का भारत पर असर काफी कम होगा.

हालांकि, उन्होंने हाल के समय में कुछ खास सेक्टर जैसे ऑटो, चिप और EMS शेयरों में हुई बिकवाली (सेल-ऑफ) का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा कि NSE का मुख्य फोकस इस समय स्पॉट मार्केट को मजबूत करने और ट्रेडिंग वॉल्यूम को बढ़ाने पर है. जहां तक महंगाई या CPI इन्फ्लेशन की बात है, तो इसका सटीक पूर्वानुमान लगाना उन्होंने अर्थशास्त्रियों के काम पर छोड़ दिया है.

ट्रेडिंग में नुकसान से बचाने का नया फॉर्मूला

आजकल हर कोई डेरिवेटिव ट्रेडिंग में हाथ आजमाना चाहता है, लेकिन इसमें होने वाले नुकसान की खबरें भी खूब आती हैं. इस पर लगाम लगाने के लिए NSE ने एक बड़ा सुझाव दिया है. सीईओ के मुताबिक, भविष्य में डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए एक 'मिनिमम क्वालिफिकेशन क्राइटेरिया' यानी न्यूनतम योग्यता का मापदंड लागू होना चाहिए.

उनका मानना है कि बिना जानकारी और बिना किसी योग्यता के इस जोखिम भरे सेगमेंट में उतरना निवेशकों के लिए घातक हो सकता है. इस नियम के आने से सिर्फ वही लोग ट्रेडिंग कर पाएंगे जिनके पास इसकी समझ होगी, जिससे बाजार में स्थिरता आएगी और लोगों का पैसा डूबने से बचेगा.

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