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7 अप्रैल को निफ्टी 155 अंक मजबूत होकर 23123 पर बंद हुआ. (AI जेनरेटेड फोटो)
Nifty Outlook: 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था. अब इस युद्ध को पांच हफ्ते से ज्यादा का समय गुजर चुका है. युद्ध के कारण क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार पहुंच गया और दुनियाभर के बाजारों में कोहराम मचा हुआ है. मार्च के महीने में निफ्टी में -11% से अधिक गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों के 51 लाख करोड़ रुपए डूब गए. आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का मानना है कि इस समय रिस्क रिवॉर्ड फेवरेबल है और निफ्टी के लए 27000 का टारगेट दिया गया है.
अपनी रिपोर्ट में ICICI Securities ने कहा कि ईरान क्राइसिस को लेकर ब्रॉडर मार्केट के मुकाबले NIFTY50 ज्यादा सुरक्षित है. किसी एक तिमाही में ऑयल क्राइसिस का NIFTY50 की कमाई पर बहुत ज्यादा असर नहीं होगा. हालांकि, हाई जियो पॉलिटिकल रिस्क बना हुआ है जिसके कारण अर्निंग मल्टीपल सीमित रह सकता है. ब्रोकरेज ने अगले एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग के मुकाबले निफ्टी के लिए 27000 का टारगेट दिया है जो 18-19x के P/E मल्टीपल पर पिक किया है.

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा कि अगर 2026 में 2-3 महीने के लिए क्रूड ऑयल का प्राइस 100 डॉलर से ऊपर रहता है फिर भी निफ्टी की कमाई पर खास असर नहीं होगा. हालांकि, जियो पॉलिटिकल रिस्क के कारण प्रीमियम वैल्युएशन नहीं मिलेगी. निफ्टी के लिए 27000 का टारगेट इन दो फैक्टर्स को ध्यान में रखकर दिया गया है.
अगर ईरान युद्ध 2-3 महीने से लंबा चलता है तो भारतीय शेयर बाजार की डी-रेटिंग भी संभव है. ऐसे में NIFTY50 के लिए 18x P/E मल्टीपल मिलना मुश्किल होगा. सप्लाई क्राइसिस के कारण कॉर्पोरेट अर्निंग में भी बड़ी गिरावट आएगी. ऐसे में बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि क्रूड ऑयल प्राइस और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई कैसी रहती है.

ब्रोकरेज ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण अभी तक डिमांड पर कोई खास असर नहीं है. फिलहाल असर सप्लाई को लेकर है. ऐसे में स्टेबल डिमांड के कारण प्राइसिंग बढ़ रही है और सलेक्टेड बिजनेस सेगमेंट को नुकसान हो रहा है. सप्लाई क्राइसिस के कारण सेरामिक, ग्लास, टेक्सटाइल, फर्टिलाइजर, केमिकल, रेस्टोरेंट्स जैसे सेक्टर के लिए इनपुट मटीरियल का अभाव हो गया है जिसके कारण इनके बिजनेस पर असर है. सरकार की तरफ से इन सेक्टर्स के लिए रिलीफ का ऐलान किया जा सकता है.
stable demand + supply shock = rising prices + select business loss
भारतीय शेयर बाजार में हालिया गिरावट जियो पॉलिटिकल अनसर्टेनिटी और क्रूड ऑयल में तेजी के कारण आई है. फंडामेंटल इस समय बहुत ज्यादा कमजोर नहीं है. 2-3 महीने के लिए क्रूड में तेजी और सप्लाई शॉक का निफ्टी50 की कमाई पर खास असर नहीं होगा. वैल्युएशन भी अब लॉन्ग टर्म ऐवरेज के करीब आ चुकी है. यह लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए मौका पैदा करता है. हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अगर सप्लाई क्राइसिस लंबी चलती है तो बाजार में डी-रेटिंग का खतरा है.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या मौजूदा गिरावट के बाद NIFTY50 में निवेश का मौका है?
वैल्युएशन लॉन्ग टर्म औसत के करीब आने से रिस्क-रिवॉर्ड फेवरेबल दिख रहा है.
Q2 क्रूड ऑयल 100 डॉलर पार रहने से निफ्टी की कमाई पर कितना असर होगा?
ICICI सिक्योरिटीज ने कहा कि 2-3 महीने तक असर सीमित रहने की उम्मीद है.
Q3 लंबा जियोपॉलिटिकल क्राइसिस बाजार को कैसे प्रभावित करेगा?
2-3 महीने से ज्यादा संकट रहने पर बाजार में डी-रेटिंग का खतरा बढ़ेगा.
Q4 किन सेक्टर्स पर सप्लाई शॉक का सबसे ज्यादा असर दिख रहा है?
केमिकल, फर्टिलाइजर, टेक्सटाइल, एविएशन और कंज्यूमर सेक्टर प्रभावित हैं.
Q5 ICICI Securities ने NIFTY50 के लिए क्या टारगेट दिया है?
ब्रोकरेज ने 12 महीने के लिए 27000 का टारगेट दिया है.