&format=webp&quality=medium)
अगर क्रूड ऑयल प्राइस में नरमी नहीं आती है तो बाजार में बड़े करेक्शन से इंतजार नहीं किया जा सकता है. (फाइल फोटो)
ग्लोबल अनसर्टेनिटी ने भारतीय शेयर बाजार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. क्रूड ऑयल प्राइस लगातार 110 डॉलर के आसपास बना हुआ है जिसने भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है. अगर कच्चे तेल में इसी तरह गरमी बनी रही तो आने वाले समय में भारतीय बाजार में बड़ा करेक्शन आ सकता है. ब्रोकरेज हाउस Emkay Global ने अपनी इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि आने वाले समय में निफ्टी 21000 के स्तर तक फिसल सकता है.
15 मई को खबर लिखे जाने के दौरान निफ्टी 23780 पर कारोबार कर रहा है. इसके मुकाबले निफ्टी में -12% की गिरावट आ सकती है. ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका और ईरान किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं तो परिस्थिति बदल सकती है. आइए 5 प्वाइंट्स में जानते हैं कि किन कारणों से ब्रोकरेज का भरोसा घटा है.
1. क्रूड ऑयल प्राइस
2. भारतीय बाजार की वैल्युएशन
3. RBI बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट
4. कंजप्शन को लग सकता है झटका
5. विदेशी निवेशकों (FPI) की बेरुखी

कुल मिलाकर ये 5 फैक्टर हैं जो ओवरऑल भारतीय बाजार के आउटलुक और सेंटिमेंट खराब कर रहे हैं और निवेशकों का भरोसा हिल रहा है. ऐसे में भारतीय बाजार की वैल्युएशन महंगी नजर आती है और एक बड़े करेक्शन से इनकार नहीं किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें: 42% रीटेल ओनरशिप वाले इस स्टॉक में आ सकती है तूफानी तेजी, ब्रोकरेज ने ₹30 का दिया टारगेट
गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी
पेट्रोल-डीजल प्राइस हाइक
एमके ग्लोबल का मानना है कि आने वाले समय में RBI की तरफ से इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी संभव है. पेट्रोल-डीजल में 10 रुपए की बढ़ोतरी से जून में महंगाई 4.4% पर पहुंच सकती है. ऐसे में रिजर्व बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है. हालांकि, इससे क्रेडिट साइकिल में रिकवरी पर ब्रेक लगेगा और कंजप्शन को बड़ा झटका लगेगा. हालांकि, बैंकों की कमाई बढ़ेगी और और ओवरऑल निफ्टी की कमाई को सपोर्ट मिलेगा. ऐसे में RBI के एक्शन पर फोकस करने की जरूरत है.
ये भी पढ़ें: Q4 रिजल्ट के बाद दौड़ पड़ा Hindustan Aeronautics का शेयर, ₹4850 के पार आएगी बड़ी तेजी- एक्सपर्ट
इसके अलावा आने वाले समय में सरकार की तरफ से LRS पर कंट्रोल बढ़ाया जा सकता है जो CY2025 में बढ़ा है. पेट्रोल-डीजल कंजप्शन घटाने के लिए डोमेस्टिक ट्रैवल को कम किया जा सकता है और WFH को बढ़ाया जा सकता है. आने वाले समय में कैपिटल गेन टैक्स को लेकर बड़े बदलाव से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.
कुल मिलाकर एमके ग्लोबल ने अपनी रिपोर्ट में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. जब तक ईरान-अमेरिका का मामला शांत नहीं हो जाता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई की समस्या दूर नहीं हो जाती है, क्रूड ऑयल में नरमी नहीं आ जाती तब तक भारतीय बाजार के लिए अनिश्चितता बनी रहेगी. अगरे ये तमाम समस्याएं लंबे समय के लिए जारी रहती हैं तो आने वाले समय में निफ्टी में 21000 का लेवल देखा जा सकता है.