क्या 21000 तक फिसल सकता है NIFTY? जानिए वो 5 संकेत जो दे रहे बड़ी गिरावट की चेतावनी

भारतीय बाजार की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है. क्रूड में तेजी और पेट्रोल-डीजल प्राइस हाइक महंगाई को बढ़ा सकती है और कंजप्शन को झटका लग सकता है. इससे कॉर्पोरेट की कमाई पर असर होगा. ब्रोकरेज फर्म Emkay Global ने कहा कि आने वाले समय में संभव है कि निफ्टी 21000 के स्तर तक फिसल जाए.
क्या 21000 तक फिसल सकता है NIFTY? जानिए वो 5 संकेत जो दे रहे बड़ी गिरावट की चेतावनी

अगर क्रूड ऑयल प्राइस में नरमी नहीं आती है तो बाजार में बड़े करेक्शन से इंतजार नहीं किया जा सकता है. (फाइल फोटो)

ग्लोबल अनसर्टेनिटी ने भारतीय शेयर बाजार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. क्रूड ऑयल प्राइस लगातार 110 डॉलर के आसपास बना हुआ है जिसने भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है. अगर कच्चे तेल में इसी तरह गरमी बनी रही तो आने वाले समय में भारतीय बाजार में बड़ा करेक्शन आ सकता है. ब्रोकरेज हाउस Emkay Global ने अपनी इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि आने वाले समय में निफ्टी 21000 के स्तर तक फिसल सकता है.

15 मई को खबर लिखे जाने के दौरान निफ्टी 23780 पर कारोबार कर रहा है. इसके मुकाबले निफ्टी में -12% की गिरावट आ सकती है. ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका और ईरान किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं तो परिस्थिति बदल सकती है. आइए 5 प्वाइंट्स में जानते हैं कि किन कारणों से ब्रोकरेज का भरोसा घटा है.

किन 5 फैक्टर्स को लेकर है ब्रोकरेज की चिंता?

1. क्रूड ऑयल प्राइस

  • कच्चे तेल की कीमतें 100-110 डॉलर के बीच बनी हुई है और अगर यह स्थिति लंबे समय के लिए चलती है भारतीय अर्थव्यवस्था के ग्रोथ पर इसका बड़ा और बुरा असर होगा.

2. भारतीय बाजार की वैल्युएशन

  • 23690 के लेवल पर निफ्टी 19.1x FY27 P/E पर ट्रेड कर रहा है. भारतीय बाजार ने अभी तक इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर संभावित समस्या को पूरी तरह से डिस्काउंट नहीं किया है. ऐसे में आने वाले समय में गिरावट संभव है.

3. RBI बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट

  • क्रूड में तेजी के कारण महंगाई पर बुरा असर होगा. ऐसे में RBI मॉनिटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला ले सकता है. इससे बाजार की लिक्विडिटी और सेंटिमेंट दोनों पर बुरा असर होगा.

4. कंजप्शन को लग सकता है झटका

  • पिछले कुछ सालों में सरकार ने इनकम टैक्स और GST कट की मदद से कंजप्शन को बूस्ट करने की कोशिश की. पेट्रोल-डीजल प्राइस बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर असर होगा. इसका सीधा असर कंजप्शन पर देखने को मिलेगा. नतीजन कई सेक्टर और को डिमांड का झटका लगेगा.

5. विदेशी निवेशकों (FPI) की बेरुखी

  • विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से निकासी कर रहे हैं. रुपए की कमजोरी इस आउटफ्लो को सपोर्ट कर रहा है. इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर 15 सालों के निचले स्तर पर है जो विदेशी निवेशकों को पैसा निकाल कर अमेरिका में निवेश करने के लिए प्रेरित कर रहा है. ऐसे में बाजार के लिए FII का सहारा फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है.
Emkay Global Nifty Target 21000


कुल मिलाकर ये 5 फैक्टर हैं जो ओवरऑल भारतीय बाजार के आउटलुक और सेंटिमेंट खराब कर रहे हैं और निवेशकों का भरोसा हिल रहा है. ऐसे में भारतीय बाजार की वैल्युएशन महंगी नजर आती है और एक बड़े करेक्शन से इनकार नहीं किया जा सकता है.

अब तक सरकार ने लिए 2 बड़े फैसले

  • गोल्ड-सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई
  • 4 साल बाद पेट्रोल-डीजल प्राइस में बढ़ोतरी

गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी

  • सरकार ने गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है
  • जुलाई 2022 में सेम फैसले से गोल्ड इंपोर्ट 17% से घटकर 7% पर आ गया था
  • गोल्ड इंपोर्ट में 15% की गिरावट से CAD को 23bps सपोर्ट मिलता है
  • हालांकि, इस फैसले से रीटेल इंफ्लेशन 8-9bps बढ़ सकता है

पेट्रोल-डीजल प्राइस हाइक

  • 4 साल बाद पेट्रोल-डीजल पर 3 रुपए से अधिक बढ़ोतरी की गई
  • अगले 2-3 हफ्तों में पेट्रोल-डीजल में 10 रुपए तक की बढ़ोतरी संभव
  • इस बढ़ोतरी से महंगाई 75bps तक बढ़ सकती है

आने वाले समय में और क्या हो सकता है?

एमके ग्लोबल का मानना है कि आने वाले समय में RBI की तरफ से इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी संभव है. पेट्रोल-डीजल में 10 रुपए की बढ़ोतरी से जून में महंगाई 4.4% पर पहुंच सकती है. ऐसे में रिजर्व बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है. हालांकि, इससे क्रेडिट साइकिल में रिकवरी पर ब्रेक लगेगा और कंजप्शन को बड़ा झटका लगेगा. हालांकि, बैंकों की कमाई बढ़ेगी और और ओवरऑल निफ्टी की कमाई को सपोर्ट मिलेगा. ऐसे में RBI के एक्शन पर फोकस करने की जरूरत है.

कैपिटल गेन टैक्स पर रहेगी नजर

इसके अलावा आने वाले समय में सरकार की तरफ से LRS पर कंट्रोल बढ़ाया जा सकता है जो CY2025 में बढ़ा है. पेट्रोल-डीजल कंजप्शन घटाने के लिए डोमेस्टिक ट्रैवल को कम किया जा सकता है और WFH को बढ़ाया जा सकता है. आने वाले समय में कैपिटल गेन टैक्स को लेकर बड़े बदलाव से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.

कंक्लूजन

कुल मिलाकर एमके ग्लोबल ने अपनी रिपोर्ट में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. जब तक ईरान-अमेरिका का मामला शांत नहीं हो जाता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई की समस्या दूर नहीं हो जाती है, क्रूड ऑयल में नरमी नहीं आ जाती तब तक भारतीय बाजार के लिए अनिश्चितता बनी रहेगी. अगरे ये तमाम समस्याएं लंबे समय के लिए जारी रहती हैं तो आने वाले समय में निफ्टी में 21000 का लेवल देखा जा सकता है.

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