अगले साल 29000 पर होगा Nifty! जियोपॉलिटिकल रिस्क के बीच ब्रोकरेज बुलिश, बताया- लॉन्ग टर्म निवेशक क्या करें

Emkay ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे क्रूड ऑयल के बावजूद भारतीय शेयर बाजार पर बुलिश रुख बरकरार रखा है. ब्रोकरेज ने मार्च 2027 तक निफ्टी का नया टारगेट बताया है. साथ ही बताया है कि लॉन्ग टर्म निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
अगले साल 29000 पर होगा Nifty! जियोपॉलिटिकल रिस्क के बीच ब्रोकरेज बुलिश, बताया- लॉन्ग टर्म निवेशक क्या करें

अगले साल के लिए आया निफ्टी 50 का नया लेवल, जानें ब्रोकरेज ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में क्या कहा? (फोटो - AI/ChatGPT)

ग्लोबल ब्रोकरेज Emkay ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और लगातार ऊंचे बने हुए कच्चे तेल के दामों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार पर अपनी सकारात्मक राय बरकरार रखी है. ब्रोकरेज ने अपने लेटेस्ट इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि मार्च 2027 तक निफ्टी 50 इंडेक्स 29000 के स्तर तक पहुंच सकता है. इसके लिए ब्रोकरेज ने FY28 अर्निंग्स के आधार पर 19.2x वैल्यूएशन मल्टीपल का अनुमान रखा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों की वजह से निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. हालांकि इसके बावजूद भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, बेहतर कॉर्पोरेट अर्निंग्स और सरकारी नीतिगत समर्थन लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं.

चौथी तिमाही के नतीजे स्थिर रहे

ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक Q4FY26 अर्निंग सीजन की शुरुआत अपेक्षाकृत स्थिर रही है. अब तक Emkay ग्लोबल के कवरेज यूनिवर्स की करीब 20% कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी कर चुकी हैं.

इनमें से 46% कंपनियों ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि सिर्फ 29% कंपनियां उम्मीद से कमजोर नतीजे पेश कर पाईं. रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अलग-अलग सेक्टर्स में मजबूती देखने को मिल रही है.

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अहम बात यह है कि ब्रोकरेज ने FY27 के लिए Nifty EPS अनुमान ₹1230 पर बरकरार रखा है. साथ ही करीब 13% अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान भी कायम रखा गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि इंडिया इंक निकट अवधि की चुनौतियों का सामना करने की स्थिति में है.

वैल्यूएशन सपोर्ट कमजोर, लॉन्ग टर्म आउटलुक मजबूत

रिपोर्ट में कहा गया कि हाल के समय में भारतीय बाजारों को मिलने वाला वैल्यूएशन सपोर्ट थोड़ा कमजोर हुआ है. फिलहाल निफ्टी FY27 फॉरवर्ड अर्निंग्स के करीब 19.2x मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जो उसके पिछले पांच साल के औसत के करीब है.

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हालांकि Emkay ग्लोबल का मानना है कि अगर वैश्विक कारणों से बाजार में तेज गिरावट आती है तो उसे लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए खरीदारी के मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि भारत की दीर्घकालिक ग्रोथ स्टोरी के लिए किसी बड़े खतरे के रूप में.

इन सेक्टर पर ओवरवेट का रुख

  • डिसक्रेशनरी कंज्म्पशन
  • मेटेरियल्स
  • इंडस्ट्रियल्स
  • रियल एस्टेट

इन सेक्टर पर अंडरवेट रुख

  • फाइनेंशियल्स
  • एनर्जी
  • हेल्थकेयर
  • स्टेपल्स
  • टेलीकॉम
  • टेक्नोलॉजी

मिडिल ईस्ट संकट बड़ी चिंता

रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक संकट को बताया गया है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पिछले 11 हफ्तों से बंद है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है.

इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है. ब्रेंट क्रूड लगातार 105-110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया कि अगर लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है क्योंकि भारत ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है.

क्रूड महंगा हुआ तो क्या होगा असर?

Emkay ग्लोबल की मैक्रोइकॉनॉमिक एनालिसिस के मुताबिक अगर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना रहता है तो भारत का करंट अकाउंट डेसिसिट GDP के 2.4% तक पहुंच सकता है, जबकि पहले इसका अनुमान 1.3% था. इसके साथ ही GDP ग्रोथ घटकर 6.3% तक आ सकती है, जो पहले 7% अनुमानित थी. वहीं CPI इन्फ्लेशन बढ़कर 4.6% तक पहुंच सकती है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. ऐसे में भारत की GDP ग्रोथ घटकर 5.5% तक आ सकती है, जबकि इन्फ्लेशन 5% तक पहुंच सकती है. इससे पॉलिसी मेकर्स और घरेलू खपत दोनों पर दबाव बढ़ सकता है.

रिसर्च हेड ने क्या कहा?

ब्रोकरेज के रिसर्च और स्ट्रैटेजिक हेड सेशाद्री सेन ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊंचे क्रूड प्राइस निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं, लेकिन भारत की स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है.

उनके मुताबिक बाजार में आने वाली किसी भी निकट अवधि की कमजोरी को लॉन्ग टर्म पोर्टफोलियो पोजिशनिंग के मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बाहरी जोखिम कम होंगे, भारत मध्यम अवधि में मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ और स्थिर आर्थिक विस्तार देने की अच्छी स्थिति में रहेगा.

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