&format=webp&quality=medium)
NSE ने यस सिक्योरिटीज पर लिया बड़ा एक्शन, लगाया एक लाख का जुर्माना (फोटो - AI)
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने ब्रोकरेज फर्म YES सिक्योरिटीज के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. NSE ने कंपनी को 3 महीने तक नए ग्राहक जोड़ने यानी ऑनबोर्डिंग करने से रोक दिया है. यह कार्रवाई अपफ्रंट मार्जिन और पीक मार्जिन से जुड़े नियामकीय उल्लंघनों के मामले में की गई है.
NSE की मेंबर कमिटी की जांच में पाया गया कि YES सिक्योरिटीज ने कई मामलों में ग्राहकों से ऐसी पेनाल्टी वसूली, जिसे नियमों के अनुसार ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता था.
जांच में सामने आया कि कंपनी ने 48 ग्राहकों के कुल 211 मामलों में अपफ्रंट और पीक मार्जिन शॉर्टफॉल पर लगी पेनाल्टी ग्राहकों से वसूल ली. इसकी कुल राशि करीब ₹18.31 लाख थी.
ये भी पढ़ें: CRISIL ने बढ़ाई रेटिंग; Nvidia, Samsung जैसे सप्लायर के साथ कंपनी के संबंध, स्टॉक पर रखें नजर
NSE ने कहा कि SEBI और एक्सचेंज के नियमों के मुताबिक अपफ्रंट मार्जिन की कमी पर लगने वाली पेनाल्टी किसी भी स्थिति में ग्राहकों पर ट्रांसफर नहीं की जा सकती.
नियमों के अनुसार ट्रेडिंग मेंबर यानी ब्रोकरेज कंपनियों की जिम्मेदारी होती है कि वे मार्जिन डिस्पलिन बनाए रखें और नियमों का पालन करें, बिना ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डाले.
NSE ने यह भी कहा कि YES सिक्योरिटीज ने पहले दिए गए आदेश का भी पूरी तरह पालन नहीं किया. दिसंबर 2024 में एक्सचेंज ने कंपनी को निर्देश दिया था कि ग्राहकों से वसूली गई करीब ₹9.45 लाख की पेनाल्टी वापस की जाए. हालांकि समिति ने पाया कि कंपनी ने इस निर्देश का सही तरीके से पालन नहीं किया. इसी वजह से NSE ने कंपनी पर ₹1 लाख का मौद्रिक जुर्माना भी लगाया है.
Zee Business Hindi Live TV यहां देखें
इसके अलावा एक्सचेंज ने YES सिक्योरिटीज को निर्देश दिया है कि वह अपफ्रंट और पीक मार्जिन से जुड़ी वसूली गई पूरी पेनाल्टी प्रभावित ग्राहकों को 15 दिनों के भीतर वापस करे.
NSE की अनुशासनात्मक समिति ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अंशुल अरजारे और कम्प्लायंस ऑफिसर आदित्य गोयंका को भी भविष्य में नियामकीय निर्देशों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है.
ये भी पढ़ें: मई में इस कंपनी को मिला तीसरा ऑर्डर, वैल्यू ₹9.3 करोड़; रेखा झुनझुनवाला के पास 1,21,98,376 शेयर
समिति ने कहा कि ब्रोकरेज कंपनियों को निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों का पूरी तरह पालन करना जरूरी है.
बीते कुछ साल में बाजार नियामकों और एक्सचेंजों ने रिस्क मैनेजमेंट नियमों को काफी सख्त किया है. अपफ्रंट मार्जिन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रेडिंग से पहले ब्रोकर ग्राहकों से पर्याप्त कोलेटरल या मार्जिन लें, ताकि बाजार में जोखिम कम किया जा सके.
NSE का मानना है कि अगर ब्रोकर मार्जिन नियमों का पालन नहीं करते और पेनाल्टी ग्राहकों पर डालते हैं, तो इससे निवेशकों के हित प्रभावित हो सकते हैं.
इसी बीच NSE ने एक अलग घोषणा में बताया कि एक्साइड इंडस्ट्रीज और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को जुलाई 2026 से डेरिवेटिव्स यानी Futures & Options (F&O) सेगमेंट से हटाया जाएगा.
हालांकि एक्सचेंज ने स्पष्ट किया कि मई 2026, जून 2026 और जुलाई 2026 के सभी मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स उनकी एक्सपायरी तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे. NSE की यह कार्रवाई ब्रोकरेज इंडस्ट्री के लिए एक मजबूत संदेश है कि नियामकीय नियमों के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)