सस्ते Mutual Funds से कमाएं ज्यादा मुनाफा, एक्सपेंस रेश्यो देखकर चुने फंड

Expense Ratio से ही ये तय होता है कि कोई फंड आपको कितना सस्ता मिलेगा. एक्सपेंस रेश्यो के कम-ज्यादा होने का सीधा असर आपके रिटर्न पर भी पड़ता है.
सस्ते Mutual Funds से कमाएं ज्यादा मुनाफा, एक्सपेंस रेश्यो देखकर चुने फंड

जैसे-जैसे फंड साइज बड़ी होती है, फंड साइज बढ़ने पर कंपनी का खर्च कम होता है. ऐसे में एक लार्ज फंड का एक्सपेंस रेश्यो कम होगा और छोटे फंड हाउस का एक्सपेंस रेश्यो ज्यादा होगा.

म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में निवेश से पहले अक्सर हम उस फंड का प्रदर्शन देखते हैं. फंड मैनेजर के बारे में रिसर्च करते हैं. लेकिन एक और चीज है जो आपको देखनी चाहिए, वह है एक्सपेंस रेश्यो. फंड के एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) से ही ये तय होता है कि कोई फंड आपको कितना सस्ता मिलेगा. एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) के कम-ज्यादा होने का सीधा असर आपके रिटर्न पर भी पड़ता है.

amitkukreja.com के फाउंडर अमित कुकरेजा के मुताबिक, म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) के प्रबंधन पर खर्च आता है. इसी खर्च का अनुपात एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) कहलाता है. एक्सपेंस रेश्यो एक सालाना फीस होती है. यह प्रति यूनिट आने वाले खर्च को दर्शाता है. इसलिए फंड में निवेश के वक्त एक्सपेंस रेश्यो देखें.

मान लीजिए किसी फंड का एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) 1.1 फीसदी है. कंपनी के असेट की साइज 1000 रुपये है. ऐसे में फंड हाउस हर साल 11 रुपये खर्चों के लिए निकालेगा. फंड का एक्सपेंस रेश्यो निकालने के लिए कुल संपत्ति (Assets Under Management) को कुल खर्च से भाग दिया जाता है.

NAV और एक्सपेंस रेश्यो में फर्क
नेट असेट वैल्यू (Net Asset Value) फंड के प्रति शेयर की मार्केट वैल्यू होती है. ये वो मूल्य है, जिस पर निवेशक यूनिट्स खरीदते-बेचते हैं. एक्सपेंस घटाने के बाद ही NAV निकलती है. NAV जहां रोजाना जारी की जाती है और एक्सपेंस रेश्यो हर 6 महीने में जारी होते हैं.

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ऐसे कैलकुलेट होता है NAV
फंड के पोर्टफोलियो में मौजूद कैश, सिक्योरिटीज से नेट असेट वैल्यू तय की जाती है. कैश, सिक्योरिटीज की वैल्यू को आउटस्टैंडिंग शेयर से भाग दिया जाता है. असेट की मौजूदा वैल्यू और कैश 'असेट अंडर मैनेजमेंट' या AUM कहते हैं. AUM को यूनिट्स सी कुल संख्या से भाग देंगे तो NAV मिलेगा.

फॉर्मूला: AUM ÷ कुल यूनिट्स= NAV

NAV का कैलकुलेशन एक ट्रेडिंग डे में एक बार किया जाता है. पोर्टफोलियो की सिक्योरिटीज के क्लोजिंग प्राइस पर इसकी गणना होती है.

किन खर्चों के लिए एक्सपेंस रेश्यो?
फंड को मैनेज करने के लिए फंड हाउस के कई खर्च होते हैं. फंड हाउस के प्रशिक्षित पेशेवरों की एक टीम होती है. पेशेवरों की टीम मार्केट, कंपनियों पर नजर रखती है. ट्रांसफर और रजिस्ट्रार से संबंधित खर्च भी शामिल होते हैं. कस्टोडियन, ऑडिट, मार्केटिंग, का खर्च भी होता है.

एक्सपेंस रेश्यो की कोई सीमा है?
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने एक्सपेंस रेश्यो की समीक्षा की है. सेबी ने एक्सपेंस रेश्यो की सीमा तय कर दी है. इक्विटी असेट्स का 2.5% तक चार्ज कर सकते हैं. स्कीम जितने असेट मैनेज करती है, उसका 2.5 फीसदी चार्ज किया जाता है. डेट फंड्स के लिए एक्सपेंस रेश्यो की सीमा 2.25 फीसदी है. इंडेक्स फंड, ETF का एक्सपेंस रेश्यों की सीमा 1.5% है. फंड ऑफ फंड्स के लिए अधिकतम एक्सपेंस रेश्यो 0.75 फीसदी है.

किस तरह की AMC का एक्सपेंस रेश्यो कम
आमतौर पर जैसे-जैसे फंड साइज बड़ी होती है, फंड साइज बढ़ने पर कंपनी का खर्च कम होता है. ऐसे में एक लार्ज फंड का एक्सपेंस रेश्यो कम होगा और छोटे फंड हाउस का एक्सपेंस रेश्यो ज्यादा होगा.

कम एक्सपेंस रेश्यो का फायदा
आमतौर पर कम एक्सपेंस रेश्यो बेहतर होता है. कम एक्सपेंस रेश्यो से रिटर्न बढ़ने की संभावना रहती है. फंड चुनते वक्त एक्सपेंस रेश्यो देखना अच्छा होता है. सिर्फ एक्सपेंस रेश्यो के आधार पर फंड न चुनें, अन्य पैरामीटर्स भी ध्यान रखें.

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