क्या होती है MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग? जिसकी वजह से 10 मिनट में भरभराकर गिर गया बाजार

MSCI Rebalancing: दिनभर बाजार में दबाव बना रहा, लेकिन अंतिम आधे घंटे में MSCI Rebalancing से जुड़ी बिकवाली ने गिरावट को और तेज कर दिया. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई ग्लोबल फंड्स ने MSCI इंडेक्स में बदलाव के चलते अपने पोर्टफोलियो में एडजस्टमेंट किया, जिसका असर बाजार पर साफ दिखा.
क्या होती है MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग? जिसकी वजह से 10 मिनट में भरभराकर गिर गया बाजार

MSCI Rebalancing के चलते आज बाजार में आई भारी बिकवाली. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AI/ChatGPT)

MSCI Rebalancing: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को आखिरी घंटे में भारी बिकवाली देखने को मिली. खासकर दोपहर 3 बजे 10 मिनट के अंदर सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई थी. जियोपॉलिटिलक तनाव और FIIs की सेलिंग का प्रेशर तो था ही, MSCI Global Standard Index की रीबैलेंसिंग का भी बड़ा असर देखने को मिला.

बाजार बंद होने के आखिरी घंटे में कई शेयरों में अचानक भारी वॉल्यूम और तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला. इसकी वजह रही MSCI इंडेक्स में शामिल और बाहर किए गए शेयरों में ग्लोबल पैसिव फंड्स और ETF की खरीदारी-बिकवाली.

दिनभर बाजार में दबाव बना रहा, लेकिन अंतिम आधे घंटे में MSCI Rebalancing से जुड़ी बिकवाली ने गिरावट को और तेज कर दिया. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई ग्लोबल फंड्स ने MSCI इंडेक्स में बदलाव के चलते अपने पोर्टफोलियो में एडजस्टमेंट किया, जिसका असर बाजार पर साफ दिखा.

29 मई से लागू हुए नए बदलाव

MSCI Index पर 29 मई से कई बदलाव लागू होने थे, जिनमें कई शेयरों की एंट्री और कुछ की एग्जिट होनी थी. मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक MSCI रीबैलेंसिंग के चलते विदेशी फंड्स को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना पड़ता है. यही वजह है कि कई शेयरों में क्लोजिंग के समय असामान्य मूवमेंट देखने को मिला.

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क्या होता है MSCI Index?

MSCI Index दुनिया के बड़े ग्लोबल इक्विटी इंडेक्स में से एक माना जाता है. इसे दुनियाभर के पैसिव फंड्स, ETF और बड़े विदेशी निवेशक ट्रैक करते हैं. जब MSCI किसी शेयर को इंडेक्स में शामिल करता है, तो उसे ट्रैक करने वाले फंड्स उस शेयर में निवेश बढ़ाते हैं. वहीं इंडेक्स से बाहर होने पर शेयरों में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है.

MSCI Global Standard Index में विकसित और बड़े उभरते बाजारों के चुनिंदा शेयर शामिल होते हैं. इसकी रीबैलेंसिंग के दौरान विदेशी निवेशकों के बड़े फ्लो आते-जाते हैं.

इन 4 शेयरों की MSCI Index में एंट्री

जानकारी है कि ताजा रीबैलेंसिंग में Federal Bank, MCX, NALCO और Indian Bank को MSCI Global Standard Index में शामिल किया गया है. बाजार अनुमान के मुताबिक इन शेयरों में बड़े पैमाने पर पैसिव इनफ्लो देखने को मिल सकते हैं.

Federal Bank में करीब 483 मिलियन डॉलर का इनफ्लो आने का अनुमान है. वहीं MCX में 362 मिलियन डॉलर, NALCO में 328 मिलियन डॉलर और Indian Bank में करीब 206 मिलियन डॉलर का निवेश आ सकता है.

मार्केट में आमतौर पर MSCI में शामिल होने वाले शेयरों को शॉर्ट टर्म में सपोर्ट मिलता है क्योंकि इंडेक्स ट्रैकिंग फंड्स को मजबूरी में इन शेयरों को खरीदना पड़ता है. इससे लिक्विडिटी और संस्थागत हिस्सेदारी भी बढ़ती है.

इन शेयरों पर बढ़ा दबाव

जहां इंडेक्स में शामिल शेयरों को फायदा मिला, वहीं MSCI से बाहर किए गए शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला. Hyundai Motor India, Jubilant FoodWorks, Kalyan Jewellers India और Rail Vikas Nigam (RVNL) को इंडेक्स से बाहर किया गया है.

अनुमान के मुताबिक Hyundai Motor India में करीब 278 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो हो सकता है. Jubilant FoodWorks में 151 मिलियन डॉलर, Kalyan Jewellers में 131 मिलियन डॉलर और RVNL में करीब 118 मिलियन डॉलर की बिकवाली संभव है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि MSCI से बाहर होने वाले शेयरों में क्लोजिंग के समय ज्यादा वोलैटिलिटी देखने को मिलती है क्योंकि पैसिव फंड्स अपनी होल्डिंग कम करते हैं.

क्या निवेशकों को घबराने की जरूरत है?

बाजार जानकारों का मानना है कि MSCI रीबैलेंसिंग का असर ज्यादातर तकनीकी और फ्लो आधारित होता है. इससे शेयरों में शॉर्ट टर्म में तेज उतार-चढ़ाव जरूर आता है, लेकिन लंबी अवधि में किसी भी कंपनी का प्रदर्शन उसके बिजनेस, कमाई और ग्रोथ पर ही निर्भर करता है. ऐसे में निवेशकों को सिर्फ MSCI फ्लो देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और वैल्यूएशन पर भी नजर रखनी चाहिए.

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