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चौथी तिमाही के लिए कैसी रहेंगी अर्निंग्स? (AI जनरेटेड फोटो)
FY26 खत्म होने के साथ और FY27 की शुरुआत पर भारतीय शेयर बाजार एक अहम मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है. एक तरफ कई मजबूत फैक्टर्स बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ Iran–Israel–US क्राइसिस जैसे भू-राजनीतिक तनाव दबाव बना रहे हैं. मोतीलाल ओसवाल ने लेटेस्ट रिपोर्ट जारी की है.
अगर बड़ी तस्वीर देखें तो भारत के लिए कई पॉजिटिव संकेत हैं. सरकार और RBI की सपोर्टिव नीतियां, विदेशी व्यापार समझौतों में प्रगति, घरेलू मांग में सुधार, उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ और रिटेल निवेशकों का लगातार भरोसा. इसके अलावा, उभरते बाजारों (EMs) के मुकाबले भारत का हालिया कमजोर प्रदर्शन भी आगे रिकवरी का मौका दे सकता है.
लेकिन इन सभी पॉजिटिव फैक्टर्स के बावजूद, मौजूदा समय में बाजार पर Iran–Israel–US क्राइसिस का असर साफ दिख रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है भारत की ऊर्जा निर्भरता, क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई Strait of Hormuz के जरिए आती है. भारत की करीब 35-40% क्रूड जरूरत और युद्ध से पहले लगभग 54% LPG सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती थी.
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ग्रोथ की रफ्तार कम: मोतीलाल ओसवाल (MOFSL) की रिपोर्ट के मुताबिक, चौथी तिमाही (4QFY26) में कंपनियों की कमाई की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. अनुमान है कि MOFSL कवरेज वाली कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ करीब 10% YoY रहेगी, जो पिछली दो तिमाहियों (18% और 15%) से कम है.
PAT की स्थिति: अगर फाइनेंशियल सेक्टर को हटा दें, तो मुनाफे (PAT) में करीब 9% की ग्रोथ का अनुमान है. वहीं ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को छोड़कर यह आंकड़ा करीब 10% YoY रह सकता है.
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सेक्टर: लार्जकैप कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव दिख सकता है. यहां अर्निंग्स ग्रोथ करीब 7% रहने का अनुमान है. ऑयल एंड गैस, ऑटो, PSU बैंक, हेल्थकेयर और कैपिटल गुड्स सेक्टर इस कमजोरी की बड़ी वजह हैं.
मिडकैप कंपनियां: हालांकि मिडकैप कंपनियों में सुधार की उम्मीद है. यहां अर्निंग्स ग्रोथ करीब 25% तक जा सकती है, जो पिछली तिमाही के 16% से ज्यादा है. स्मॉलकैप कंपनियों में भी 18% ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि यह पहले के 27% से कम है.
कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा फैक्टर बनकर सामने आई है. महंगे क्रूड का असर सीधे उन सेक्टर्स पर पड़ता है जो एनर्जी पर निर्भर हैं.
इसी वजह से पिछले दो तिमाहियों से चल रहा पॉजिटिव अर्निंग्स रिविजन ट्रेंड मार्च 2026 में पलट गया. MOFSL ने FY26 के कुल अर्निंग्स अनुमान में करीब 1.4% की कटौती की है. पहले जहां 4QFY26 के लिए 14% ग्रोथ का अनुमान था, अब इसे घटाकर 10% कर दिया गया है.
FY27 के लिए भी तस्वीर थोड़ी कमजोर दिख रही है, जहां अर्निंग्स अनुमान में करीब 3% की कटौती की गई है.
तेल-गैस की कीमतों में उछाल का असर सिर्फ कंपनियों की कमाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बाजार का जोखिम (equity risk premium) भी बढ़ा है, जिसकी वजह से बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली.
इस समय बाजार की दिशा काफी हद तक ईरान-इजरायल क्राइसिस के समाधान पर निर्भर है. हालांकि अमेरिका की घरेलू राजनीति को देखते हुए जल्दी समाधान की उम्मीद की जा रही है, लेकिन हाल के बयानों में बदलाव से अनिश्चितता बनी हुई है.
ऐसे में आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह युद्ध बहुत लंबे समय तक चलने की संभावना कम है. लेकिन जब तक स्थिति साफ नहीं होती, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.
मौजूदा हालात में एक्सपर्ट “बॉटम-अप” अप्रोच अपनाने की सलाह दे रहे हैं. यानी निवेशकों को ऐसी कंपनियां चुननी चाहिए जिनकी कमाई (earnings) की ग्रोथ साफ दिखाई दे.
अभी वैल्यूएशन को देखें तो बाजार में बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम लगती है. ऐसे में आगे की तेजी पूरी तरह कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगी.
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हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार अब ज्यादा आकर्षक नजर आ रहा है. Nifty 50 करीब 18x P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके लॉन्ग पीरियड एवरेज से 14% कम है.
FY26 में भारतीय बाजार 3% गिरा, जबकि MSCI EM इंडेक्स 31% चढ़ा. इसका मतलब है कि भारत ने करीब 34% अंडरपरफॉर्म किया, जो पिछले दो दशकों में सबसे ज्यादा हो सकता है. अब भारत का वैल्यूएशन प्रीमियम EMs के मुकाबले घटकर 27% रह गया है, जो 10 साल के औसत 73% से काफी कम है.
घरेलू निवेशक (DIIs) इस समय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं. CY26 में अब तक DIIs ने करीब 28.8 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसमें SIP का बड़ा रोल है. वहीं विदेशी निवेशक (FIIs) का रुख उतार-चढ़ाव भरा रहा है. फरवरी में खरीदारी के बाद मार्च में भारी बिकवाली देखने को मिली.
हालांकि, जैसे ही युद्ध का असर कम होगा, FII फ्लो में सुधार की उम्मीद है. सिर्फ बिकवाली कम होना भी बाजार के लिए पॉजिटिव होगा, जबकि मजबूत खरीदारी आने पर बाजार में तेज रैली संभव है.
FY26 में कमजोर प्रदर्शन और भारी FII आउटफ्लो के बाद अब FY27 के लिए एक मजबूत बेस तैयार हो गया है. हालांकि ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध अभी भी सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है, लेकिन अगर इसका समाधान निकलता है तो बाजार में पॉजिटिव सेंटीमेंट तेजी से लौट सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, FY26-28 के दौरान MOFSL यूनिवर्स और निफ्टी दोनों के लिए करीब 16% अर्निंग्स CAGR ग्रोथ का अनुमान है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 Q4FY26 में कंपनियों की कमाई कैसी रहने की उम्मीद है?
करीब 10% YoY ग्रोथ का अनुमान है, जो पिछली तिमाहियों से कम है.
Q2 अर्निंग्स ग्रोथ पर सबसे बड़ा दबाव किस वजह से है?
कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों की वजह से.
Q3 निवेशकों को अभी क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
बॉटम-अप अप्रोच अपनाएं और मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ वाली कंपनियों में निवेश करें.
Q4 क्या भारतीय बाजार EMs के मुकाबले बेहतर स्थिति में है?
हालिया गिरावट के बाद वैल्यूएशन आकर्षक हुए हैं, जिससे आगे रिकवरी की संभावना है.