निफ्टी को लगा तीसरा बड़ा झटका, अब Goldman Sachs ने घटा दिया टारगेट; क्या 2026 में बाजार से नहीं हो पाएगी अच्छी कमाई?

Sensex-Nifty Outlook: अब Goldman Sachs ने भी भारत पर अपना रुख बदलते हुए रेटिंग घटा दी है. इससे पहले Nomura और Citi भी निफ्टी के टारगेट में कटौती कर चुके हैं. सवाल अब यह है कि क्या 2026 में बाजार दमदार रिटर्न नहीं दे पाएगा?
निफ्टी को लगा तीसरा बड़ा झटका, अब Goldman Sachs ने घटा दिया टारगेट; क्या 2026 में बाजार से नहीं हो पाएगी अच्छी कमाई?

अब Goldman Sachs ने भी घटा दिया निफ्टी का टारगेट. (Image: AI-generated)

Sensex-Nifty: भारतीय शेयर बाजार की गिरावट के बीच निवेशकों का इस साल अपने पोर्टफोलियो के रिटर्न को लेकर जो डर है, वो सच होता दिख रहा है. एक के बाद एक विदेशी ब्रोकरेज भारतीय बाजार को लेकर सतर्क होते जा रहे हैं. अब Goldman Sachs ने भी भारत पर अपना रुख बदलते हुए रेटिंग घटा दी है. इससे पहले Nomura और Citi भी निफ्टी के टारगेट में कटौती कर चुके हैं.

तीन बड़े ग्लोबल ब्रोकरेज का एक साथ टारगेट घटाना बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है. सवाल अब यह है कि क्या 2026 में बाजार दमदार रिटर्न नहीं दे पाएगा?

किसने कितना घटाया निफ्टी का टारगेट?

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ब्रोकरेजपुराना टारगेटनया टारगेट
Citi28,50027,000
Goldman Sachs29,30025,900
Nomura29,30024,900

Goldman Sachs ने क्यों घटाई रेटिंग?

Goldman Sachs ने भारत को Overweight से घटाकर “Market Weight” कर दिया है. साथ ही 2026 के लिए जो ब्रोकरेज का टारगेट था, 29,300 का, उसे भी घटाकर 25,900 कर दिया है फिलहाल निफ्टी 23,000 पर ट्रेड कर रहा है, तो वहां से इसमें करीब 13% की तेजी की उम्मीद है. दिलचस्प है कि ब्रोकरेज का ये टारगेट निफ्टी के ऑलटाइम हाई 26,373 के काफी नीचे है.

Market Weight का मतलब क्या है?

इसका मतलब है कि अब बाजार से “आउटपरफॉर्म” की उम्मीद नहीं है. यानी निफ्टी का प्रदर्शन इंडेक्स के बराबर रहने की संभावना है, उससे बेहतर नहीं.

डाउनग्रेड के पीछे क्या हैं बड़े कारण?

1. कच्चे तेल में तेजी

ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. भारत एक बड़ा आयातक देश है, इसलिए महंगा क्रूड सीधे महंगाई और चालू खाते पर असर डालता है.

2. कमजोर FII फ्लो

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की रफ्तार को सीमित कर रही है.

3. ग्रोथ अनुमान में कटौती

ब्रोकरेज ने 2026 GDP ग्रोथ घटाकर 5.9% कर दिया है. वहीं, FY26 अर्निंग्स ग्रोथ 16% से घटाकर 8% कर दिया है. यानी कॉर्पोरेट मुनाफे की रफ्तार आधी हो सकती है.

4. Earnings Downgrade का खतरा

अगले 2-3 तिमाही में कमाई के अनुमान और घट सकते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना रहेगा.

सेक्टर रणनीति: कहां मौका, कहां जोखिम?

Goldman Sachs on Sectors

स्पष्ट संकेत है कि इस समय “डिफेंसिव” स्टॉक्स ज्यादा सुरक्षित माने जा रहे हैं.

HSBC का क्या कहना है?

HSBC का मानना है कि बाजार में अभी जो गिरावट और दबाव है, वह क्रूड ऑयल वोलैटिलिटी के ऐतिहासिक ट्रेंड के अनुरूप ही है. 10% क्रूड बढ़ने पर बाजार 1.3% गिरता है. 20% क्रूड बढ़ने पर अर्निंग्स में 1.5% कटौती हो सकती है. HSBC ने भी डिफेंसिव स्टॉक्स पर फोकस की सलाह दी है.

HSBC के स्टॉक्स

HSBC Stocks

क्या 2026 में रिटर्न नहीं देगा बाजार?

यह कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार बिल्कुल रिटर्न नहीं देगा, लेकिन यह साफ है कि रिटर्न सीमित रह सकते हैं. वोलैटिलिटी ज्यादा रहेगी और सेक्टर और स्टॉक चयन बेहद अहम होगा. Goldman Sachs के अनुसार, 12 महीने में करीब 13% रिटर्न की संभावना है, जो पहले के मुकाबले कम है.

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

1. रणनीति बदलने का समय: अब “Buy everything” वाला दौर नहीं है. चुनिंदा सेक्टर और क्वालिटी स्टॉक्स पर फोकस जरूरी है.

2. डिफेंसिव सेक्टर में शिफ्ट: FMCG, बैंकिंग और टेलीकॉम जैसे सेक्टर में स्थिरता मिल सकती है.

3. हाई बीटा स्टॉक्स में सावधानी: ऑटो, NBFC और मेटल जैसे सेक्टर ज्यादा वोलैटाइल रह सकते हैं.

4. SIP और लॉन्ग टर्म निवेश जारी रखें: लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए गिरावट में अवसर बन सकता है.

रिपोर्ट की खास बातें शॉर्ट में:

Goldman Sachs Nifty Target

FAQs

1. Market Weight रेटिंग का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि बाजार इंडेक्स के बराबर प्रदर्शन करेगा, उससे बेहतर नहीं.

2. क्या निफ्टी में और गिरावट आ सकती है?
अगर क्रूड ऊंचा रहता है और FII बिकवाली जारी रहती है, तो दबाव बना रह सकता है.

3. अभी किन सेक्टर्स में निवेश बेहतर है?
बैंकिंग, FMCG, टेलीकॉम और डिफेंस जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स बेहतर माने जा रहे हैं.

4. क्या 2026 में बाजार रिटर्न देगा?
रिटर्न मिल सकता है, लेकिन पहले जितना मजबूत नहीं और ज्यादा चयन आधारित होगा.

5. निवेशकों को अभी क्या करना चाहिए?
घबराने की बजाय पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करें, क्वालिटी स्टॉक्स पर फोकस रखें और स्टैगर्ड निवेश करें.

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